Hanuman Ji Ko Kis Devta Ne Kya Vardan Diya Tha: सनातन परंपरा में चैत्र मास के शुक्लपक्ष की पूर्णिमा तिथि को हनुमान जयंती या फिर कहें हनुमान जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. हिंदू धर्म में पवनपुत्र हनुमान की साधना सभी संकटों को दूर करके कामनाओं को पूरा करने वाली मानी गई है. भगवान शिव के ग्यारहवें अंशावतार माने जाने वाले हनुमान जी के बारे में मान्यता है कि वे प्रत्येक युग में पृथ्वी पर मौजूद रहते हैं और अपने साधकों के रोग-शोक को दूर करके सुख-सौभाग्य का आशीर्वाद बरसाते हैं. आइए जानते हैं कि जिन शक्तियों के कारण हनुमान जी को महावीर कहा जाता है, वो उन्हें किन देवी-देवताओं से प्राप्त हुई.
देवताओं ने आखिर क्यों दिया हनुमान को वरदान?
हिंदू मान्यता के अनुसार एक बार बाल्य अवस्था में हनुमान जी सूर्य देवता को फल समझकर खाने के लिए आगे बढ़े. मान्यता है कि उस दिन अमावस्या थी और राहु भी सूर्य का ग्रास करने के लिए पहुंच गया. तब हनुमान जी ने उसे भी फल समझकर खाने के लिए हाथ बढ़ाया तो वह वहां से भाग निकला.
इंद्र ने अपनी गदा से तोड़ा था पवनपुत्र हनुमान का जबड़ा
इसके बाद राहु नाराज होकर इंद्र के पास गया कि उन्होंने आखिर किसे सूर्य को ग्रास बनाने का अधिकार दे दिया. तब इंद्र अपने ऐरावत हाथी पर सवार होकर वहां पहुंचे. तब बाल हनुमान ने ऐरावत को फल समझकर खाने का प्रयास किया तो इंद्र नाराज हो गए और हनुमान जी गदे से प्रहार किया, जिसके कारण उनका हनु यानि जबड़ा टूट गया और वे मूर्छित होकर एक पर्वत पर जा गिरे.
तब ब्रह्मा जी ने देवताओं को दिया ये आदेश
जब यह बात पवनदेवता को पता चली तो उन्होंने अपने पुत्र की यह हालत देखकर अपनी गति रोक दी. जिसके कारण पृथ्वी पर हाहाकार मच गया. इसके बाद सभी देवतागण ब्रह्मा जी के पास इस समस्या का समाधान पाने के लिए पहुंचे. तब ब्रह्मा जी ने स्वयं सभी देवताओं के साथ जाकर हनुमान जी के सिर पर अपना हाथ फेरा, जिससे उनकी मूर्छा दूर हो गई. इसके बाद ब्रह्मा जी ने सभी देवताओं से कहा कि यह बालक भविष्य में आप सभी का बड़ा हित करेगा. ऐसे में आप सभी इसे एक-एक वरदान प्रदान करें. तब ब्रह्मा जी की आज्ञा से सभी देवताओं ने अपनी तरफ से बाल हनुमान को वरदान प्रदान किए.
भगवान सूर्य ने दिया अपना तेज
हिंदू मान्यता के अनुसार जिस सूर्य देवता को फल समझकर हनुमान जी निगलने जा रहे थे, उन्होंने हनुमान जी को अपने तेज का 100वां अंश प्रदान किया. मान्यता है कि सूर्य देवता के इसी वरदान के कारण हनुमान जी के सामने कोई टिक नहीं पाता है.
इंद्र के वरदान से वज्र के समान बना बजरंगी का शरीर
हिंदू मान्यता के अनुसार इंद्र देवता ने ही बजरंगी का नाम हनुमान रखते हुए उन्हें वरदान दिया कि आज के बाद तुम्हारा शरीर वज्र से भी ज्यादा कठोर हो जाएगा और और मेरी गदा का भी तुम पर कोई असर नहीं होगा. इसी के बाद बजरंगी को वज्रांग कहा गया.
कुबेर देवता ने दिया विजय का आशीर्वाद
हिंदू मान्यता के अनुसार कुबेर देवता ने हनुमान जी को वरदान किया उन्हें कभी कोई युद्ध में पराजित नहीं कर सकेगा.
वरुण देवता ने दिया ये बड़ा वरदान
हिंदू मान्यता के अनुसार वरण देवता ने हनुमान जी को वरदान दिया कि वे उनके पाश एवं जल से हमेशा सुरक्षित रहेंगे.
यम ने दिया अमर होने का वरदान
यम देवता ने हनुमान जी को वरदान दिया कि वे कभी भी उनके प्राण नहीं हरेंगे. यानि वे हमेशा अमर रहेंगे. उन पर यम के दंड का असर नहीं होगा.
महादेव से मिला महावीर को ये वरदान
हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने हनुमान जी को यह वरदान दिया कि उनकी मृत्यु कभी किसी अस्त्र-शस्त्र से नहीं होगी.
माता सीता ने दिया था चिरंजीवी होने का आशीर्वाद
हिंदू मान्यता के अनुसार जब हनुमान जी लंका स्थित अशोक वाटिका में माता सीता के पास पहुंचे तो सीता जी ने उनकी भक्ति और प्रभु श्री राम के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें अजर-अमर यानि चिरंजीवी होने का वरदान प्रदान किया था.
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भगवान विश्वकर्मा ने हनुमान जी को दिये दिव्य अस्त्र
हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान विश्वकर्मा ने हनुमान जी को अपने द्वारा बनाए गये सभी दिव्य शस्त्र सौंपते हुए यह वरदान दिय कि वे इनकी मदद से हमेशा सुरक्षित रहेंगे और लंबे समय तक पृथ्वी पर जीवित रहेंगे.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)














