Famous Hanuman Temple: बजरंगी के वो पावन धाम जहां पर आज भी मौजूद हैं उनके चरण चिन्ह

Hanuman footprint: सनातन परंपरा में हनुमान जी को शक्ति का पुंज माना जाता है. देश भर में स्थित तमाम हनुमत धाम में उस स्थान का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है, जहां पर उनके चरण चिन्ह आज भी मौजूद हैं. बजरंगी के चरण चिन्ह से जुड़े दिव्य धामों के बारे में जानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख.

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Lord Hanuman Footpritnts: हनुमान जी के चरण चिन्ह
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Hanuman Ji Ke Charan Kahan Per Hai: हिंदू मान्यता के अनुसार बल, बुद्धि और विद्या के सागर माने जाने वाले हनुमान चिरंजीवी हैं और हर युग में मौजूद रहते हैं. यही कारण है कि देश भर में उनके कई पावन धाम हैं, जहां पर उनके भक्त प्रतिदिन साधना-आराधना के लिए पहुंचते हैं. एक ऐसा ही चमत्कारी धाम हिमाचल प्रदेश की राजधानी ​शिमला में है, जिसका संबंध त्रेतायुग से माना जाता है. खास बात यह भी कि इस पावन धाम में जहां बजरंगी की विशालकाय प्रतिमा है, वहीं उनके चरण चिन्ह भी मौजूद हैं. आइए पवनसुत हनुमान जी के इस पावन धाम के बारे में विस्तार से जानते हैं.

शिमला का जाखू मंदिर 

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में स्थित पवनसुत हनुमान जी का जाखू मंदिर हनुमत भक्तों के लिए बहुत मायने रखता है क्योंकि इसी स्थान पर महावीर बजरंगी के चरण चिन्ह आज भी देखे जा सकते हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार त्रेतायुग में भगवान राम के आदेश पर हनुमान जी जब लक्ष्मण की मूर्छा को दूर करने के लिए संजीवनी बूटी के लिए निकले तो द्रोण पर्वत पर संजीवनी को न पहचान पाने पर उन्होंने पूरा पर्वत ही उठा लिया था. 

मान्यता है कि जब उसे हिमालय से लेकर लौट रहे थे तो कुछ देर के लिए जाखू पर्वत पर रुके थे. मान्यता है कि यह पहाड़ी काफी विशाल थी लेकिन हनुमान जी का बल पड़ते ही दब गई और वहां पर उनके चरण चिन्ह बन गये. मौजूदा समय में जाखू मंदिर के पास ही हनुमान जी की 108 फीट की विशालकाय प्रतिमा मौजूद है, जो दूर से ही बजरंगी के भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती है. 

यहां भी मौजूद हैं बजरंगी के चरण चिन्ह 

श्रीलंका में बजरंगी के चरण चिन्ह
हिंदू मान्यता के अनुसार जब हनुमान जी ने सीता जी को खोजने के लिए समुद्र पार करने चले तो उन्होंने अपना विराट रूप धारण किया. मान्यता है कि लंका पहुंचते ही जब उन्होंने अपना पहना पैर रखा तो वहां पर उनके चरण चिन्ह बन गये, जो कि आज तक मौजूद है. बजरंगी के इन चरण चिन्ह को 'हनुमान पद' कहा जाता है. 

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आंध प्रदेश में बजरंगी के चरण चिन्ह 
हिंदू मान्यता के अनुसार पवनसुत हनुमान जी के चरण चिन्ह आंध्र प्रदेश के लेपाक्षी में भी मौजूद हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार यहां पर स्थित हनुमान जी के चरण चिन्ह तब के हैं, जब वे घायल जटायु से भगवान राम के साथ मिले थे. 

महाराष्ट्र में बजरंगी के चरण चिन्ह
हिंदू मान्यता के अनुसार महाराष्ट्र के अंजनेरी में ​भी बजरंगी के चरण चिन्ह मौजूद हैं. मान्यता है कि इसी स्थान पर कभी हनुमान जी की माता ने तपस्या की थी. इस स्थान को हनुमान जी का जन्म स्थान भी माना जाता है. इस स्थान पर पांव के आकार वाला सरोवर है. जिसके बारे में मान्यता है कि वह बाल हनुमान का चरण चिन्ह है.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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