- दिल्ली सरकार ने मॉनसून में बाढ़ से बचाव के लिए जापानी तकनीक के तहत पानी संचयन की नई योजना बनाई है
- यमुना नदी के बाढ़ प्रभावित इलाकों में तालाब निर्माण का पायलट प्रोजेक्ट महंगा होने के कारण आगे नहीं बढ़ पाया
- IIT दिल्ली ने वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान और जल संचयन के उपाय सुझाए थे
दिल्ली को मॉनसून में बाढ़ से बचाने के लिए रेखा गुप्ता सरकार ने नया प्लान बनाया है. बीते मॉनसून सीजन में यमुना नदी के रौद्र रूप ने कैसे दिल्ली में तबाही मचाई थी,सबने देखा और झेला भी था. इस बार ऐसी नौबत न आए,इसके लिए सरकार पहले से ही तैयारी कर रही है. असामान्य बारिश और बाढ़ की बढ़ती संभावना और बारिश के पानी को संग्रह करके इसका इस्तेमाल कैसे किया जाए इसके लिए दिल्ली सरकार कई प्रस्तावों पर विचार कर रही है.
जापानी तकनीक वाला हल
ग्लोबल वॉर्मिंग के वजह से कम वक्त में असामान्य बारिश और बाढ़ की बढ़ती संभावना और बारिश के पानी को संग्रह करके इसका इस्तेमाल कैसे किया जाए इसके लिए दिल्ली सरकार कई प्रस्तावों पर विचार कर रही है…इसके लिए बीते साल बाढ़ नियंत्रण के लिए एक कमेटी गठित की गई..कमेटी ने कई सिफारिश भी की…मसलन जापानी तकनीक से बाढ़ के पानी का संग्रह किया जाए या फिर यमुना और उसका सहायक नदियों पर छोटे-छोटे बांध बनाए जाएं.
बाढ़ रोकने की जापानी तकनीकी क्या है, दिल्ली में लागू होने में क्या अड़चनें?
दिल्ली में बाढ़ के खतरे को रोकने और पानी के संचयन के लिए जापानी तकनीकी का इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई थी.जापान को भारी बारिश से बचाने के लिए कई अंडरग्राउंड या भूमिगत जलाशय का निर्माण किए गए.बारिश के दौरान पानी का संचयन होता है फिर उसे कम वर्षा वाले दिनों में इस्तेमाल किया जाता है.इसी तर्ज पर दिल्ली के यमुना फ्लड इलाके में 2019 में पल्ला बाढ़ क्षेत्र में 26 एकड़ में तालाब बनाए गए, लेकिन इस पायलट प्रोजेक्ट को आगे नहीं बढ़ाया गया क्योंकि इन तालाब के निर्माण और फिर गाद निकालना बहुत खर्चीला साबित हुआ.दिल्ली की जलसुरक्षा पर प्रोजेक्ट तैयार करने वाले IIT दिल्ली के प्रोफेसर AK Gosain कहते हैं कि तालाब का निर्माण करना एक उपाय है लेकिन IIT दिल्ली ने एक साइंटिफिक अध्ययन करके दिल्ली सरकार को प्रस्ताव दिया था.इसमें बारिश के बदलते पैटर्न, जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान और जल संचयन की जगहों समेत कई उपाय बताए गए थे लेकिन उस पर काम नहीं हुआ.
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असोला भाटी में पानी इकट्ठा करने की योजना बनी थी
दिल्ली में यमुना के पानी को संरक्षित करने के लिए बाढ़ के वक्त पानी को असोला भाटी के पहाड़ियों में इकट्ठा करने का प्रस्ताव भी दिया गया,लेकिन ये प्रस्ताव भी खर्चीला होने के चलते और असोला भाटी के इको सिस्टम के चलते सिरे नहीं चढ़ पाया.एक बार फिर से इस योजना के तहत असोला भाटी की पुरानी माइंस में पानी के संग्रह करने की योजना बनाई जा रही है.हालांकि IIT के प्रोफेसर ए के गोसाईं बताते हैं कि असोला माइंस में साफ पानी का संग्रह होना जरुरी है. अगर कहीं प्रदूषित पानी आया तो उससे भूजल के प्रदूषित होने का खतरा भी है. वो कहते हैं कि दिल्ली में कंक्रीट का इस्तेमाल ज्यादा होने से बारिश का पानी जमीन के नीचे जाने की प्रक्रिया भी बहुत कम हो गई.इसके अलावा दिल्ली के STP में 800 MGD पानी साफ होता है उसे भी हम बर्बाद कर देते हैं.अगर STP के साफ पानी को भी असोला भाटी जैसी जगहों पर संरक्षित किया जाए तो काफी मदद मिल सकती है,लेकिन दिल्ली में पानी को लेकर गंभीरता से काम करने की जरुरत है.
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