Guruvar Ka Vrat Kaise Kare: सनातन परंपरा में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवता की पूजा के लिए समर्पित है. अगर गुडलक बढ़ाने वाले गुरुवार की बात करें तो यह जगत के पालनहार माने जाने वाले भगवान विष्णु और सुख-सौभाग्य के कारक देवगुरु बृहस्पति की पूजा के लिए अत्यंत ही शुभ और फलदायी माना गया है. यदि आप भी देवगुरु बृहस्पति का आशीर्वाद पाने के लिए इस व्रत को शुरू करना चाहते हैं तो आपको इससे जुड़े नियम, पूजा विधि और महाउपाय को जरूर जानना चाहिए. आइए गुरुवार व्रत से जुड़े सभी महत्वपूर्ण बातों को विस्तार से जानते हैं.
कब शुरू करें गुरुवार का व्रत?
हिंदू मान्यता के अनुसार देवगुरु बृहस्पति की शुभता को पाने के लिए साधक को किसी भी मास के शुक्लपक्ष से गुरुवार का व्रत प्रारंभ करना चाहिए. इसके अलावा यदि पुष्य नक्षत्र के साथ इसका संयोग बने तो बहुत ज्यादा शुभ होता है.
गुरुवार के दिन किस पुष्प से करें पूजा?
गुरुवार के दिन देवगुरु बृहस्पति को प्रसन्न करने के लिए पीले पुष्प चढ़ाएं और भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए कमल और तुलसीदल अर्पित करें.
कब और कैसे करें गुरुवार व्रत की पूजा?
हिंदू मान्यता के अनुसार गुरुवार का व्रत रखने वाले साधक को बृहस्पतिवार की सुबह जल्दी उठकर सबसे पहले स्नान-ध्यान करना चाहिए. इसके बाद यदि संभव हो तो पीले वस्त्र धारण करें और सबसे पहले सूर्य नारायण को जल में हल्दी मिलाकर अर्घ्य दें. इसके बाद देवगुरु बृहस्पति की प्रतिमा को एक चौकी पर रखें और उसके अगल-बगल केले के पत्ते लगाएं. इसके बाद प्रतिमा या फिर उनके चित्र पर गंगा जल या फिर शुद्ध जल छिड़कें. फिर पीले वस्त्र और पीले पुष्प अर्पित करें.
इसके बाद देवगुरु बृहस्पति को हल्दी या चंदन का टीका लगाएं और उन्हें केले और पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं. इसके बाद बृहस्पतिवार व्रत की कथा कहें और बृहस्पति के मंत्रों का जप करें. पूजा के अंत में बृहस्पति देवता की आरती करें और सभी को प्रसाद बांटकर स्वयं भी ग्रहण करें. बृहस्पति का व्रत रखने वाले साधक को तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए नियम संयम से पूरा दिन बिताते हुए फलहार करना चाहिए.
गुरुवार व्रत में किन चीजों का करें दान?
हिंदू मान्यता के अनुसार किसी भी देवी-देवता या ग्रह को मनाने या फिर कहें उनका आशीर्वाद पाने के लिए साधक को उनकी प्रिय चीजों का दान करना चाहिए. यह तब ज्यादा फलदायी होता है, जब आप उनसे जुड़े दिन दान करते हैं. ऐसे में गुरुवार के दिन आपको गुरु ग्रह से संबंधित चीजें जैसे चने की दाल, हल्दी, केसर, पीले पुष्प, पीले वस्त्र, बेसन, बेसन से बनी मिठाई, कढ़ी, पीले चावल आदि का दान करना चाहिए.
गुरुवार व्रत से क्या लाभ होता है?
- हिंदू मान्यता के अनुसार देवगुरु बृहस्पति का विधि-विधान से व्रत करने पर साधक को जीवन में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है.
- गुरुवार का व्रत करने पर साधक के विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और उसे मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होता है.
- गुरुवार के व्रत को करने पर व्यक्ति धर्म-कर्म में रुचि बढ़ती है और उसे धार्मिक-आध्यात्मिक सुख प्राप्त होता है.
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- देवगुरु बृहस्पति के लिए गुरुवार का व्रत करने पर साधक को संतान सुख की प्राप्ति होती है. गुरु ग्रह की शुभता उसके पारिवारिक सुख और सौभाग्य को बढ़ाने का काम करती है.
- गुरुवार के दिन रखा जाने वाला व्रत गुडलक को बढ़ाता है, जिससे करियर-कारोबार में मनचाही प्रगति और लाभ की प्राप्ति होती है.
- गुरुवार के दिन विधि-विधान से व्रत को रखने पर कुंडली में स्थिति गुरु ग्रह से जुड़े दोष दूर होते हैं.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)














