नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है. ऐसे में हर ओर भक्ति का माहौल है. जगह-जगह पंडाल सजे हैं, दुर्गा पूजा की जा रही है. खासकर बंगाल में दुर्गा पूजा का अलग ही रंग देखने को मिलता है. यहां मां दुर्गा के स्वागत के लिए भव्य पंडाल सजाए जाते हैं और कई दिनों तक पूजा-पाठ होती है. अब, इस बार इसी तरह की रौनक ब्रिटेन की राजधानी लंदन में भी देखने को मिल रही है. लंदन में 16 से 18 अक्टूबर तक तीन दिन का दुर्गा पूजा उत्सव मनाया जा रहा है. उत्सव के दो दिन पूरे हो चुके हैं और अब 18 अक्टूबर यानी रविवार को आखिरी दिन के कार्यक्रम होंगे. इस दौरान मां दुर्गा की पूजा के साथ बंगाल की संस्कृति, संगीत, खानपान और परंपराओं की झलक देखने को मिल रही है.
इस उत्सव का आयोजन बंगाल हेरिटेज फाउंडेशन की ओर से किया जा रहा है. यह ब्रिटेन में पंजीकृत संस्था है, जो बंगाली संस्कृति और परंपराओं को बचाने और आगे बढ़ाने के लिए काम करती है. आयोजकों के अनुसार, ईलिंग के गनर्सबरी पार्क स्पोर्ट्स में करीब 10 हजार वर्ग फुट की जगह पर आयोजित यह यूरोप का सबसे बड़ा दुर्गा पूजा उत्सव है. इसमें अलग-अलग समुदायों के लोग शामिल हो रहे हैं.
मां दुर्गा की पूजा के साथ बंगाल की संस्कृति का संगम
उत्सव का मुख्य आकर्षण मां दुर्गा की पूजा है. पूजा स्थल को बंगाल के चंदननगर की मशहूर लाइटिंग से सजाया गया है. यहां भक्त मां दुर्गा के दर्शन कर रहे हैं और पूजा में शामिल होकर आशीर्वाद ले रहे हैं.
इस साल उत्सव की थीम आकाशवाणी कोलकाता के प्रसारण के 100 साल पूरे होने से जुड़ी है. आकाशवाणी का पहला आधिकारिक बंगाली प्रसारण 26 अगस्त 1927 को हुआ था. इसके बाद रेडियो बंगाली परिवारों के जीवन का अहम हिस्सा बन गया. खासकर महालया की सुबह महिषासुरमर्दिनी सुनने की परंपरा आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय है. इस थीम के जरिए पुरानी पीढ़ी अपनी यादें ताजा कर रही है, वहीं बच्चों को अपनी भाषा और संस्कृति को करीब से जानने का मौका मिल रहा है.
संगीत, बच्चों के कार्यक्रम और मनोरंजनउत्सव में रंगो मंच नाम का सांस्कृतिक मंच बनाया गया है. यहां बंगाली संगीत, गीतमाला और दूसरे सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए लोगों को भारत की कला और संगीत से जुड़ने का मौका मिल रहा है. बच्चों के लिए ठाकुमार झूली नाम से खास कार्यक्रम रखे गए हैं. इसके अलावा क्विज, अंताक्षरी और ढाक-धुनुची जैसे पारंपरिक कार्यक्रम भी उत्सव का हिस्सा हैं.
आखिरी दिन भी मिलेंगे खास अनुभवरविवार, 18 अक्टूबर को उत्सव का आखिरी दिन होगा. इस दिन भी लोगों को सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामुदायिक गतिविधियों में शामिल होने का मौका मिलेगा. खानपान के लिए बोकुल तला में बंगाली और भारतीय स्ट्रीट फूड की व्यवस्था है. वहीं, मुक्तो आंगन में लोग चाय और चॉप का आनंद लेते हुए दोस्तों और परिवार के साथ समय बिता सकते हैं. बच्चों के खेलने के लिए खेलार आंगन नाम से अलग जगह भी बनाई गई है. तीनों दिन मां दुर्गा को भोग लगाने और भक्तों के बीच प्रसाद बांटने की व्यवस्था रखी गई है.
नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की कोशिशलंदन शारद उत्सव का उद्देश्य केवल दुर्गा पूजा करना नहीं, बल्कि बंगाल की संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना भी है. पूजा, भोग, संगीत और पारंपरिक कार्यक्रमों के जरिए यहां रहने वाले बंगाली परिवार अपनी परंपराओं से जुड़े रह सकते हैं. 18 अक्टूबर को होने वाले कार्यक्रम इस तीन दिवसीय उत्सव का समापन करेंगे. मां दुर्गा की भक्ति और अपनों के साथ मिलने का यह अवसर लंदन में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए खास बना हुआ है.
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