Eating Rules: अन्न की देवी मां अन्नपूर्णा को माना जाता है.
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Eating Rituals: हिंदू धर्म में अन्न को भी पूजा जाता है. मां अन्नपूर्णा को भोजन की देवी कहते हैं. यह मान्यता है कि अन्न का अपमान मां अन्नपूर्णा (Ma Annapurna) का अपमान होता है. इसीलिए ऐसे बहुत से कुछ छोटे-बड़े नियम हैं जो भोजन से जुड़े हैं और जिन्हें खाना खाते और परोसते समय खासतौर से ध्यान में रखने की आवश्यक्ता होती है. आइए जानें खाने से जुड़े किन नियमों (Rules) की यहां बात की जा रही है जिनसे देवी अन्नपूर्णा के क्रोधित होने की नौबत नहीं आती है.
खाने से जुड़े कुछ नियम
- मान्यतानुसार अन्न को कभी भी गंदे हाथों से नहीं छूना चाहिए. अन्न (Food) साक्षात ईश्वर का रूप है और अन्न का अपमान ईश्वर का अपमान करने के समान है.
- खाना व्यर्थ करना या अन्न को कूड़े में फेंकने को बुरा कहा जाता है. इसे मां अन्नपूर्णा का अनादर मानते हैं.
- खाना खाने से पहले भगवान का एकबार ध्यान करना अच्छा मानते हैं. आपको अपनी थाली में अन्न मिल रहा है इसका धन्यवाद ईश्वर को दिया जाता है.
- सनातन धर्म में माना जाता है कि सुबह खाना खाने से पहले निवृत्त होकर स्नान करना जरूरी है. जब शरीर ताजा स्थिति में ना हो तो इसे शरीर तनाव और नकारात्मक स्थिति में जाता है और यह खाना खाने का सही समय नहीं है.
- बहुत से लोग परोसने के बाद थाली के आसपास पानी का छिड़काव करके भगवान का स्मरण करते हैं.
- शाम के समय कम खाना खाने की सलाह दी जाती है. बहुत ज्यादा खाने से परहेज करने के लिए कहा जाता है.
- आध्यतामिक तौर पर ग्रहण लगने पर भोजन करने से मना किया जाता है. इस समय को नकारात्मक ऊर्जा के फैलने का समय माना जाता है.
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर में अतिथि आएं तो उन्हें भरपेट भोजन कराने के बाद खुद खाना चाहिए. किसी को घर से भूखे पेट जाने नहीं देना चाहिए.
- जैन यह मानते हैं कि सुबह सुर्योदय से पहले और शाम को सूर्यास्त के बाद खाना नहीं खाना चाहिए.
- आधी रात में भोजन करने से अक्सर मना किया जाता है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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