Chaitra Navratri 2026 Day 3: चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. इस दिन का विशेष महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि आज रवि योग का संयोग बन रहा है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर भय, रोग और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और जीवन में साहस व आत्मविश्वास बढ़ता है.
मां चंद्रघंटा का स्वरूप और महत्व
मां चंद्रघंटा देवी दुर्गा का तीसरा स्वरूप मानी जाती हैं. इनके मस्तक पर अर्धचंद्र घंटी के आकार का होता है, इसी वजह से इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है. इनका स्वरूप स्वर्ण के समान तेजस्वी होता है और ये सिंह पर सवार रहती हैं. मां के दस हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र होते हैं, जो शक्ति और पराक्रम का प्रतीक हैं.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पूजा करने से...
1- डर और बाधाएं दूर होती हैं
2- आत्मविश्वास बढ़ता है
3- जीवन में सफलता के रास्ते खुलते हैं
रवि योग में करें पूजा
इस बार नवरात्रि के तीसरे दिन रवि योग बन रहा है, जो बेहद शुभ माना जाता है.
- यह योग रात 12:37 बजे से शुरू होकर 22 मार्च की सुबह तक रहेगा
- इस दौरान पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है
मां चंद्रघंटा की पूजन विधि
- सबसे पहले साफ स्थान पर पीला कपड़ा बिछाएं
- मां की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें
- पास में कलश रखकर उस पर नारियल रखें
- चंदन, रोली, हल्दी और फूल अर्पित करें
- दूध से बनी मिठाई या खीर का भोग लगाएं
- अंत में आरती करें और प्रसाद बांटें
बीज मंत्र
इस दिन मां को प्रसन्न करने के लिए इन मंत्रों का जाप करें:
- ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
- ऊं चंद्रघंटायै नमः
इन मंत्रों का 108 बार जाप करने से विशेष लाभ मिलता है.
करें ये खास उपाय
- मां को खीर या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं और कन्याओं को बांटें
- पूजा के समय घंटी या शंख जरूर बजाएं
- पूरे दिन गुस्सा और नकारात्मक सोच से दूर रहें
इन उपायों को करने से सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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