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Buffer State किसे कहते हैं और ये ग्लोबल पॉलिटिक्स में क्या भूमिका निभाते हैं?

Buffer State meaning : जानें क्या होता है बफर स्टेट और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इसकी क्या भूमिका है? आसान भाषा में समझें कैसे ये छोटे देश दुनिया को युद्ध से बचाते हैं.

Buffer State किसे कहते हैं और ये ग्लोबल पॉलिटिक्स में क्या भूमिका निभाते हैं?
दुनिया के देशों को समझने का ये तरीका सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है.

What is Buffer state : दुनिया का नक्शा सिर्फ रंगों और सीमाओं का खेल नहीं है, इसके पीछे ताकत, आजादी और रिश्तों की पूरी कहानी छिपी होती है. कोई देश पूरी तरह अपने दम पर खड़ा होता है, तो कोई किसी बड़े देश के सहारे चलता है. कहीं शांति बनाए रखने की कोशिश होती है, तो कहीं दो ताकतवर देशों के बीच टकराव को रोकने का काम किया जाता है. वहीं कुछ जगह ऐसी भी हैं जहां हालात इतने खराब हो जाते हैं कि सिस्टम ही कमजोर पड़ जाता है. यही वजह है कि दुनिया को समझने के लिए देशों को अलग-अलग कैटेगरी में देखा जाता है, ताकि ये साफ हो सके कि कौन कितना मजबूत है और किसकी क्या भूमिका है. अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इन हालात की समझने के लिए देशों को अलग-अलग कैटेगरी में रखा जाता है. जिसमें से एक है बफर स्टेट. यह सुनने में थोड़ा टेक्निकल लग सकता है, लेकिन इसका काम बिल्कुल वैसा ही है जैसा आपकी गाड़ी में लगा 'शॉक एब्जॉर्बर' या 'बंपर' करता है. तो चलिए जानते हैं क्या है ये मामला...

क्या है बफर स्टेट?

कल्पना कीजिए कि दो पड़ोसीएक-दूसरे को बिल्कुल पसंद नहीं करते. अगर उनके घरों की दीवारें एक-दूसरे से सटी होंगी, तो जरा-जरा सी बात पर लड़ाई हो सकती है. लेकिन अगर उनके घरों के बीच में एक छोटा सा बगीचा हो, तो दोनों का सीधा सामना नहीं होगा और लड़ाई की गुंजाइश कम हो जाएगी.

ग्लोबल पॉलिटिक्स में इसी 'बगीचे' बफर स्टेट कहते हैं. यह दो दुश्मन या प्रतिद्वंदी महाशक्तियों के बीच स्थित एक तटस्थ (Neutral) देश होता है, जो उन्हें सीधे टकराने से रोकता है.

ग्लोबल पॉलिटिक्स में बफर स्टेट की भूमिका?

युद्ध को रोकना

बफर स्टेट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि दो बड़े देशों की सेनाएं एक-दूसरे की सीमा पर आमने-सामने नहीं होतीं. इससे अचानक युद्ध छिड़ने का खतरा कम हो जाता है.

पावर को बैलेंस करना

ये देश किसी भी एक गुट में शामिल नहीं होते. इससे क्षेत्र में 'बैलेंस ऑफ पावर' बना रहता है.

बातचीत का जरिया

कई बार जब दो बड़े देशों में तनाव चरम पर होता है, तो ये छोटे देश उनके बीच संदेशवाहक (Mediator) का काम करते हैं.

बफर स्टेट के उदाहण- मंगोलिया, नेपाल और भूटान. 

ये तो बात हो गई बफर स्टेट की. अब आप इन कैटेगरीज को समझ लीजिए.

पूरी तरह आजाद देश - Sovereign State

ये वो देश होते हैं जो अपने फैसले खुद लेते हैं. इनके पास अपनी सरकार होती है और अपने नियम होते हैं. ये किसी और देश पर निर्भर नहीं रहते. भारत, अमेरिका और फ्रांस जैसे देश इसमें आते हैं.

आधे आजाद देश - Dependent State

ये ऐसे देश या इलाके होते हैं जो पूरी तरह खुद फैसले नहीं ले पाते. इनका कुछ काम किसी दूसरे ताकतवर देश के हाथ में होता है. आसान भाषा में ये आधी आजादी वाले होते हैं. ग्रीनलैंड इसका उदाहरण है.

किसी के पक्ष में नहीं रहने वाले देश - Neutral State

ये देश किसी भी लड़ाई या बड़े विवाद में हिस्सा नहीं लेते. इनका मकसद होता है शांति से रहना और खुद को सुरक्षित रखना. स्विट्जरलैंड ऐसा ही देश है.

जहां सिस्टम कमजोर हो गया - Failed State

ये सबसे मुश्किल स्थिति होती है. यहां सरकार लोगों को जरूरी सुविधाएं नहीं दे पाती और कानून व्यवस्था भी ठीक नहीं रहती. सोमालिया और यमन को इसमें गिना जाता है.

दुनिया के देशों को समझने का ये तरीका सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है. यही कैटेगरी तय करती है कि कौन सा देश कितना ताकतवर है, किस पर किसका असर है और वैश्विक राजनीति में किसकी क्या भूमिका है. अगर ये पांच शब्द समझ आ गए, तो इंटरनेशनल पॉलिटिक्स का आधा खेल खुद-ब-खुद साफ हो जाता है.

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