सूरत में पुलिस कस्टडी में मौत का सनसनीखेज मामला, 65 वर्षीय आरोपी ने थाने में फिनाइल पीकर दी जान

सूरत के सचिन पुलिस स्टेशन में पुलिस कस्टडी में रखे गए 65 वर्षीय आरोपी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. आरोप है कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने थाने के शौचालय में जाकर फिनाइल पी ली, जिसके बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

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कस्टडी में सुरक्षा पर सवाल
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  • सूरत के सचिन पुलिस स्टेशन में 65 वर्षीय आरोपी की फिनाइल पीने के बाद इलाज के दौरान मौत
  • आरोपी सैयद बदरुद्दीन मयुद्दिन को गोधरा से वाहन चोरी के मामले में पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन लाया गया था
  • फिनाइल पीने के बाद आरोपी को 3 अस्पतालों में भर्ती कराया गया, लेकिन गंभीर अंदरूनी क्षति के कारण उसकी मौत हो गई
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सूरत के सचिन पुलिस स्टेशन से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने पुलिस कस्टडी की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. यहां पुलिस हिरासत में रखे गए 65 वर्षीय आरोपी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. आरोप है कि आरोपी ने थाने के शौचालय में जाकर फिनाइल पी लिया, जिसके बाद उसकी हालत तेजी से बिगड़ती चली गई और इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया. इस घटना ने पुलिस कस्टडी में रखे गए आरोपियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं.

गोधरा से पूछताछ के लिए लाया गया था आरोपी

जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान सैयद बदरुद्दीन मयुद्दिन के रूप में हुई है. उसे गोधरा से वाहन चोरी के एक मामले में पूछताछ के लिए सचिन पुलिस स्टेशन लाया गया था. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरोपी ने बाथरूम जाने की अनुमति मांगी. नियम के तहत पुलिसकर्मी उसे बाथरूम तक लेकर गए, लेकिन वहीं पर एक ऐसा घटनाक्रम हुआ, जिसने इस मामले को बेहद गंभीर बना दिया.

शौचालय में रखी फिनाइल पीने का आरोप

बताया जा रहा है कि आरोपी ने बाथरूम में रखी फिनाइल की बोतल उठाई और उसे पी लिया. कुछ ही पलों बाद जब आरोपी बाहर निकला, तो उसने खुद पुलिसकर्मियों को बताया कि उसने फिनाइल पी ली है. यह जानकारी मिलते ही पुलिस विभाग में अफरा‑तफरी मच गई.

3 अस्पतालों में शिफ्ट, लेकिन नहीं बचाई जा सकी जान

पुलिस तुरंत आरोपी को नजदीकी अस्पताल लेकर गई, जहां डॉक्टरों ने उसकी हालत बेहद नाजुक बताई. प्राथमिक इलज मिलने के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल में रेफर किया गया. हालत लगातार बिगड़ने के चलते उसे एक के बाद एक कुल तीन अलग‑अलग अस्पतालों में शिफ्ट किया गया, लेकिन शरीर के अंदरूनी अंगों को हुए गंभीर नुकसान के कारण आखिरकार उसकी मौत हो गई.

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कैसे मिली फिनाइल, कस्टडी में सुरक्षा पर सवाल

इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सबसे बड़ा सवाल यही है कि पुलिस कस्टडी जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली जगह पर आरोपी को फिनाइल जैसा खतरनाक केमिकल कैसे मिल गया. क्या थाने में रखे गए ऐसे पदार्थों की निगरानी में लापरवाही बरती गई, या फिर सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन सही तरीके से नहीं हुआ. पुलिस हिरासत में किसी भी आरोपी की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की होती है.

परिजनों में आक्रोश, जांच की मांग

घटना के बाद मृतक के परिजनों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है. परिजनों का कहना है कि जब उनका व्यक्ति पुलिस हिरासत में था, तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की जिम्मेदारी थी. उनका आरोप है कि इस घटना को सिर्फ आत्महत्या मानकर नहीं छोड़ा जाना चाहिए, बल्कि पूरे मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके.

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पुलिस ने जांच के दिए आदेश, ड्यूटी पर तैनात कर्मियों की भूमिका पर नजर

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले को गंभीरता से लिया गया है और जांच के आदेश दे दिए गए हैं. यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपी को फिनाइल कैसे और किन परिस्थितियों में कहां से मिला. साथ ही, उस समय ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है. पुलिस का कहना है कि यदि जांच में किसी तरह की लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

पुलिस कस्टडी की सुरक्षा पर फिर खड़ा हुआ सवाल

यह घटना एक बार फिर इस सवाल को जन्म देती है कि क्या पुलिस कस्टडी वास्तव में सुरक्षित है. एक ऐसा व्यक्ति, जो पूरी तरह पुलिस की निगरानी में था, वह इस तरह अपनी जान लेने में कैसे सफल हो गया. अब यह सवाल सिर्फ सूरत तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही और विश्वसनीयता पर सीधा सवाल खड़ा करता है.

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