Amalaki Ekadashi Upay: हिंदू धर्म में आमलकी एकादशी का बेहद खास महत्व माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक बदलाव आते हैं. कहा जाता है कि यह एकादशी व्यक्ति के सोए हुए भाग्य को भी जगा सकती है. साल 2026 में आमलकी एकादशी का व्रत 27 फरवरी, शुक्रवार को रखा जाएगा. पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 27 फरवरी को रात 12:33 बजे शुरू होकर उसी दिन रात 10:32 बजे तक रहेगी.
ज्योतिषविद एवं वास्तु विशेषज्ञ राकेश चतुर्वेदी के अनुसार, आमलकी एकादशी का संबंध भगवान विष्णु और आंवला वृक्ष से है. शास्त्रों में बताया गया है कि आंवला वृक्ष में भगवान विष्णु का वास होता है. इसलिए इस दिन आंवले की पूजा करने का विशेष महत्व है. ऐसा करने से पापों का नाश होता है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है.
आमलकी एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों में इस एकादशी को मोक्ष देने वाली तिथि बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत और पूजा करने से पुराने नकारात्मक कर्मों का असर कम होता है. साथ ही जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता आती है. यह दिन आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी खास माना गया है.
भगवान विष्णु की पूजा करें
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ पीले वस्त्र पहनें. इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करें. उन्हें तुलसी दल अर्पित करें और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें. विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी किया जा सकता है.
आंवला वृक्ष की पूजा करेंअगर संभव हो तो आंवला वृक्ष के पास जाएं. वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं और जल, रोली, चावल व फूल अर्पित करें. श्रद्धा से वृक्ष की परिक्रमा करें. ऐसा करने से विशेष पुण्य फल मिलता है.
इस दिन एकादशी व्रत रखें. फलाहार या सात्विक भोजन करें. लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन से दूर रहें. संयम और श्रद्धा के साथ दिन बिताएं.
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ज्योतिषविद बताते हैं, आमलकी एकादशी के व्रत और पूजा से पापों का क्षय होता है और पुण्य बढ़ता है. मान्यता है कि इससे स्वास्थ्य अच्छा रहता है और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है. घर में सुख-शांति बनी रहती है और धन-धान्य में वृद्धि होती है. साथ ही यह व्रत आध्यात्मिक प्रगति में भी सहायक माना गया है. अगर आप जीवन में सकारात्मक बदलाव चाहते हैं, तो इस आमलकी एकादशी पर श्रद्धा और नियम के साथ पूजा जरूर करें.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)













