जब ग्रहण में नहीं लगा भोग तो सपने में आए भगवान! बीकानेर के लक्ष्मीनाथ मंदिर का रहस्यमयी किस्सा

3 मार्च को जब चंद्र ग्रहण का साया आसमान पर छाएगा, देशभर के मंदिरों में सन्नाटा होगा, लेकिन एक शहर में आरती की रौनक कम नहीं होगी. आखिर क्यों यहां सूतक के नियम लागू नहीं होते? यही कहानी आपको हैरान कर सकती है.

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चंद्रग्रहण में जब भगवान श्री हरि विष्णु और मां लक्ष्मी को लगी थी भूख, लक्ष्मीनाथ मंदिर का चौंकाने वाला किस्सा

Chandra grahan and Laxminath Temple of Bikaner story: 3 मार्च को लगने वाले चंद्र ग्रहण के दौरान देशभर के अधिकांश मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में राहु और केतु का प्रभाव बढ़ जाता है, इसलिए इसे सूतक काल माना जाता है. इस दौरान न आरती होती है और न ही भोग लगाया जाता है.

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ग्रहण काल में मंदिर क्यों होते हैं बंद (Why Temples Close During Eclipse)

धर्मग्रंथों और पंडितों के मुताबिक, ग्रहण के समय नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की आशंका मानी जाती है. मंदिरों को सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र समझा जाता है, इसलिए सावधानी के तौर पर कपाट बंद रखे जाते हैं, लेकिन राजस्थान के बीकानेर स्थित भगवान लक्ष्मीनाथ मंदिर इस परंपरा से अलग है.

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लक्ष्मीनाथ मंदिर में क्यों नहीं लगता ताला (Why Laxminath Temple Stays Open)

मान्यता है कि एक बार ग्रहण के समय मंदिर बंद किया गया और भगवान श्री हरि विष्णु को समय पर भोग नहीं लगा. उसी रात पास के एक हलवाई को सपने में भगवान ने दर्शन दिए और भूख लगने की बात कही. इसके बाद से परंपरा बदल गई. अब चंद्र ग्रहण हो या सूर्य ग्रहण, यहां पूजा पाठ और भोग नियमित रूप से होता है.

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मंदिर का इतिहास और महत्व (History and Significance of Temple)

विक्रम संवत 1526 में निर्मित यह मंदिर बीकानेर की शान माना जाता है. जैसलमेर के पत्थर और मकराना के संगमरमर से बने इस मंदिर की नक्काशी और चांदी की कलाकृतियां इसकी रौनक बढ़ाती हैं. भारत में महाकालेश्वर उज्जैन, कालकाजी दिल्ली, विष्णुपद गया और कल्पेश्वर उत्तराखंड जैसे कुछ अन्य मंदिरों में भी ग्रहण के दौरान कपाट बंद नहीं होते. जहां चंद्र ग्रहण के दौरान अधिकतर मंदिरों में सन्नाटा होगा, वहीं कुछ स्थानों पर आस्था की रोशनी बदस्तूर जलती रहेगी. यही परंपराओं की विविधता भारत की खासियत है.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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