अब किसी और की जेब में नहीं जाएगा कमाई का पैसा... भारत टैक्सी लॉन्च कर बोले अमित शाह

सहकार टैक्सी में सबसे बड़ी शेयर पूंजी सिर्फ 500 रुपये है और वही 500 रुपये सारथियों को असली मालिक का दर्जा दे रहा है. उन्होंने कहा कि यह छोटी सी राशि टैक्सी सारथियों की मेहनत, आत्मसम्मान और उनकी आर्थिक आजादी की नींव बनने जा रही है.

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अमित शहा ने लॉन्च की भारत टैक्सी.
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  • अमित शाह ने भारत की पहली सहकारिता आधारित टैक्सी सेवा ‘भारत टैक्सी’ का औपचारिक शुभारंभ नई दिल्ली में किया
  • शाह ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए मालिकाना हक का मॉडल तैयार कर रहा है
  • शाह ने कहा कि भारत टैक्सी की मालिक कोई बाहरी कंपनी नहीं बल्कि टैक्सी चलाने वाले सारथी स्वयं होंगे
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नई दिल्ली:

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में भारत की पहली सहकारिता-आधारित टैक्सी सेवा ‘भारत टैक्सी' का औपचारिक शुभांरभ किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए मालिकाना हक का एक मॉडल तैयार कर रहा है. तीन साल के अंदर कश्मीर से कन्याकुमारी और द्वारका से कामख्या तक सहकार टैक्सी हमारे टैक्सी सार्थियों के कल्याण का एक बहुत बड़ा माध्यम बन जाएगी.

 शाह ने कहा कि जब पहली बार उन्होंने संसद के सामने सहकार टैक्सी का विषय रखा तो बहुत सारे लोगों, खासकर टैक्सी परिचालन से जुड़ी कंपनियों ने सवाल उठाया कि सरकार टैक्सी के क्षेत्र में क्यों प्रवेश कर रही है. उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को ‘सहकार' और ‘सरकार' के बीच का भेद नहीं मालूम है. शाह ने कहा कि सरकार टैक्सी के क्षेत्र में प्रवेश नहीं रही, बल्कि सहकार (Cooperation) टैक्सी के क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है.

अमित शाह ने कहा कि शायद पूरी दुनिया में पहली बार ऐसी अनूठी कंपनी अस्तित्व में आ रही है, जिसका असली मालिक कोई व्यक्ति या बाहरी कंपनी नहीं, बल्कि टैक्सी चलाने वाला सारथी ही है. सहकार टैक्सी से जुड़े हर एक सारथी भाई-बहन ही इस सहकारी टैक्सी समिति के सच्चे मालिक हैं.

 अमित शाह ने टैक्सी सारथियों से अपील की कि वे अभी भी टैक्सी चलाते हैं, सहकार टैक्सी से जुड़ने के बाद भी टैक्सी चलाएंगे, लेकिन दोनों में एक बड़ा फर्क होगा. अभी टैक्सी का पहिया किसी और की जेब में पैसे डालता है, लेकिन अब सारथियों की टैक्सी के पहिये की कमाई सारथियों की जेब में ही जाएगी.  आज जिस सहकारिता मॉडल की बात की जा रही है, वही आज के समय में सबसे नई और सबसे सफल शुरुआत है. उन्होंने कहा कि अब टैक्सी का पहिया किसी और की कमाई के लिए नहीं, बल्कि टैक्सी सारथियों की समृद्धि और खुशहाली के लिए घूमेगा.

अमित शाह ने कहा कि भारत में कई विश्व-स्तरीय सहकारी मॉडल खड़े हो चुके हैं, जिनमें अमूल, इफको, कृभको जैसी संस्थाएं शामिल हैं. इनमें से किसी भी सहकारी संस्था में शुरूआती पूंजी बहुत बड़ी नहीं थी. इसी तरह सहकार टैक्सी में सबसे बड़ी शेयर पूंजी सिर्फ 500 रुपये है और वही 500 रुपये सारथियों को असली मालिक का दर्जा दे रहा है. उन्होंने कहा कि यह छोटी सी राशि टैक्सी सारथियों की मेहनत, आत्मसम्मान और उनकी आर्थिक आजादी की नींव बनने जा रही है.

 अमित शाह ने कहा कि हर पांच साल पर होने वाले चुनाव के बाद टैक्सी सारथियों द्वारा चुने गए दो प्रतिनिधि बोर्ड में बैठेंगे. वे ही उनके हितों की देखभाल करेंगे और उनके लिए फैसले करेंगे. यही सहकारिता की आत्मा और सच्चे मालिकाना हक की भावना है. उन्होंने कहा कि सहकार टैक्सी कुल मुनाफे में सिर्फ 20 फीसदी पैसे ही अपने पास रखेगी, यानि 100 रुपए में से 20 रुपए ही सहकार टैक्सी अपने पास रखेगी, जिसके मालिक सारथी ही हैं. शाह ने कहा कि सारा मुनाफा भारत टैक्सी से जुड़े सारथी के अकाउंट में ही जाएगा. भारत टैक्सी के पूंजी खाते में पड़े 20 रुपए के मालिक भी सारथी ही होंगे.

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