दिल्ली के हौज खास में दर्दनाक हादसा: AC ब्लास्ट के बाद घर में लगी आग, 80 वर्षीय रिटायर्ड IAS की मौत

दिल्ली के हौज खास इलाके में देर रात एक घर में AC की इनडोर यूनिट फटने से भीषण आग लग गई. इस हादसे में 80 वर्षीय रिटायर्ड IAS अधिकारी धनेंद्र कुमार की मौत हो गई, जबकि उनका बेटा घायल हो गया. घटना के वक्त घर में 5 लोग मौजूद थे. पुलिस और क्राइम टीम शॉर्ट सर्किट व तकनीकी कारणों की जांच कर रही है, हालांकि शुरुआती तौर पर किसी साजिश की आशंका नहीं है.

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देश की राजधानी दिल्ली के पॉश इलाके हौज खास से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां एक मकान में एयर कंडीशनर की इनडोर यूनिट में जोरदार ब्लास्ट होने के बाद भीषण आग लग गई. इस हादसे में 80 वर्षीय सेवानिवृत्त IAS अधिकारी धनेंद्र कुमार की दम घुटने और झुलसने के कारण मौत हो गई, जबकि उनका बेटा गंभीर रूप से घायल है, जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है.

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, यह घटना देर रात की है. रात करीब 11:18 बजे पुलिस और दमकल विभाग को हौज खास स्थित मकान नंबर R-15 में आग लगने की सूचना मिली. सूचना मिलते ही राहत और बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचा और आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू की.

AC की इनडोर यूनिट में ब्लास्ट

शुरुआती जांच में सामने आया है कि हादसे की वजह AC की इनडोर यूनिट में हुआ ब्लास्ट था. धमाका इतना जोरदार था कि देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया. जिस वक्त यह हादसा हुआ, उस समय घर में परिवार के सदस्यों और घरेलू सहायकों (डोमेस्टिक हेल्प) समेत कुल पांच लोग मौजूद थे. ब्लास्ट होते ही घर के अंदर अफरा-तफरी मच गई. बाकी लोग किसी तरह सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे, लेकिन बुजुर्ग धनेंद्र कुमार धुएं के गुबार में फंस गए. 

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क्राइम टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए

हादसे के बाद धनेंद्र कुमार और उनके बेटे को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान डॉक्टरों ने धनेंद्र कुमार को मृत घोषित कर दिया. घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और क्राइम टीम ने मौके का मुआयना कर साक्ष्य जुटाए हैं. बिजली के कनेक्शनों और वायरिंग की इलेक्ट्रिकल जांच भी की जा रही है ताकि ब्लास्ट के सही तकनीकी कारणों का पता लगाया जा सके. पुलिस ने चश्मदीदों के बयान दर्ज कर लिए हैं और शुरुआती जांच में किसी भी तरह की साजिश की आशंका से इनकार करते हुए इसे एक दुखद दुर्घटना बताया है. 

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धनेंद्र कुमार का लंबा प्रशासनिक सफर

भारत की नौकरशाही और आर्थिक नीतियों में अहम भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ IAS अधिकारी  का प्रशासनिक करियर बेहद लंबा और प्रभावशाली रहा है. साल 1946 में जन्मे धनेंद्र कुमार ने 1968 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी IAS अधिकारी के तौर पर अपनी सेवा शुरू की थी. अपने करियर के दौरान उन्होंने केंद्र और हरियाणा सरकार में कई बड़े पदों पर काम किया और बाद में देश के प्रतिस्पर्धा कानून और आर्थिक सुधारों से जुड़े अहम फैसलों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

कई अहम मंत्रालयों में रहे सचिव

धनेंद्र कुमार ने केंद्र सरकार के कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों में सचिव के तौर पर जिम्मेदारी संभाली. इनमें रक्षा मंत्रालय, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय शामिल हैं. रक्षा मंत्रालय में सचिव रहते हुए उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासनिक मामलों को संभाला, जबकि सड़क परिवहन मंत्रालय में रहते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर और हाईवे प्रोजेक्ट्स से जुड़े मामलों पर काम किया. संस्कृति मंत्रालय में सचिव के रूप में उन्होंने देश की सांस्कृतिक विरासत और संस्थानों से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी निभाई. इसके अलावा वे ग्रामीण विद्युतीकरण निगम  के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर भी रहे.

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वर्ल्ड बैंक में भी निभाई बड़ी जिम्मेदारी

धनेंद्र कुमार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का प्रतिनिधित्व किया. नवंबर 2005 से जनवरी 2009 तक वे  में भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रहे. इस दौरान उन्होंने दक्षिण एशियाई देशों से जुड़े आर्थिक और विकास परियोजनाओं पर काम किया. फरवरी 2009 से जून 2011 तक धनेंद्र कुमार  के चेयरमैन रहे. उनके कार्यकाल के दौरान भारत में प्रतिस्पर्धा कानून को लागू करने की दिशा में कई अहम कदम उठाए गए. बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनाए रखने और बड़ी कंपनियों के एकाधिकार पर नजर रखने के लिए CCI की भूमिका को मजबूत किया गया.

राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा नीति बनाने में अहम भूमिका

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा नीति तैयार करने के लिए भी धनेंद्र कुमार की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी. इस कमेटी का काम प्रतिस्पर्धा कानून में सुधार और नई नीतियों को तैयार करना था. इसके अलावा आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय ने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की मंजूरी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए भी उनकी अध्यक्षता में SAPREP कमेटी का गठन किया था.

हरियाणा में औद्योगिक विकास में बड़ा योगदान

धनेंद्र कुमार ने हरियाणा सरकार में भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं. वे हरियाणा के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव रहे, साथ ही Haryana State Industrial & Infrastructure Development Corporation यानी HSIIDC के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर भी रहे. हरियाणा में इंडस्ट्रियल पार्क्स के विकास में योगदान के लिए उन्हें  द्वारा नेशनल सिटिजन्स अवॉर्ड भी दिया गया था. सार्वजनिक मामलों में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी मिली.

जिले से दिल्ली तक का लंबा प्रशासनिक सफ़र

अपने शुरुआती प्रशासनिक करियर में धनेंद्र कुमार हरियाणा के कई जिलों में जिला कलेक्टर और अन्य प्रशासनिक पदों पर रहे. वे करनाल और जींद के डिप्टी कमिश्नर रहे. इसके अलावा लेबर कमिश्नर, रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव सोसाइटीज, डायरेक्टर ऑफ इंडस्ट्रीज और कई अन्य अहम पदों पर भी उन्होंने काम किया. उन्होंने लंदन स्थित Indian Investment Centre में रेजिडेंट डायरेक्टर के तौर पर भी जिम्मेदारी निभाई. इसके अलावा कृषि मंत्रालय, वस्त्र मंत्रालय और संचार मंत्रालय में भी उन्होंने वरिष्ठ पदों पर काम किया. रिटायरमेंट के बाद भी धनेंद्र कुमार सार्वजनिक नीति और कॉरपोरेट मामलों में सक्रिय रहे. वे Competition Advisory Services India LLP यानी COMPAD के संस्थापक चेयरमैन हैं. इसके साथ ही वे Indian Institute of Corporate Affairs में School of Competition Law के प्रिंसिपल एडवाइजर और चीफ मेंटर के तौर पर भी जुड़े रहे.

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