राजधानी दिल्ली में भीषण गर्मी ने बिजली के ग्रिड पर दबाव बढ़ा दिया है. इस साल गर्मी के प्रकोप के चलते 25 मई 2026 को दिल्ली में बिजली की पीक डिमांड 8,439 मेगावाट दर्ज की गई, जो मई के महीने में अब तक ऑल-टाइम हाई है. हैरान करने वाली बात यह है कि पिछले छह दिनों में यह चौथी बार है, जब दिल्ली में बिजली की मांग ने 8,000 मेगावाट के आंकड़े को पार कर गया.
अगर बीते वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो इस साल की गर्मी ने पुराने सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं. मई 2025 में पूरे महीने के दौरान दिल्ली की बिजली मांग कभी भी 8,000 मेगावाट तक नहीं पहुंची थी, लेकिन एक मई से 25 मई 2026 के बीच दिल्ली की पीक पावर डिमांड 2025 के मुकाबले 20 दिन यानी लगभग 80% दिन और 2024 के मुकाबले 18 दिन यानी लगभग 72% दिन ज्यादा दर्ज की गई. इससे पहले, 27 अप्रैल 2026 को भी इतिहास में पहली बार अप्रैल के महीने में बिजली की मांग 7,000 मेगावाट के पार यानी 7,078 मेगावाट पहुंची थी, जबकि अमूमन यह आंकड़ा मई के महीने में आता था.
बिजली वितरण में BSES ने मारी बाजी
रिकॉर्डतोड़ मांग के बावजूद, दिल्ली की पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों (डिस्कॉम) ने बिना किसी बड़ी कटौती के बिजली सप्लाई को सुचारू रूप से चालू रखा. BSES के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में BRPL ने 3,745 मेगावाट और BYPL ने 1,820 मेगावाट की भारी-भरकम मांग को सफलतापूर्वक पूरा किया. मौजूदा वक्त में BSES दिल्ली के लगभग 2.25 करोड़ निवासियों और 53 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को बिजली सेवाएं दे रहा है. इसके लिए कंपनी ने लॉन्ग-टर्म पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) राज्यों के साथ बैंकिंग व्यवस्था और द्विपक्षीय समझौतों का मजबूत ढांचा तैयार किया है.
तकनीक और 'ग्रीन एनर्जी' का मिला साथ
दरअसल, इस बार ग्रिड को थामने में क्लीन और ग्रीन एनर्जी की बड़ी भूमिका रही है. BSES क्षेत्रों में लगभग 2,670 मेगावाट ग्रीन पावर सप्लाई की जा रही है, जिसमें 840 मेगावाट सोलर, 572 मेगावाट हाइड्रो, 500 मेगावाट विंड और लगभग 250 मेगावाट रूफटॉप सोलर एनर्जी शामिल हैं. साथ ही, किलोकरी में स्थित 20 मेगावाट का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) पीक ऑवर्स में ग्रिड को स्थिरता दे रहा है.
बदलते मौसम और मांग का सटीक अनुमान लगाने के लिए BSES इस बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है. IMD-POSCO के सहयोग से तैयार इन मॉडल्स की मदद से बिजली की मांग का रियल-टाइम और एडवांस फोरकास्टिंग किया जा रहा है, जिससे बिजली की कमी होने पर उसे तुरंत एक्सचेंज से खरीदा जा सके और दिल्लीवासियों को बिना किसी रुकावट के बिजली मिलती रहे.
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