Madrasa Education System: उत्तराखंड के मदरसों को लेकर सरकार बड़ा फैसला लेने जा रही है. सीएम पुष्कर सिंह धामी ने बताया है कि सरकार मदरसा बोर्ड को भंग करेगी और पूरे राज्य में समान शिक्षा व्यवस्था को लागू किया जाएगा. यानी उत्तराखंड के मदरसों में अलग सिलेबस नहीं होगा, बाकी सरकारी स्कूलों की तरह यहां भी पढ़ाई होगी और किताबें भी वही होंगीं. ऐसे में आज हम आपको बताते हैं कि मदरसों में पढ़ाई कैसे होती है और ये बाकी स्कूलों से कैसे या कितनी अलग है.
प्राइमरी से लेकर ग्रेजुएशन तक की व्यवस्था
तमाम राज्यों में मदरसा शिक्षा प्रणाली कई दशकों से चली आ रही है. ये एक व्यवस्थित ढांचे पर आधारित पढ़ाई है, जो आधुनिक स्कूली और विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा के समकक्ष ही मानी जाती है. जैसे आम स्कूलों में प्राइमरी, जूनियर, सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी होता है, ठीक उसी तरह मदरसे में भी शिक्षा के अलग-अलग स्तरों को परिभाषित किया जाता है.
तहतानिया
सबसे निचले स्तर यानी प्राथमिक शिक्षा को तहतानिया कहा जाता है. मदरसों में कक्षा 1 से लेकर पांचवीं तक की पढ़ाई को तहतानिया कहा जाता है, इसमें बच्चों को शुरुआती धार्मिक ज्ञान और बुनियादी साक्षरता सिखाई जाती है.
फौकानिया
जूनियर यानी कक्षा 6 से लेकर 8 तक की पढ़ाई को मदरसों में फ़ौकानिया कहा जाता है. इसमें छात्रों को सामाजिक और धार्मिक ज्ञान के अलावा अलग-अलग विषयों के बारे में पढ़ाया जाता है और उनकी समझ बढ़ाई जाती है.
मुंशी या मौलवी
मदरसों में 10वीं की पढ़ाई को मुंशी या फिर मौलवी के नाम से जाना जाता है. मुंशी में मुख्य रूप से फारसी भाषा की शिक्षा दी जाती है, वहीं मौलवी में अरबी भाषा पर विशेष ध्यान दिया जाता है. इनमें हिंदी, मैथ्स और साइंस जैसे विषयों को अनिवार्य रूप से पढ़ाया जाता है.
आलिम
सीनियर सेकेंडरी को आलिम कहा जाता है. ये 12वीं के समकक्ष होता है. मुंशी या मौलवी करने के बाद छात्र आलिम की पढ़ाई करते हैं. इसमें विज्ञान, सामान्य हिंदी और गृह विज्ञान जैसे वैकल्पिक विषय चुनने की सुविधा होती है.
कामिल और फाजिल
स्कूली शिक्षा के बाद इस्लामी शिक्षा पर केंद्रित डिग्रियां कामिल और फाजिल की बारी आती है. कामिल ग्रेजुएशन को कहा जाता है, वहीं फाजिल पोस्ट ग्रेजुएशन के बराबर मानी जाती है. छात्र अपनी इच्छा के अनुसार गंभीर विषयों का चुनाव करते हैं और फिर अलग-अलग क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करते हैं. इसमें दर्शन, तर्क और धर्मशास्त्र आदि शामिल होता है.
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