Chaitra Navratri Kanya Pujan Date: हिंदू धर्म में नवरात्रि के 09 दिनों में अंतिम दो दिनों में की जाने वाली कन्या पूजा का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि पर पूजी जाने वाली इन कन्या ओं को कंजक भी कहा जाता है. मान्यता है कि देवी स्वरूपा 09 कन्याओं की पूजा करने के बाद ही नवरात्रि की पूजा एवं व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है. यही कारण है कि लोग इसकी तैयारी बहुत पहले से ही करना प्रारंभ कर देते हैं. यदि आप इस साल पहली बार कन्या पूजन करने जा रहे हैं तो आइए हम आपको इससे जुड़े महत्वपूर्ण नियम, परंपरा और धार्मिक महत्व को विस्तार से बताते हैं.
कन्या पूजन की तारीखें
चैत्र मास की अष्टमी (दुर्गाष्टमी) तिथि : 26 मार्च 2026, गुरुवार
चैत्र मास की नवमी तिथि : 27 मार्च 2026, शुक्रवार
- 1. नवरात्रि में कंजक की पूजा के लिए 2 से 10 साल की कन्या का चयन किया जाता है. कुछ लोग नवरात्रि में प्रतिदिन एक कन्या को पूजा करते हैं तो वहीं कुछ लोग अपनी मान्यता के अनुसार अष्टमी या नवमी तिथि को एक साथ 9 कन्याओं को पूजते हैं.
- 2. नवरात्रि में पूजी जाने वाली 2 वर्ष की कन्या कुमारी, 3 वर्ष की कन्या त्रिमूर्ति, 4 वर्ष की कन्या कल्याणी, 5 वर्ष की कन्या रोहिणी, 6 वर्ष की कन्या कलिका, 7 साल की कन्या चंडिका, 8 साल की कन्या शांभवी, 9 साल की कन्या दुर्गा और 10 साल की कन्या सुभद्रा कहलाती है.
- 3. यदि आप अष्टमी के दिन कन्या पूजन कर रहे हैं तो आप इस दिन तन और मन से पवित्र होकर सबसे पहले भगवान श्री गणेश जी और देवी महागौरी की पूजा करें. इसके बाद कन्याओं को अपने घर में आदर के साथ बुलाएं.
- 4. कंजक की पूजा करने के लिए कन्याओं को एक दिन पूर्व में ही आमंत्रण देना चाहिए. कन्याओं के घर पर आने बाद सबसे पहले उनके पैर धुल कर आलता लगाया जाता है और रोली, पुष्प, अक्षत आदि से पूजन किया जाता है.
- 5. नवरात्रि में 09 कंजक या फिर कहें कन्याओं के साथ एक बालक की पूजा का विधान है, जिसे लंगूर या बटुक कहा जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार यह बालक शक्ति एवं सिद्धपीठ की रक्षा की रक्षा करने वाले भगवान भैरव के समान होता है. कुछ लोग 9 कंजक के साथ 3 बालक को भी बुलाते हैं, जिन्हें भगवान भैरव के साथ गणपति और हनुमान जी का प्रतीक माना जाता है.
- 6. हिंदू मान्यता के अनुसार यदि नवरात्रि में कन्या पूजन के लिए एक साथ 9 कन्याएं न मिल पाएं तो साधक को जितनी भी कन्या उपलब्ध हों, उनकी विधि-विधान से पूजा करने के बाद उन कन्याओं के साथ बाकी कन्याओं की भी प्लेट लगानी चाहिए. फिर बाद में उनके लिए निकाली गई दक्षिणा, उपहार और भोग को उन्हें बाद में दे देना चाहिए.
- 7. कन्याओं को देवी दुर्गा के समान पूजा करने के बाद उन्हें हलवा, पूड़ी, चना, आदि का भोग लगाकर खिलाया जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार नवरात्रि में कन्या का पूजन एवं उन्हें भोग प्रसाद खिलाने के बाद उन्हें अपने सामर्थ्य के अनुसार फल, मिठाई, वस्त्र, धन आदि भेंट करना चाहिए.
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि पर अगर न रख पाएं व्रत तो देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए करें ये महाउपाय
- 8. कंजक की पूजा पूर्ण होने के बाद सभी कन्याओं की आरती करें और उनके पैर छूकर मंगलकामना करते हुए आशीवार्द प्राप्त करें. कन्या पूजन की सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी कन्याओं को उनके घर तक या फिर अपने दरवाजे तक जाकर आदर एवं सम्मान के साथ विदा करना चाहिए.
- 9. नवरात्रि में कन्या पूजन करने पर साधक की 9 दिनों साधना-आराधना, जप-तप और व्रत सफल होता है और उस पर पूरे साल नवदुर्गा का आशीर्वाद बना रहता है. श्रद्धा और विश्वास के साथ कन्या पूजन करने वाले साधक की कामनाएं पूरी होती हैं और उसे सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)














