गाजियाबाद कलेक्ट्रेट के बाहर बढ़ती वाहनों की संख्या और सीमित पार्किंग सुविधा अब यातायात व्यवस्था के लिए चुनौती बनती जा रही है. प्रशासनिक कार्यों के लिए रोजाना बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं, लेकिन पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था नहीं होने के कारण अधिकांश वाहन सड़क किनारे खड़े किए जाते हैं. इसका सीधा असर आसपास के ट्रैफिक पर दिखाई दे रहा है. कलेक्ट्रेट के बाहर सड़क के दोनों ओर खड़े वाहनों के कारण यातायात के लिए उपलब्ध जगह कम हो जाती है. कई बार दोपहिया और चारपहिया वाहनों की लंबी कतारें सड़क के किनारे दिखाई देती हैं, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है. सड़क की चौड़ाई कम होने से वाहन चालकों को निकलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.
(दिल्ली-एनसीआर में आप गाड़ी लेकर कहीं भी जाएं,…मार्केट, कॉमर्शियल बिल्डिंग, ऐतिहासिक स्थल, मंदिर, बड़े पार्क या फिर रेस्टोरेंट, वहां पहुंचते ही सबसे पहले जो व्यक्ति आपसे मुखातिब होता है वो है पार्किंग की पर्ची काटता कर्मचारी. कई जगहों पर ये कर्मचारी नगर निगम या विकास प्राधिकरणों द्वारा अधिकृत भी होते हैं लेकिन राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के जिलों की अधिकतर जगहों पर पार्किंग शुल्क के नाम पर पर्ची माफिया काम कर रहा है. ये वो लोग हैं जिन्हें ना तो किसी ने पार्किंग के लिए अधिकृत किया है और ना ही जिस जगह पर ये गाड़ियां पार्क करवाकर पैसे वसूलते हैं वहां पार्किंग का कोई शुल्क तय है. अगर आप इनसे सवाल-जवाब करें या पैसे देने से मना करें तो दबंगई दिखाने को भी ये तैयार रहते हैं. ndtv.in ऐसे ही पार्किंग माफिया के खिलाफ चला रहा है मुहिम. इस सीरीज की तीसरी किस्त में पढ़िए, गाजियाबाद में कैसे चल रहा है अवैध पार्किंग का खेल.)
व्यस्त समय में बढ़ जाती है परेशानी
सुबह और दोपहर के समय स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है. कलेक्ट्रेट में आने वाले लोगों के अलावा इस मार्ग का उपयोग करने वाले स्थानीय निवासी, वकील, कर्मचारी और अन्य वाहन चालक भी इसी रास्ते से गुजरते हैं. ऐसे में वाहनों का दबाव बढ़ने से ट्रैफिक की गति धीमी पड़ जाती है और कई जगह जाम जैसी स्थिति बन जाती है.
पैदल यात्रियों को भी हो रही दिक्कत
सड़क किनारे खड़े वाहनों का असर केवल ट्रैफिक पर ही नहीं, बल्कि पैदल यात्रियों पर भी पड़ रहा है. कई स्थानों पर लोगों को सड़क के किनारे सुरक्षित रूप से चलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती. इससे राहगीरों को जोखिम उठाकर सड़क पर चलना पड़ता है और दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है.
ट्रैफिक प्रबंधन के सामने चुनौती
बढ़ते वाहन दबाव के बीच ट्रैफिक पुलिस को यातायात सुचारु बनाए रखने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ते हैं. जाम की स्थिति बनने पर पुलिसकर्मी वाहनों को व्यवस्थित कराने में जुटे रहते हैं, लेकिन पार्किंग की मूल समस्या जस की तस बनी रहती है. ऐसे में अस्थायी उपायों से राहत तो मिलती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाता.
प्रशासनिक केंद्र होने से बढ़ती है भीड़
कलेक्ट्रेट जिले का महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र है, जहां विभिन्न सरकारी कार्यों के लिए बड़ी संख्या में नागरिक पहुंचते हैं. भूमि संबंधी मामलों, प्रमाण पत्रों, राजस्व कार्यों और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के चलते यहां रोजाना लोगों की आवाजाही बनी रहती है. इसी कारण पार्किंग की मांग लगातार बढ़ रही है.
स्थायी समाधान की जरूरत
स्थानीय लोगों का मानना है कि समस्या का समाधान केवल ट्रैफिक नियंत्रण से संभव नहीं है. कलेक्ट्रेट आने वाले लोगों के लिए पर्याप्त पार्किंग सुविधा विकसित करने और सड़क किनारे अनियोजित पार्किंग पर प्रभावी नियंत्रण करने की आवश्यकता है. यदि व्यवस्थित पार्किंग की व्यवस्था की जाती है, तो सड़क पर वाहनों का दबाव काफी हद तक कम किया जा सकता है.
जवाब का इंतजार
कलेक्ट्रेट के बाहर लगातार बढ़ रही पार्किंग और ट्रैफिक समस्या कई सवाल खड़े कर रही है. क्या यहां वैकल्पिक पार्किंग की व्यवस्था विकसित की जाएगी? सड़क किनारे अनियंत्रित पार्किंग को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे? और बढ़ते यातायात दबाव से लोगों को राहत दिलाने के लिए प्रशासन की क्या योजना है? इन सवालों के जवाब और प्रभावी कार्रवाई का इंतजार क्षेत्र के लोग लंबे समय से कर रहे हैं.
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