Heat wave in Delhi: दिल्ली में सिर्फ पारा ही नहीं, बिजली की मांग भी हुई बेकाबू; खपत 8,000 मेगावाट के पार

Heat Wave in Delhi: दिल्ली में भीषण गर्मी के बीच बिजली की खपत ने सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं. बुधवार दोपहर को दिल्ली की पीक पावर डिमांड 8,039 मेगावाट (MW) तक पहुंच गई, जो 2026 में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. मौसम के इस बदलते मिजाज और समय से पहले शुरू हुई तपिश के कारण मई के शुरुआती 20 दिनों में से 15 दिन बिजली की मांग पिछले साल के मुकाबले कहीं अधिक दर्ज की गई है.

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Delhi Heat wave: दिल्ली में सिर्फ पारा ही नहीं, बिजली की मांग भी हुई बेकाबू; खपत 8,000 मेगावाट के पार
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Delhi Heat wave News: दिल्ली में इस बार गर्मी ने अपने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं. इस भीषण तपिश का सीधा असर अब राजधानी की बिजली सप्लाई और ग्रिड पर दिखने लगा है. दिल्ली ने बिजली की खपत के मामले में बुधवार दोपहर को उस वक्त एक नया इतिहास रच दिया, जब शहर में बिजली की मांग (Peak Power Demand) 8,000 मेगावाट के जादुई आंकड़े को पार कर गई. मौसम वैज्ञानिकों और बिजली विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में यह चुनौती और गंभीर हो सकती है.

स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (SLDC) से मिले ताजा आंकड़ों के अनुसार, बुधवार दोपहर ठीक 3:35 बजे दिल्ली की पीक पावर डिमांड 8,039 मेगावाट (MW) दर्ज की गई. यह साल 2026 में अब तक की सबसे अधिक मांग है. बिजली की मांग में इस छलांग का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि इससे ठीक एक दिन पहले यानी मंगलवार दोपहर को यह मांग 7,777 मेगावाट थी, जो रात होते-होते बढ़कर 7,841 मेगावाट तक पहुंच गई थी. लगातार चढ़ते पारे के कारण एयर कंडीशनर (AC) और कूलरों का इस्तेमाल चौबीसों घंटे हो रहा है, जिससे बिजली नेटवर्क पर दबाव बढ़ता जा रहा है.

पिछले दो सालों के मुकाबले बेहद गर्म रहा मई

यदि हम बीते वर्षों के आंकड़ों से इसकी तुलना करें, तो समझ आता है कि इस साल स्थिति कितनी असाधारण है. 20 मई तक के इतिहास में इतनी बिजली कभी नहीं खपाई गई. साल 2024 में 20 मई तक सबसे अधिक 7,591 मेगावाट बिजली की मांग थी. वहीं, साल 2025 में 20 मई को यह आंकड़ा 7,533 मेगावाट था, लेकिन अब साल 2026 में बिजली की मांग ने सीधा 8,039 मेगावाट का स्तर छू लिया है. इस साल के मई महीने के शुरुआती 20 दिनों का विश्लेषण करें तो साफ है कि 2026 की गर्मी पिछले सालों पर भारी पड़ रही है. साल 2025 के मुकाबले इस साल 20 में से 15 दिन (यानी 75% दिन) बिजली की मांग ज्यादा रही. वहीं, 2024 की तुलना में इस साल 20 में से 13 दिन (65% दिन) दिल्ली वालों ने ज्यादा बिजली का इस्तेमाल किया.

अप्रैल में ही मिल गए थे खतरे के संकेत

इस साल बिजली संकट और भारी मांग की शुरुआत मई से नहीं, बल्कि अप्रैल के आखिरी हफ्ते में ही हो गई थी. बीते 27 अप्रैल 2026 को दोपहर 3:30 बजे दिल्ली की पीक आवर पावर डिमांड 7,078 मेगावाट पहुंच गई थी. दिल्ली के इतिहास में यह पहली बार था, जब अप्रैल के महीने में ही मांग ने 7,000 मेगावाट का स्तर पार किया हो. इसके विपरीत, साल 2024 और 2025 में 7,000 मेगावाट का यह आंकड़ा देखने के लिए मई के महीने तक का इंतजार करना पड़ा था.

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मौसम का मिजाज देखते हुए बिजली कंपनियों और एसएलडीसी (SLDC) ने आने वाले दिनों के लिए कमर कस ली है. अनुमान जताया जा रहा है कि जून के महीने में जब गर्मी अपने चरम पर होगी, तब बिजली की मांग सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ देगी. दिल्ली में अब तक की सबसे अधिक बिजली मांग (All Time High) साल 2025 में 8,656 मेगावाट दर्ज की गई थी. लेकिन इस बार विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली में पीक आवर में बिजली की अधिकतम मांग 9,000 मेगावाट के भी पार जा सकती है.

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