Vrat Tutne Par Kya Kare: सनातन परंपरा में एकादशी व्रत सभी कामनाओं को पूरा करने वाला माना गया है. भगवान विष्णु का यह व्रत प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष और शुक्लपक्ष में रखा जाता है. साल भर में पड़ने वाली कुल 24 एकादशी में माघ मास के शुक्लपक्ष में पड़ने वाली एकादशी तिथि का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है क्योंकि यह व्यक्ति के जीवन से जुड़े सभी दोष और बाधाओं को दूर करके सुख-सौभाग्य और समृद्धि दिलाने वाली मानी गई है.
हिंदू मान्यता के अनुसार जया एकादशी व्रत को विधि-विधान से करने वाले साधक पर लक्ष्मी और नारायण दोनों की कृपा बरसती है और वह प्रत्येक कार्य में सफल होता है, लेकिन यदि जाने-अनजाने में यह व्रत किसी कारणवश खंडित हो जाए तो उस दोष को दूर करने के लिए क्या उपाय करना चाहिए, आइए इसे विस्तार से जानते हैं.
जया एकादशी व्रत टूटने पर क्या करें
किसी भी पूजा या व्रत के अधूरा रह जाने पर दुख और पश्चाताप होना स्वभाविक है, लेकिन हिंदू धर्म शास्त्र में अनजाने में हुई किसी भी गलती के लिए प्रायश्चित करने के कुछ उपाय बताए गये हैं. आइए जया एकादशी व्रत के टूटने पर किए जाने वाले उस सरल सनातनी उपाय के बारे में जानते हैं, जिसे करने पर व्रत टूटने का दोष दूर होता है और पुण्यफल बना रहता है -
- यदि आपसे अनजाने में जया एकादशी व्रत खंडित हो गया है तो सबसे पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु का ध्यान करें.
- तन और मन से पवित्र होने के बाद सबसे पहले श्री हरि के सामने शरणागत होते हुए अपनी भूल के लिए क्षमायाचना करें.
- सनातन परंपरा में किसी भी दोष को दूर करने के लिए दान को सबसे उत्तम उपाय माना गया है. ऐसे में यदि जया एकादशी व्रत किसी कारण खंडित हो जाए तो आपको स्नान और दान दोनों से जुड़ा उपाय करना चाहिए. साधक को किसी जरूरमंद व्यक्ति या किसी मंदिर के पुजारी को अपने सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र या धन दान करना चाहिए.
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- जया एकादशी व्रत के टूट जाने के बाद भी व्रत से जुड़े सारे नियमों का पालन करें और व्रत टूटने के दोष को दूर करने के लिए अधिक से अधिक श्री हरि के मंत्र 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जप करें.
- भगवान विष्णु के इस पावन व्रत के टूट जाने पर साधक को भगवान विष्णु के सामने इस मंत्र को पढ़कर विशेष रूप से क्षमाचायना करना चाहिए -
आवाहनं न जानामि न जानामि तवार्चनम्. पूजां श्चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर.
मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरं. यत्पूजितं मया देव परिपूर्ण तदस्मतु.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)














