मां दुर्गा की आरती | Durga Mata Ki Aarti

Durga Mata Ki Aarti: पहले दिन भक्त विधि विधान से मां शैलपुत्री की पूजा करते हैं. पूजा के बाद मां शैलपुत्री के साथ दुर्गा माती की आरती गाने का भी विधान है. माना जाता है कि माता की आरती के बिना पूजा अधूरी रह जाती है. ऐसे में पूजा के बाद आप यहां से मां दुर्गा की संपूर्ण आरती पढ़कर गा सकते हैं.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
यहां से पढ़ें मां दुर्गा की आरती | Durga Mata Ki Aarti Lyrics In Hindi

Durga Mata Ki Aarti: 19 मार्च, गुरुवार से चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व का आरंभ हो चुका है. इसका समापन 27 मार्च, शुक्रवार को होगा. यानी इस साल नवरात्रि पूरे 9 दिनों तक मनाए जाएंगे. इन 9 दिनों में मां दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाएगी. आज नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है. पहले दिन भक्त विधि विधान से मां शैलपुत्री की पूजा करते हैं. पूजा के बाद मां शैलपुत्री के साथ दुर्गा माती की आरती गाने का भी विधान है. माना जाता है कि माता की आरती के बिना पूजा अधूरी रह जाती है. ऐसे में पूजा के बाद आप यहां से मां दुर्गा की संपूर्ण आरती पढ़कर गा सकते हैं.   

यह भी पढ़ें- Chaitra Navratri 2026 LIVE: नवरात्रि के पहले दिन होती है मां शैलपुत्री की पूजा, यहां जानें विधि, शुभ मुहूर्त, भोग, मंत्र, रंग, कथा और आरती

यहां से पढ़ें मां दुर्गा की आरती | Durga Mata Ki Aarti Lyrics In Hindi 

जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ ओम जय अंबे गौरी

मांग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्जवल से दो‌उ नैना, चन्द्रवदन नीको॥ ओम जय अंबे गौरकनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥ ओम जय अंबे गौरी

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥ ओम जय अंबे गौरी

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चन्द्र दिवाकर,
सम राजत ज्योति॥ ओम जय अंबे गौरी

शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना,
निशिदिन मदमाती॥ ओम जय अंबे गौरी

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दो‌उ मारे, सुर भयहीन करे॥ ओम जय अंबे गौरी

ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥ ओम जय अंबे गौरी

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूं।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥ ओम जय अंबे गौरी

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्‍तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥ ओम जय अंबे गौरी

भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।
मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी॥ ओम जय अंबे गौरी

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥ ओम जय अंबे गौरी

श्री अम्बेजी की आरती, जो को‌ई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥ ओम जय अंबे गौरी, ओम जय अंबे गौरी

Advertisement

जोर से बोलो जय माता दी, सारे बोले जय माता दी। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

Featured Video Of The Day
Donald Trump के दावों पर US Intelligence Report का बड़ा पर्दाफाश, Iran Nuclear Program सच
Topics mentioned in this article