दिल्ली हीटवेव के लिए सरकार तैयार! अस्पतालों में ‘कूल रूम’, शहरभर में पानी की तैयारी, 2025 की कमियों के बाद एक्शन

स्कूलों में बच्चों को समय-समय पर पानी पीने की याद दिलाने के लिए “वॉटर बेल” शुरू होगी. जरूरत पड़ने पर ओआरएस भी दिया जाएगा. अधिकारियों के अनुसार, हीटवेव से बचाव को लेकर शहरभर में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा.

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हीटवेव से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने कर ली तैयारी
NDTV
नई दिल्ली:

दिल्ली में गर्मी बढ़ते ही सरकार ने 2026 के लिए हीटवेव प्लान लागू करना शुरू कर दिया है. इस बार फोकस अस्पतालों, पानी की सप्लाई और मजदूरों की सुरक्षा पर है. खासकर इसलिए क्योंकि पिछले साल कई इंतज़ाम ज़मीन पर नहीं दिखे थे. शुक्रवार को हुई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने तैयारियों का जायजा लिया और विभागों को निर्देश दिए. दिल्ली के अस्पतालों में हीटस्ट्रोक के इलाज के लिए अलग “कूल रूम” बनाए जाएंगे. बेड बढ़ाए जा रहे हैं और एंबुलेंस को गर्मी से जुड़े मामलों के लिए तैयार किया जा रहा है.स्वास्थ्य केंद्रों में ओआरएस, बर्फ पैक और ज़रूरी दवाएं रखी जाएंगी, ताकि निर्जलीकरण और हीट स्ट्रेस से निपटा जा सके.

शहरभर में पानी की व्यवस्था

बस स्टैंड, स्कूल, पुलिस थाना, डाकघर और निर्माण स्थलों पर पीने के पानी की सुविधा बढ़ाई जाएगी.गर्मी के चरम समय को देखते हुए शहर में पानी के कूलर, पानी एटीएम और टैंकर लगाए जाएंगे. जानवरों और पक्षियों के लिए भी छाया और पानी के इंतज़ाम की बात कही गई है.

स्कूलों में ‘वॉटर बेल', जागरूकता अभियान

स्कूलों में बच्चों को समय-समय पर पानी पीने की याद दिलाने के लिए “वॉटर बेल” शुरू होगी. जरूरत पड़ने पर ओआरएस भी दिया जाएगा. अधिकारियों के अनुसार, हीटवेव से बचाव को लेकर शहरभर में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा. यह प्लान दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के जरिए लागू होगा और मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अलर्ट के आधार पर निगरानी की जाएगी. निर्माण मजदूरों के लिए काम के समय में बदलाव किया जाएगा ताकि दोपहर की तेज गर्मी से बचा जा सके. साइट पर छाया, पीने का पानी, आराम के ब्रेक और ओआरएस देना जरूरी होगा.

2025 की कमियां अब भी सवाल

पिछले साल की योजना में करीब 3,000 पानी के कूलर, सड़क किनारे ठंडक शेल्टर और छायादार फुटपाथ बनाने की बात कही गई थी, लेकिन इनमें से काफी इंतज़ाम ज़मीन पर नजर नहीं आए. मजदूरों के लिए दिए गए निर्देशों की निगरानी भी सीमित रही और जिम्मेदारी ठेकेदारों पर छोड़ दी गई. बस और ऑटो स्टैंड पर छाया, पानी और ओआरएस जैसी बुनियादी सुविधाएं भी कई जगहों पर नहीं दिखीं.

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