पांचवें बड़े मंगल पर करें बजरंग बाण का पाठ, संकट मोचन हनुमान हरेंगे सभी कष्ट

आज ज्येष्ठ माह का पांचवां बड़ा मंगल है. मंगलवार के दिन बजरंग बाण का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है. ऐसे में पूजा के बाद आप यहां से पढ़कर श्री बजरंग बाण का पाठ कर सकते हैं.

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श्री बजरंग बाण | Bajrang Baan Lyrics in Hindi

आज ज्येष्ठ माह का पांचवां बड़ा मंगल है. हिंदू धर्म में बड़े मंगल का दिन भगवान हनुमान की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से हनुमान जी की पूजा करने, व्रत रखने और जरूरतमंदों की सेवा करने से जीवन की अनेक परेशानियां दूर होती हैं. बजरंगबली अपने भक्तों के सभी संकट हरकर उन्हें सुख, शक्ति और सफलता का आशीर्वाद प्रदान करते हैं.

बड़े मंगल के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और विधि-विधान से हनुमान जी की पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है. भक्त मंदिरों में जाकर दर्शन करते हैं और भगवान को सिंदूर, चमेली का तेल, गुड़-चना तथा लड्डू अर्पित करते हैं. ऐसा माना जाता है कि इन प्रिय वस्तुओं का भोग लगाने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बड़े मंगल पर दान-पुण्य का भी खास महत्व है. इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्य उपयोगी चीजों का दान करना शुभ माना जाता है. इसके साथ ही हनुमान जी की कृपा पाने के लिए बजरंग बाण का पाठ भी अत्यंत फलदायी बताया गया है. श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया यह पाठ भक्तों के मन से भय, चिंता और नकारात्मकता को दूर करने का माध्यम माना जाता है. ऐसे में बड़े मंगल के इस पावन अवसर पर पूजा के बाद आप भी श्री बजरंग बाण का पाठ कर सकते हैं.

श्री बजरंग बाण | Bajrang Baan Lyrics in Hindi

दोहा 

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान.
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥

चौपाई 

जय हनुमंत संत हितकारी. सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
जन के काज बिलंब न कीजै. आतुर दौरि महा सुख दीजै॥
जैसे कूदि सिंधु महिपारा. सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥
आगे जाय लंकिनी रोका. मारेहु लात गई सुरलोका॥
जाय बिभीषन को सुख दीन्हा. सीता निरखि परमपद लीन्हा॥
बाग उजारि सिंधु महँ बोरा. अति आतुर जमकातर तोरा॥
अक्षय कुमार मारि संहारा. लूम लपेटि लंक को जारा॥
लाह समान लंक जरि गई. जय जय धुनि सुरपुर नभ भई॥
अब बिलंब केहि कारन स्वामी. कृपा करहु उर अंतरयामी॥
जय जय लखन प्रान के दाता. आतुर ह्वै दुख करहु निपाता॥
जै हनुमान जयति बल-सागर. सुर-समूह-समरथ भट-नागर॥
ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले. बैरिहि मारु बज्र की कीले॥
ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा. ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीसा॥
जय अंजनि कुमार बलवंता. शंकरसुवन बीर हनुमंता॥
बदन कराल काल-कुल-घालक. राम सहाय सदा प्रतिपालक॥
भूत, प्रेत, पिसाच निसाचर. अगिन बेताल काल मारी मर॥
इन्हें मारु, तोहि सपथ राम की. राखु नाथ मरजाद नाम की॥
सत्य होहु हरि सपथ पाइ कै. राम दूत धरु मारु धाइ कै॥
जय जय जय हनुमंत अगाधा. दुख पावत जन केहि अपराधा॥
पूजा जप तप नेम अचारा. नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥
बन उपबन मग गिरि गृह माहीं. तुम्हरे बल हौं डरपत नाहीं॥
जनकसुता हरि दास कहावौ. ताकी सपथ बिलंब न लावौ॥
जै जै जै धुनि होत अकासा. सुमिरत होय दुसह दुख नासा॥
चरन पकरि, कर जोरि मनावौं. यहि औसर अब केहि गोहरावौं॥
उठु, उठु, चलु, तोहि राम दुहाई. पायँ परौं, कर जोरि मनाई॥
ॐ चं चं चं चं चपल चलंता. ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता॥
ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल. ॐ सं सं सहमि पराने खल-दल॥
अपने जन को तुरत उबारौ. सुमिरत होय आनंद हमारौ॥
यह बजरंग-बाण जेहि मारै. ताहि कहौ फिरि कवन उबारै॥
पाठ करै बजरंग-बाण की. हनुमत रक्षा करै प्रान की॥
यह बजरंग बाण जो जापैं. तासों भूत-प्रेत सब कापैं॥
धूप देय जो जपै हमेसा. ताके तन नहिं रहै कलेसा॥ 

दोहा  

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उर प्रतीति दृढ़, सरन ह्वै, पाठ करै धरि ध्यान.
बाधा सब हर, करैं सब काम सफल हनुमान॥

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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