आज नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ छठ महापर्व, यहां जानिए क्या करते हैं इस दिन

Chhath Puja Calendar 2024 : छठ पूजा के दौरान सूर्य को जीवन के स्रोत के रूप में पूजा जाता है. ऐसी मान्यता है कि सूर्य की ऊर्जा बीमारियों को ठीक करने, समृद्धि सुनिश्चित करने और कल्याण प्रदान करने में मदद करती है.

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नहाय-खाय - 5 नवंबर (सूर्योदय - सुबह 6 बजकर 39 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 41 मिनट पर होगा.)

Nahay khay significance : 4 दिवसीय छठ महापर्व की आज नहाय-खाय के साथ आगाज हो गया है. आज व्रती महिलाएं तालाब और नदी में स्नान करके घिया की सब्जी और भात खाकर व्रत का संकल्प लेंगी. ऐसा माना जाता है कि यह भोजन करने से साधक के जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है. इसके अलावा क्या कुछ खास है नहाय-खाय से जुड़ी चलिए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं...

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नहाय-खाय में क्या करते हैं - what do you do during nahay khay

इस दिन व्रती महिलाएं सूर्योदय से पहले आस-पास के किसी तालाब और नदी में स्नान करती हैं फिर भात, चना दाल और कद्दू या लौकी का प्रसाद बनाकर उसे ग्रहण करती हैं.

नहाय-खाय में साफ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है. प्रसाद तैयार करते समय स्वच्छता का खास ख्याल रखना होता है. आपको बता दें कि छठ महापर्व में केवल व्रती को नहीं, बल्कि पूरे परिवार को सात्विक भोजन करना होता है.

इस दिन प्रसाद बनाने के लिए साफ चूल्हे का ही प्रयोग करें. आपको बता दें कि इस दिन महिलाएं एकबार ही भोजन करती हैं. फिर अगले दिन शाम को खरना किया जाता है. 

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इसके अलावा नहाय-खाय के भोजन में सेंधा नमक का इस्तेमाल करें. वहीं, इस दिन व्रती महिलाएं स्वच्छ वस्त्र धारण करके ही भोजन करें. 

छठ पूजा का कैलेंडर 2024 - Chhath Puja Calendar 2024

नहाय-खाय - 5 नवंबर (सूर्योदय - सुबह 6 बजकर 39 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 41 मिनट पर होगा.)
खरना - 6 नवंबर, बुधवार को (इस दिन मीठा भात और लौकी की खिचड़ी खाई जाती है. )
शाम का अर्घ्य - 7 नवंबर को
सुबह का अर्घ्य - 8 नवंबर को

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छठ महापर्व का महत्व - Significance of Chhath Mahaparva

छठ पूजा एक प्राचीन हिंदू त्योहार है, जो सूर्य देव और छठी मैया (माता षष्ठी) को समर्पित है, जिन्हें सूर्य की बहन माना जाता है. यह त्यौहार मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ हिस्सों में तथा इन क्षेत्रों के प्रवासी लोगों द्वारा मनाया जाता है. छठ पूजा चार दिन तक चलती है और यह सबसे महत्वपूर्ण तथा कठोर त्योहारों में से एक है. 

छठ पूजा के दौरान सूर्य को जीवन के स्रोत के रूप में पूजा जाता है. ऐसी मान्यता है कि सूर्य की ऊर्जा बीमारियों को ठीक करने, समृद्धि सुनिश्चित करने और कल्याण प्रदान करने में मदद करती है. भक्त स्वास्थ्य, समृद्धि और खुशी के लिए आशीर्वाद मांगने के लिए सूर्य और छठी मैया की पूजा करते हैं. 

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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