दिल्ली एयरपोर्ट पर 5 करोड़ का ड्रग्स जब्त... जानिए कैप्सूल और प्लास्टिक पैकेट निगलकर कैसे होती है तस्करी?

ड्रग्स तस्करी के इस तरीके को बॉडी पैकिंग कहा जाता है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल होने वाला एक बेहद जोखिमभरा तरीका है. इसमें तस्कर कोकीन, हेरोइन या MDMA जैसे नशीले पदार्थों को छोटे-छोटे कैप्सूल या प्लास्टिक पैकेट में पैक कर निगल लेते हैं.

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70 कैप्सूल बरामद
NDTV
नई दिल्ली:

दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग ने ड्रग्स तस्करी के चौंकाने वाले तरीके का खुलासा किया है. अधिकारियों ने 28 अक्टूबर को गिनी के एक नागरिक को पकड़ा, जो इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा के रास्ते कोनाक्री से दिल्ली पहुंचा था. संदेह होने पर उसे ग्रीन चैनल पर रोका गया और एक्स/-रे जांच की गई. आगे की जांच में मामला गंभीर पता चलने पर अदालत की अनुमति से यात्री को सफदरजंग अस्पताल में मेडिकल निगरानी में रखा गया.

शरीर से कुल 70 कैप्सूल बरामद

अस्पताल में दो चरणों में उसके शरीर से कुल 70 कैप्सूल बरामद किए गए. इन कैप्सूलों में सफेद पाउडर जैसा पदार्थ भरा हुआ था, जिसका कुल वजन 1 किलो 68 ग्राम बताया गया है. अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में इसकी कीमत करीब 5 करोड़ रुपये आंकी गई है. शुरुआती जांच में यह पदार्थ कोकीन या MDMA होने का संदेह है. कस्टम विभाग ने NDPS एक्ट के तहत नशीले पदार्थ को जब्त कर 29 अक्टूबर को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. उसके खिलाफ NDPS एक्ट की धारा 8, 21, 23 और 29 के तहत मामला दर्ज किया गया है. अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद आरोपी को तिहाड़ जेल भेजा जाएगा. फिलहाल मामले की जांच जारी है.


बॉडी पैकिंग ड्रग्स तस्करी क्या होता है? 

ड्रग्स तस्करी के इस तरीके को बॉडी पैकिंग कहा जाता है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल होने वाला एक बेहद जोखिमभरा तरीका है. इसमें तस्कर कोकीन, हेरोइन या MDMA जैसे नशीले पदार्थों को छोटे-छोटे कैप्सूल या प्लास्टिक पैकेट में पैक कर निगल लेते हैं. ये पैकेट पेट और आंतों के रास्ते शरीर के भीतर छिपे रहते हैं, जिससे सामान्य बैगेज जांच में ड्रग्स का पता लगाना मुश्किल हो जाता है.

निगले गए कैप्सूल पाचन तंत्र से गुजरते हुए आंतों तक पहुंचते हैं और बाद में शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया के जरिए बाहर निकलते हैं. यह प्रक्रिया कई घंटों से लेकर कई दिनों तक चल सकती है. ऐसे मामलों में संदिग्ध यात्रियों को अस्पताल में मेडिकल निगरानी में रखा जाता है. डॉक्टर एक्स-रे और अन्य जांचों की मदद से यह पता लगाते हैं कि शरीर में कितने कैप्सूल मौजूद हैं और वे किस हिस्से में हैं. सभी कैप्सूल सुरक्षित रूप से बाहर निकलने की पुष्टि होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जाती है.

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विशेषज्ञों के अनुसार, बॉडी पैकिंग ड्रग्स तस्करी का बेहद खतरनाक तरीका है. यदि शरीर के अंदर कोई कैप्सूल फट जाए या उसमें रिसाव हो जाए तो नशीला पदार्थ सीधे रक्त प्रवाह में पहुंच सकता है. विशेष रूप से कोकीन की अधिक मात्रा हार्ट अटैक, दौरे, ब्रेन हेमरेज और यहां तक कि मौत का कारण बन सकती है. इसके अलावा कैप्सूल आंतों में फंसने से गंभीर ब्लॉकेज भी हो सकता है. यही वजह है कि ऐसे मामलों में डॉक्टरों की लगातार निगरानी बेहद जरूरी होती है.

यह तस्करी जोखिम भरा

आमतौर पर इस तरह की तस्करी पड़ोसी या कम दूरी वाले देशों के बीच अधिक देखी जाती है. लेकिन कई मामलों में लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के जरिए भी तस्कर इसी तरीके का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि, लंबी यात्रा में यह तरीका और अधिक जोखिम भरा हो जाता है. कई बार आरोपी फ्लाइट के उतरते ही ऐसी चीजें खाने की कोशिश करते हैं, जिससे शरीर के अंदर छिपाए गए कैप्सूल जल्द से जल्द बाहर निकल सकें. इसलिए एयरपोर्ट पर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने वाली एजेंसियां ऐसे मामलों को बेहद गंभीरता से लेती हैं.

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