World Book Fair 2026 में भारतीय सैन्य इतिहास पर आधारित थीम पैवेलियन बना आकर्षण

थीम पैवेलियन को युवाओं से खास तौर पर जोड़ने की कोशिश की गई है. यहां 500 से अधिक पुस्तकों की प्रदर्शनी है, जिनमें कई किताबें खुद सेना के अधिकारियों और जवानों द्वारा लिखी गई हैं. साथ ही, 100 से ज़्यादा कार्यक्रमों में पूर्व सैनिक, रक्षा विशेषज्ञ, लेखक और विद्वान युवाओं से संवाद करेंगे.

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विश्व पुस्तक मेले में सैनिकों के शौर्य गाथा देखने पहुंच रहे युवा
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नई दिल्ली:

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 इस बार किताबों के साथ-साथ देशभक्ति, साहस और बलिदान की कहानियों का भी भव्य उत्सव बन गया है. मेले की थीम “भारतीय सैन्य इतिहास: शौर्य एवं विवेक @75” रखी गई है, जो आज़ादी के 75 वर्षों में भारतीय सशस्त्र बलों की गौरवशाली यात्रा को समर्पित है.भारत मंडपम में लगभग 1,000 वर्ग मीटर में फैला यह थीम पैवेलियन दर्शकों को एक अनोखा और भावनात्मक अनुभव देता है. यहां किताबें, पैनल, पोस्टर, डॉक्यूमेंट्री और विशेष रूप से तैयार किए गए दृश्य माध्यमों के ज़रिए भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की बहादुरी और विरासत को जीवंत किया गया है. आज़ादी के बाद से तीनों सेनाएं न केवल देश की सीमाओं की रक्षा कर रही हैं, बल्कि आपदा राहत, शांति मिशन और राष्ट्र निर्माण में भी अहम भूमिका निभा रही हैं.

इस पैवेलियन का उद्देश्य केवल युद्धों का इतिहास दिखाना नहीं है, बल्कि उस सांस्कृतिक विरासत को सामने लाना है, जिसमें देश के अलग-अलग कोनों से आए लोग एकजुट होकर भारत की सेवा करते हैं. यही “विविधता में एकता” की असली तस्वीर है. यहां दिखाई जाने वाली वीरता, त्याग और धैर्य की कहानियां सिर्फ सैन्य इतिहास नहीं, बल्कि भारत की अपनी कहानी हैं.

थीम पैवेलियन को युवाओं से खास तौर पर जोड़ने की कोशिश की गई है. यहां 500 से अधिक पुस्तकों की प्रदर्शनी है, जिनमें कई किताबें खुद सेना के अधिकारियों और जवानों द्वारा लिखी गई हैं. साथ ही, 100 से ज़्यादा कार्यक्रमों में पूर्व सैनिक, रक्षा विशेषज्ञ, लेखक और विद्वान युवाओं से संवाद करेंगे.

खास आकर्षण के तौर पर एनडीए खड़कवासला के सुदान ब्लॉक की विशाल प्रतिकृति, अर्जुन टैंक, लड़ाकू विमान तेजस और आईएनएस विक्रांत के मॉडल लगाए गए हैं.1947 से लेकर हाल के सैन्य अभियान ऑपरेशन सिंदूर तक की झलक यहां देखने को मिलती है. परमवीर चक्र से सम्मानित 21 वीरों को भी विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया है.

आईएमए देहरादून से प्रेरित प्रवेश द्वार और सैन्य रंगों व प्रतीकों से सजा यह पैवेलियन दर्शकों को गर्व से भर देता है. कुल मिलाकर, यह थीम पैवेलियन भारतीय सशस्त्र बलों के शौर्य और विवेक को सलाम करने के साथ-साथ युवाओं को देशभक्ति, नेतृत्व और सेवा की प्रेरणा देने का एक सशक्त मंच बना हुआ है यही कारण है की बड़ी संख्या लोग यहाँ आकर अपनी तस्वीरें भी खिंचवा रहे हैं.
 

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