US-श्रीलंका में राजदूत रहे, रिटायरमेंट के बाद लड़ा लोकसभा चुनाव; दिल्ली के नए LG बने तरनजीत सिंह संधू कौन हैं?

पूर्व राजदूत तरनजीत सिंह संधू दिल्ली के नए उप-राज्यपाल बन गए हैं. तरनजीत सिंह संधू अमेरिका और श्रीलंका में भारत के राजदूत रह चुके हैं.

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तरनजीत सिंह संधू.
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  • केंद्र सरकार ने नौ राज्यों के राज्यपाल और उपराज्यपालों में बड़ा फेरबदल कर दिया है
  • पूर्व राजदूत तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है
  • संधू ने 1988 में भारतीय विदेश सेवा जॉइन की थी और अमेरिका-श्रीलंका के राजदूत रहे हैं
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नई दिल्ली:

केंद्र सरकार ने देर रात बड़े फेरबदल कर दिए हैं. दिल्ली और बंगाल समेत 9 राज्यों के राज्यपाल-उप राज्यपाल को बदल दिया गया है. दिल्ली के उपराज्यपाल रहे वीके सक्सेना को अब लद्दाख का उप राज्यपाल बनाया गया है. उनकी जगह पूर्व राजदूत तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का उप राज्यपाल नियुक्त किया गया है.

तरनजीत सिंह संधू अमेरिका में भारत के राजदूत रह चुके हैं. अमेरिका के अलावा श्रीलंका में भी उन्होंने राजदूत का पद संभाला है. 2024 में रिटायर होने के बाद उन्होंने लोकसभा चुनाव भी लड़ा था लेकिन हार गए थे.

पत्नी भी रह चुकी हैं राजदूत

23 जनवरी 1963 को जन्मे तरनजीत सिंह संधू ने सनावर के लॉरेंस स्कूल से पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफंस कॉलेज से हिस्ट्री (ऑनर्स) में ग्रेजुएशन किया. उन्होंने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) से अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में मास्टर्स की डिग्री हासिल की.

पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सर्विस की परीक्षा पास की और 1988 में भारतीय विदेश सेवा (IFS) में शामिल हुए. उनकी पत्नी रीनत संधू नीदरलैंड की राजदूत रह चुकी हैं.

ऐसा रहा है करियर

1988 में IFS से जुड़ने के बाद उन्होंने अपने डिप्लोमैटिक करियर की शुरुआत सोवियत संघ (अब रूस) से की. यहां वह 1990 से 1992 तक रहे. सोवियत संघ के टूटने के बाद यूक्रेन में भारतीय दूतावास खोलने में उनकी अहम भूमिका रही. 1992 से 1994 तक संधू कीव स्थित भारतीय दूतावास में राजनीतिक और प्रशासनिक विभागों के प्रमुख रहे.

दिसंबर 1995 से मार्च 1997 तक वह विदेश मंत्रालय में ओएसडी (प्रेस) रहे. इसके बाद 1997 से 2000 तक वॉशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास में प्रथम सचिव (राजनीतिक) थे. 

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उन्होंने दिसंबर 2000 से सितंबर 2004 तक कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग में राजनीतिक विंग के प्रमुख के रूप में भी काम किया था. जुलाई 2005 से फरवरी 2009 तक न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में भी रहे हैं. सितंबर 2011 से जुलाई 2013 तक फ्रैंकफर्ट में भारत के कॉन्सुल जनरल भी रहे. मार्च 2009 से अगस्त 2011 तक वह संयुक्त राष्ट्र में भी कई पदों पर रहे.

जुलाई 2013 से जनवरी 2017 तक संधू वॉशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास में डिप्टी चीफ रहे. इसके बाद उन्हें श्रीलंका भेजा गया. जनवरी 2017 से जनवरी 2020 तक वह श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त रहे. जनवरी 2020 में वह अमेरिका के राजदूत बनाए गए.

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रिटायरटमेंट के बाद लड़ा लोकसभा चुनाव

जनवरी 2024 में रिटायरमेंट के बाद उन्होंने उसी साल पंजाब की अमृतसर सीट से बीजेपी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा. हालांकि, वह तीसरे नंबर पर रहे. उन्हें 2.07 लाख वोट मिले थे. आम आदमी पार्टी के कुलदीप सिंह धालीवाल दूसरे नंबर पर रहे थे. जबकि कांग्रेस के गुरजीत सिंह औजला यहां से जीत गए थे.

कितनी संपत्ति के मालिक हैं संधू?

2024 के लोकसभा चुनाव में दाखिल हलफनामे में संधू ने अपने पास 39.92 करोड़ रुपये की संपत्ति होने की जानकारी दी थी. इनमें से 10.89 करोड़ की चल और 29.04 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति है. उनके पास दिल्ली, गुरुग्राम और अमृतसर में फ्लैट हैं.

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