- एंथ्रोपिक की नई AI तकनीक Claude पुरानी Cobol भाषा को समझकर उसे आधुनिक भाषाओं में बदल सकती है.
- Cobol भाषा बैंकिंग, एयरलाइन और सरकारी प्रणालियों में इस्तेमाल होती है और IBM मेनफ्रेम पर आधारित है.
- IBM के शेयर एंथ्रोपिक के दावे के बाद 13% गिर गए, जो कंपनी के इतिहास की सबसे बड़ी एक दिवसीय गिरावट थी.
AI कंपनी एंथ्रोपिक ने दावा किया कि उसका नया कोड‑मॉडर्नाइजेशन टूल Claude अब Cobol जैसी पुरानी प्रोग्रामिंग भाषा को समझकर उसे आधुनिक भाषाओं में बदल सकता है. एंथ्रोपिक के इस दावे ने वॉल स्ट्रीट में भूचाल ला दिया. इसके बाद IBM के शेयर 13% तक गिर गए, जो पिछले 25 वर्षों में कंपनी की सबसे बड़ी एक-दिवसीय गिरावट है. इस गिरावट में IBM का लगभग 30 अरब डॉलर का मार्केट कैप मिट गया. ऐसे में आइए समझते हैं कि आखिर Cobol क्या है और क्यों एंथ्रोपिक के एक अपडेट से IBM का पूरा बाजार हिल गया.
क्यों Cobol इतना बड़ा मुद्दा है?
आज से करीब 67 साल पहले कंफ्यूटर इंजीनियरों को एक ऐसी भाषा की जरूरत महसूस हुई, जिसे हर कंप्यूटर समझ सके. एक ऐसी कमांड जो अलग-अलग कंपनियों के कंफ्यूटरों के दिमाग में आ जाए. 1959 में प्रोग्रामर्स को COBOL के रूप में बड़ी कामयाबी मिली. COBOL यानी कॉमन बिजनस ओरिऐंटेड लैंग्वेज. यह ऐसी भाषा थी जिसमें लिखा गया कोई भी प्रोग्राम अलग-अलग कंपनियों के कंफ्यूटर समझ सकते थे.
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लेकिन समस्या यह है कि Cobol डेवलपर अब लगभग खत्म हो चुके हैं. मूल डेवलपर रिटायर हो चुके हैं. यूनिवर्सिटीज में अब Cobol भाषा नहीं पढ़ाई जाती. ऐसे में 800 बिलियन लाइनों के कोड को संभालना बेहद मुश्किल और महंगा काम है. इसी वजह से लंबे समय से इन प्रणालियों को आधुनिक भाषाओं में बदलने (Modernisation) पर विचार होता रहा है, लेकिन यह बेहद महंगा और जोखिम भरा माना जाता है.
Anthropic का दावा: 'Claude इसे बेहद सस्ता और तेज़ बना सकता है'
अगर कोबोल आधारित प्रणालियों का माइग्रेशन आसान और सस्ता हो गया, तो इसका सीधा दबाव IBM की मेनफ्रेम निर्भरता पर पड़ सकता है और बाजार ने इसका संकेत तुरंत पकड़ लिया.
IBM का जवाब: 'सिर्फ कोड अनुवाद से आधुनिकीकरण नहीं होता'
शेयरों में भारी गिरावट के ठीक बाद IBM के सीनियर वाइस‑प्रेसिडेंट Rob Thomas ने ब्लॉगपोस्ट में Anthropic के दावों को अधूरा समाधान बताया. थॉमस ने कहा, 'कोड ट्रांसलेट करना एक बात है, लेकिन प्लेटफॉर्म मॉडर्नाइज करना कुछ और है. दोनों में बहुत बड़ा अंतर है.' उन्होंने तर्क दिया कि Cobol और IBM मेनफ्रेम सिस्टम दशकों में हार्डवेयर-कपलिंग के जरिए अत्यधिक अनुकूलित हुए हैं. केवल कोड बदलने से वह परफॉर्मेंस, सुरक्षा और भरोसेमंदता नहीं मिलेगी. मेनफ्रेम इकोसिस्टम iPhone-iOS की तरह है. कोई विकल्प बनाने से वह खत्म नहीं होगा.
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IBM की इस प्रतिक्रिया और शुरुआती पैनिक के उतरने से मंगलवार को स्टॉक में लगभग 5% की रिकवरी देखने को मिली.
विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?
HCLTech के CEO सी. विजयकुमार ने कहा कि यह मान लेना कि AI तुरंत लेगेसी सिस्टम बदल देगा, 'अत्यधिक सरलीकरण' है. एंटरप्राइज सिस्टम जटिल होते हैं. तकनीक तेज बदल रही है, लेकिन इसे बड़े संगठनों में लागू करने में समय लगता है.
वहीं Fractal Analytics के CEO श्रीकांत वेलामकन्नी का कहना है कि अगर AI कोड कन्वर्ज़न की लागत घटा देता है तो यह भारतीय IT सेक्टर के लिए बड़ा अवसर बन सकता है.
क्यों यह पूरा मामला IT दुनिया के लिए इतना महत्वपूर्ण है?
एक नई टेक लड़ाई की शुरुआत
Claude की क्षमताओं को लेकर Anthropic का दावा भविष्य में IT आधुनिकरण को तेज, सस्ता और अधिक सुलभ बना सकता है. लेकिन IBM का कहना है कि प्लेटफॉर्म‑लेवल इंटीग्रेशन को नजरअंदाज कर सिर्फ कोड ट्रांसलेशन पर उत्साहित होना जल्दबाज़ी है.













