बसंत पंचमी पर बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ को चढ़ेगा तिलक, मंगल आरती और शहनाई के साथ शुरू हुई रस्म

इस अवसर पर ब्राह्मणों का समूह चारों वेदों की ऋचाओं का गान करेंगे. इस दौरान बाबा का दूध के साथ अभिषेक किया जाएगा.

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बसंत पंचमी के शुभ मुहूर्त पर भगवान शिव का तिलकोत्सव किया जाता है.

Basant Panchami 2024 : आज बसंती पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है. ऐसे में हर बार की तरह इस बार भी बाबा श्री काशी विश्वनाथ के विवाह का अनुष्ठान एवं विधान बसंत पंचमी पर तिलकोत्सव के साथ शुरू हो जाएगा. आपको बता दें कि टेढ़ी नीम स्थित महंत आवास पर बाबा विश्वनाथ के माथे पर तिलक सजेगा इसके बाद रस्में शुरू होंगी. इस अवसर पर ब्राह्मणों का समूह चारों वेदों की ऋचाओं का गान करेंगे. इस दौरान बाबा का दूध के साथ अभिषेक किया जाएगा.

आपको बता दें कि सारे विधि-विधान के साथ पूजा संपन्न होने के बाद बाबा विश्वनाथ सायंकाल में दूल्हे के स्वरूप में दर्शन देंगे. 

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मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर शिव विवाह संपन्न हुआ था. ऐसे में बसंत पंचमी के शुभ मुहूर्त पर भगवान शिव का तिलकोत्सव किया जाता है.

मां सरस्वती की भी होती है पूजा

बसंत पंचमी के दिन विशेष रूप से देवी सरस्वती की पूजा की जाती है. इस दिन मां पर पीले रंग के फूल अर्पित किए जाते हैं और पीले रंग के वस्त्र भी पहनाए जाते हैं. इसके अलावा क्या कुछ खास किया जाता है बसंत पंजमी में जानिए यहां-

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  • बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती को खास भोग लगाए जा सकते हैं. मां सरस्वती को केसर की पीली खीर भोग में लगाई जा सकती है. 
  • चने की दाल के हलवे का भोग (Bhog) भी बेहद अच्छा माना जाता है. इस दिन मां को सूजी का पीले रंग का हलवा भी भोग में लगा सकते हैं. 
  • बेसन या बूंदी के लड्डू भी सरस्वती मां को भोग में लगाए जा सकते हैं. 
  • पीले रंग के चावल भी अच्छा भोग है. 
  • मां सरस्वती के भोग में रबड़ी को भी शामिल किया जा सकता है. रबड़ी में केसर डालकर पीला रंग कर सकते हैं. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.) 

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