हॉर्मुज से हिल गई LPG सप्लाई लेकिन पाइप गैस पर क्यों ज्यादा आंच नहीं आई, समझिए LPG vs LNG का पूरा गणित

हॉर्मुज के बंद होने से बढ़ता ऊर्जा संकट आखिर LNG और LPG को कैसे करेगा प्रभावित? पढ़िए और समझिए कि आपके किचन से लेकर इंडस्ट्री तक कितना बड़ा असर पड़ सकता है.

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  • हॉर्मुज संकट ने भारत की ऊर्जा नीति की विदेशी निर्भरता को फिर से उजागर किया.
  • भारत की LPG पर ज्यादा निर्भरता है जबकि LNG में कुछ राहत है. पर संकट बना रहा तो...
  • LPG, CNG, PNG, इंडस्ट्री में उत्पादन लागत सब बढ़ेगा. इससे सीमेंट, स्टील, बिजली जैसी कई अहम चीजें महंगी होंगी.
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ईरान vs अमेरिका और इजरायल के बीच मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध की वजह से यहां मौजूद हॉर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों की आवाजाही में कमी आई है. हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया के करीब 20 फीसद तेल के आवागमन का जरिया है. इस रूट पर भारत की निर्भरता भी बहुत अधिक है. ऐसे में तेल और गैस के सबसे अहम सप्लाई रूटों में से एक हॉर्मुज के आंशिक रूप से बंद होने पर आयात पर निर्भर भारत की ऊर्जा खरीद पर सीधा असर पड़ा है. हालांकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि भारत की तेल जरूरतों को लेकर हालात काबू में हैं और उसके पास रणनीतिक तेल भंडार मौजूद है.

इतना ही नहीं अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में हुई तीव्र वृद्धि के बाद सरकार ने पेट्रोल और डीजल दोनों पर उत्पाद शुल्क में तत्काल प्रभाव से 10 रुपये प्रति लीटर की कमी कर दी ताकि पेट्रोल और डीजल के खुदरा पंप मूल्यों में कोई बदलाव न हो और आम आदमी पर इसका सीधा असर न पड़े. लेकिन जिस एक पेट्रोलियम उत्पाद की कीमतें हाल ही में बढ़ी हैं वो है LPG यानी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस.

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने रविवार को मिडिल ईस्ट के घटनाक्रमों के मद्देनजर इससे जुड़े प्रमुख क्षेत्रों पर अपडेट में बताया कि देश के सभी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है. यूरिया संयंत्रों की आपूर्ति पिछले छह महीनों के औसत 70-75% पर बनी हुई है. LNG और RLNG की अतिरिक्त व्यवस्था की जा रही है. बता दें कि भारत की ऊर्जा जरूरतों में जितना अहम किरदार पेट्रोल, डीजल का है उतना ही LNG और LPG का है. लेकिन इन दोनों की प्रकृति, उपयोग और निर्भरता अलग-अलग है. यही अंतर इस संकट में इनके असर को भी अलग बनाता है.

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LNG क्या है?

LNG का पूरा नाम है लिक्विफाइड नैचुरल गैस (Liquefied Natural Gas). प्राकृतिक गैस यानी नैचुरल गैस को -162°C तापमान तक ठंडा किया जाता है. इतना ठंडा करने पर गैस तरल बन जाती है. जब गैस तरल बनती है तो उसका वॉल्यूम 600 गुना तक कम हो जाता है. यानी यह 600 गुना कम जगह लेती है. यह अधिक मात्रा में इसके ट्रांसपोर्टेशन में सहायक होता है. यही कारण है कि LNG को लिक्विड फॉर्म में जहाजों के टैंकरों में भरकर या ट्रकों पर डाल कर लंबी दूरी तक भेजना आसान हो जाता है. लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में बहुत महंगा इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए. इसके लिए खास एलएनजी प्लांट होना चाहिए, क्रायोजेनिक टैंक और खास एनएलजी जहाज होने चाहिए. यानी एलएनजी के स्टोरेज से लेकर ट्रांसपोर्ट तक पूरी प्रक्रिया बेहद टेक्निकल है. एक बार जब LNG अपने डेस्टिनेशन यानी गंतव्य पर पहुंच जाती है तो उसे एक बार फिर गैस में कन्वर्ट करके इस्तेमाल के लिए तैयार किया जाता है.

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RLNG क्या है?

जब LNG को एक बार फिर गैस में कन्वर्ट किया जाता है तो इसे RLNG यानी रीगैसिफाइड लिक्विफाइड नैचुरल गैस कहा जाता है. तो RLNG वह LNG है जिसे रीगैसिफिकेशन नामक प्रक्रिया के जरिए वापस उसकी गैसीय अवस्था में बदल दिया जाता है. जब LNG अपनी मंजिल तक पहुंचती है, तो उसे टैंकों में जमा किया जाता है और फिर एक रीगैसिफिकेशन टर्मिनल से गुजारा जाता है, जहां उसे गर्म करके वापस उसकी प्राकृतिक गैसीय अवस्था में बदल दिया जाता है. एक बार रीगैसिफाई होने के बाद, RLNG बिल्कुल वैसी ही होती है जैसी गैस सीधे गैस के भंडारों से निकाली जाती है. इसे पाइपलाइनों के जरिए घरों, बिजनेस, बिजली संयंत्रों और अन्य जगहों पर इस्तेमाल के लिए पहुंचाया जा सकता है.

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अब यह भी समझ लें कि जिस LPG को लेकर पूरे देश में यह अफवाह है कि इसकी कमी हो रही है वो क्या है और LNG से यह अलग कैसे है?

LPG क्या होती है?

LPG का मतलब है लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस. यह प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम से निकलने वाली गैस होती है. इसमें मुख्य रूप से दो गैसें होती हैं- प्रोपेन और ब्यूटेन. LPG को सामान्य तापमान पर भी थोड़े दबाव में सिलेंडर में तरल रूप में रखा जा सकता है. इसी वजह से घरों में खाना पकाने के लिए LPG सिलेंडर इस्तेमाल किए जाते हैं. भारत में घरेलू गैस वितरण मुख्य रूप से तीन कंपनियां करती हैं- इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम. इन कंपनियों के देशभर में हजारों बॉटलिंग प्लांट और लाखों डीलर नेटवर्क हैं.

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LNG और LPG में असली फर्क क्या है?

अक्सर लोग समझते हैं कि दोनों एक ही गैस हैं. लेकिन असल में दोनों पूरी तरह अलग हैं. LPG नैचुरल गैस और पेट्रोलियम दोनों से निकलती है. घरों में खाना पकाने के काम आती है. सिलेंडरों में भरी जाती है. वहीं, LNG प्राकृतिक गैस से बनती है. बिजली उत्पादन और उद्योगों में इसका इस्तेमाल होता है. पाइपलाइन से सप्लाई की जाती है. यानी दोनों का उपयोग, संरचना और स्टोरेज तरीका अलग है.

LNG में मुख्य रूप से मीथेन गैस होती है. जिसे -162 डिग्री सेंटीग्रेड पर लिक्विड फॉर्म में स्टोर किया जाता है. वहीं LPG प्रोपेन/ब्यूटेन होता है जिसे सामान्य दाब पर लिक्विड फॉर्म में स्टोर किया जाता है. LPG हवा से भारी तो LNG हल्की गैस है.

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भारत में LPG को लेकर संकट क्या है?

दरअसल, भारत अपनी LPG जरूरतों का करीब 60 फीसद हिस्सा आयात करता है. पेट्रोलियम मंत्रालय के अपडेट के मुताबिक बेशक आयात पर निर्भरता अधिक है पर रिफाइनरियों ने उत्पादन बढ़ाकर रोज 50 हजार मीट्रिक टन तक पहुंचा दिया है, जो कि देश की जरूरत का 60% से अधिक हिस्सा है. यही वजह है कि आयात पर निर्भरत अब 30 हजार मीट्रिक टन तक ही रह गई है. बता दें कि भारत के पेट्रोलियम आयात का करीब 90 फीसद हिस्सा हॉर्मुज से होकर गुजरता है.

LNG vs LPG- किस पर निर्भरता अधिक?

भारत LPG और LNG दोनों के लिए आयात पर बहुत अधिक निर्भर है. LPG घरों में खाना पकाने के लिए जरूरी है, जबकि LNG का इस्तेमाल मुख्य रूप से औद्योगिक कामों, बिजली और शहरों में गैस नेटवर्क के विस्तार के लिए किया जाता है. भारत की सालाना LPG खपत करीब 33 मिलियन टन है. इसमें घरेलू उत्पादन सिर्फ 13 मिलियन टन होता है. यानी करीब 60% LPG आयात करना पड़ता है. इनमें से 90 प्रतिशत सप्लाई हॉर्मुज स्ट्रेट के जरिए आती है. इसका मतलब साफ है कि अगर हॉर्मुज बंद होता है तो LPG की सप्लाई पर सीधा और बड़ा असर पड़ता है. हॉर्मुज के बंद होने से LPG सप्लाई पर कुल प्रभाव करीब 54 प्रतिशत तक माना जा रहा है. तो अगर यह संकट लंबा चलता है, तो सबसे पहले असर LPG सिलेंडर पर दिखेगा. सिलेंडर की कीमतें और बढ़ सकती हैं. सप्लाई में देरी हो सकती है. साथ ही सरकार पर सब्सिडी का बोझ बढ़ सकता है.

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LNG की स्थिति थोड़ी अलग

प्राकृतिक गैस की 51% जरूरतें (अधिकांश LNG) आयात से ही पूरी की जाती हैं. इसमें से करीब 60% सप्लाई हॉर्मुज से आती है. यानी इस रूट से LNG सप्लाई का करीब 30 फीसद प्रभावित हो गया है. अब चूंकि भारत की सालाना LNG खपत करीब 71 बिलियन क्यूबिक मीटर है. इसमें लगभग 35.6 बिलियन क्यूबिक मीटर घरेलू उत्पादन है. तो यहां असर तो है, लेकिन LPG जितना सीधा और गहरा नहीं. हां, अगर भविष्य LNG के दाम बढ़े तो CNG और PNG की कीमतें बढ़ सकती हैं. इंडस्ट्री में उत्पादन लागत बढ़ेगी. सीमेंट, स्टील और बिजली जैसी बुनियादी चीजों की कीमतें प्रभावित होंगी और उससे जुड़ी वस्तुओं की कीमतें बढ़ेंगी.

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LPG पर सरकार ने क्या अपडेट दिया?

पेट्रोलियम मंत्रालय ने रविवार के अपने अपडेट में बताया कि हॉर्मुज स्ट्रेट के लगातार बंद रहने के बावजूद पूरे देश में लगातार पेट्रोलियम उत्पादों और LPG की निर्बाध उपलब्धता बनाए रखने के लिए सक्रिय उपाय किए जा रहे हैं. घरेलू मांग को पूरी करने के लिए रिफाइनरियों से होने वाले घरेलू LPG उत्पादन में वृद्धि की गई है. साथ ही केंद्र सरकार ने यह सूचना भी दी कि लगभग 94 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर दो कार्गो जहाज हॉर्मुज से होकर भारतीय तटों की तरफ बढ़ रहे हैं. 

पाइप गैस पर क्यों ज्यादा आंच नहीं आई?

हालांकि हॉर्मुज संकट के दौरान भी पाइप गैस या PNG की सप्लाई पर कोई असर नहीं पड़ा है. इसकी मुख्य वजह यह है कि PNG सीधे पाइपलाइन के माध्यम से घरों तक पहुंचती है, जिसमें सिलेंडर, ट्रक या बॉटलिंग प्लांट जैसी लॉजिस्टिक बाधाएं नहीं होती हैं. 

LPG के लिए खाड़ी देशों पर निर्भरता

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देश की संसद को बताया कि भारत पहले अपनी LPG जरूरतों का करीब 60 फीसद हिस्सा खाड़ी देशों जैसे- कतर, यूएई, सऊदी अरब और कुवैत से आयात करता था. वहीं 40 प्रतिशत हिस्सा देश में ही उत्पादित होता था. खाड़ी देशों के उपलब्ध स्रोतों के अलावा अब अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस से भी LPG की खेप हासिल की जा रही है. साथ ही घरेलू रिफाइनरी भी LPG के उत्पादन को बढ़ा रही हैं.

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