Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026: भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पर जरूर पढ़ें ये कथा, तभी पूर्ण माना जाता है व्रत

Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026 Vrat Katha: भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पर गणेश जी की विधि-विधान से पूजा करने के साथ-साथ व्रत कथा सुनना या पढ़ना भी बेहद जरूरी माना गया है. कहा जाता है कि कथा के बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है. इसलिए भक्त पूरे मन से पूजा करने के बाद गणेश जी की कथा का पाठ जरूर करते हैं. अगर आपने भी भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा है, तो पूजा के बाद आप यहां से व्रत कथा पढ़ सकते हैं.

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Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026: भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा

Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026 Vrat Katha In Hindi: हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी के व्रत का खास महत्व है. ये व्रत भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है. हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को यह व्रत रखा जाता है, लेकिन चैत्र मास में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है. आज यानी 6 मार्च, शुक्रवार को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जा रहा है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की श्रद्धा से पूजा करने और व्रत रखने से जीवन के कष्ट, बाधाएं और परेशानियां दूर होती हैं.

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हालांकि, भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पर गणेश जी की विधि-विधान से पूजा करने के साथ-साथ व्रत कथा सुनना या पढ़ना भी बेहद जरूरी माना गया है. कहा जाता है कि कथा के बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है. इसलिए भक्त पूरे मन से पूजा करने के बाद गणेश जी की कथा का पाठ जरूर करते हैं. अगर आपने भी भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा है, तो पूजा के बाद आप यहां से व्रत कथा पढ़ सकते हैं. 

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार सभी देवता किसी बड़े संकट में फंस गए थे. अपनी परेशानी का समाधान ढूंढने के लिए वे भगवान शिव के पास पहुंचे. उस समय भगवान शिव माता पार्वती और अपने दोनों पुत्रों- कार्तिकेय और गणेश के साथ बैठे हुए थे. देवताओं ने उनसे अपनी समस्या बताई और सहायता की प्रार्थना की.

देवताओं की बात सुनकर भगवान शिव ने अपने दोनों पुत्रों से पूछा कि इस समस्या का समाधान कौन करेगा. दोनों ही देवताओं की मदद के लिए तैयार हो गए. तब भगवान शिव ने एक परीक्षा लेने का निर्णय किया. उन्होंने कहा कि जो भी पहले पूरी पृथ्वी का चक्कर लगाकर वापस आएगा, वही देवताओं की सहायता करने जाएगा.

यह सुनते ही भगवान कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर बैठकर तुरंत पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकल पड़े. दूसरी ओर भगवान गणेश अपने वाहन मूषक को देखकर सोच में पड़ गए कि वे इतनी जल्दी पूरी पृथ्वी का चक्कर कैसे लगा पाएंगे. कुछ देर विचार करने के बाद उन्होंने एक अलग उपाय निकाला.

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गणेश जी उठे और अपने माता-पिता भगवान शिव और माता पार्वती की सात बार परिक्रमा की. इसके बाद वे शांत होकर वहीं बैठ गए और कार्तिकेय के लौटने का इंतजार करने लगे. जब भगवान शिव ने उनसे ऐसा करने का कारण पूछा, तो गणेश जी ने कहा कि माता-पिता के चरणों में ही पूरा संसार बसता है, इसलिए उनकी परिक्रमा करना ही पूरी पृथ्वी की परिक्रमा के समान है.

गणेश जी की बुद्धिमानी और भक्ति से भगवान शिव बहुत प्रसन्न हुए. उन्होंने गणेश जी को देवताओं की सहायता करने का कार्य सौंप दिया. साथ ही यह आशीर्वाद भी दिया कि जो भी भक्त चतुर्थी के दिन उनकी पूजा करेगा और यह कथा सुनेगा, उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाएंगे.

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
 

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