दिल्ली की सबसे बड़ी डिजिटल अरेस्ट ठगी: CBI के पास मामला, 23 करोड़ ठगने वालों का पूरा नेटवर्क खंगालेगी एजेंसी

Digital Arrest Scam Case: दिल्ली में एक बड़ा डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड मामला सामने आया है, जिसमें एक 78 साल के रिटायर्ड बैंकर से 22.92 करोड़ रुपये ठगे गए. ठगों ने खुद को पुलिस और सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर बुजुर्ग को झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी और पैसे ट्रांसफर करवाए.

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Delhi Cyber Fraud Case: देश की राजधानी दिल्ली में सामने आए अब तक के सबसे बड़े डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड (Digital Arrest Cyber Fraud) मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है. इस हाई-प्रोफाइल केस की जांच अब आधिकारिक तौर पर CBI को सौंप दी गई है. 78 साल के रिटायर्ड बैंकर से 22.92 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया था और साइबर सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुई थे.

जानकारी के मुताबिक, दक्षिण दिल्ली के गुलमोहर पार्क इलाके में रहने वाले बुजुर्ग को अगस्त 2025 में एक कॉल आया था, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी. कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई पुलिस (Mumbai Police Official) का अधिकारी बताते हुए दावा किया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) जैसे गंभीर अपराधों में हुआ है. शुरुआत में यह एक सामान्य पूछताछ जैसा लगा, लेकिन धीरे-धीरे ठगों ने उन्हें एक फर्जी जांच प्रक्रिया में उलझा दिया, जिसे डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) कहा जा रहा है.

घर से नहीं निकल पाया बुजुर्ग

इस दौरान ठगों ने खुद को पुलिस, ED और CBI के अधिकारी बताकर भरोसा कायम किया और बुजुर्ग को यह यकीन दिला दिया कि वे एक बड़े आपराधिक केस में फंस चुके हैं. उन्हें सख्त निर्देश दिए गए कि वे घर से बाहर न निकलें, किसी से बात न करें और हर समय वीडियो कॉल पर उपलब्ध रहें. लगातार निगरानी और डर के माहौल में पीड़ित मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गया और खुद को वास्तव में गिरफ्तार मान बैठा. इसी मनोवैज्ञानिक दबाव का फायदा उठाकर ठगों ने उनसे कई किश्तों में अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए.

करीब 23 करोड़ ठगे, कोई बड़ा नेटवर्ट होने का शक

करीब एक महीने तक चले इस पूरे ऑपरेशन में कुल 22.92 करोड़ रुपये की रकम ट्रांसफर करवाई गई. जांच में सामने आया है कि इस पैसे को कई अलग-अलग खातों में भेजकर उसे कई स्तरों पर घुमाया गया, ताकि उसका ट्रेल छिपाया जा सके. इसमें मनी म्यूल अकाउंट्स (Money Mule Accounts), फर्जी दस्तावेज और डिजिटल लेयरिंग का इस्तेमाल किया गया, जिससे यह साफ होता है कि यह कोई छोटा-मोटा गिरोह नहीं, बल्कि एक संगठित और प्रोफेशनल साइबर क्राइम नेटवर्क है.

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जब मामला जटिल हुआ तो सीबीआई को केस किाया ट्रांसफर

मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित को धीरे-धीरे एहसास हुआ कि उनके साथ ठगी हो चुकी है. इसके बाद उन्होंने 19 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल (Cyber Crime Portal) पर शिकायत दर्ज कराई. शुरुआती जांच दिल्ली पुलिस की स्पेशल यूनिट IFSO ने की, जिसमें करीब 12.11 करोड़ रुपये फ्रीज करने में सफलता भी मिली, लेकिन केस की जटिलता और इसके संभावित अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन को देखते हुए इसे आगे CBI को ट्रांसफर कर दिया गया.

विदेशी कनेक्शन और रकम ट्रांसफर नेटवर्क खंगाल रही CBI

CBI अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है, जिसमें फर्जी कॉल सेंटर, बैंक खातों की चेन, डिजिटल ट्रेल और संभावित विदेशी कनेक्शन की पड़ताल शामिल है. एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि इस गिरोह के तार किन-किन राज्यों और देशों तक जुड़े हुए हैं और क्या इसमें किसी अंदरूनी मदद या बैंकिंग सिस्टम की खामियों का फायदा उठाया गया.

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सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा मामला

यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है, जहां पीड़ित ने याचिका दायर कर बैंकों की जवाबदेही तय करने, ठगी की रकम वापस दिलाने और ऐसे साइबर अपराधों को रोकने के लिए सख्त गाइडलाइंस बनाने की मांग की है. कोर्ट ने इस पर केंद्र सरकार, RBI, CBI और संबंधित बैंकों को नोटिस जारी किया है, जिससे यह मामला और भी संवेदनशील हो गया है.

‘डिजिटल अरेस्ट दरअसल साइबर अपराध का एक नया और खतरनाक तरीका बन चुका है, जिसमें ठग खुद को पुलिस या सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देते हैं. वे वीडियो कॉल, फर्जी आईडी और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर भरोसा पैदा करते हैं और फिर जांच के नाम पर पैसे सुरक्षित खाते में ट्रांसफर करवा लेते हैं. खासतौर पर बुजुर्ग  इस तरह के फ्रॉड का आसान शिकार बनते हैं, क्योंकि वे डर और दबाव में जल्दी आ जाते हैं.

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