- CBI ने 13 फरवरी 2026 को तमिलनाडु के सेलम जिले से टेलीकॉम फ्रॉड के आरोपी रज्जाक को गिरफ्तार किया
- यह मामला 16 अक्टूबर 1995 में दर्ज हुआ था जिसमें दूरसंचार विभाग को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप था
- रज्जाक 2001 से फरार था औरविशेष अदालत ने उसे प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर घोषित कर स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया था
करीब 25 साल से फरार चल रहा टेलीकॉम फ्रॉड केस का एक घोषित अपराधी आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है. CBI ने 13 फरवरी 2026 को तमिलनाडु के सेलम जिले के जलगंडापुरम से पी.एम. अब्दुल रज्जाक को दबोच लिया. इस अपराधी की लंबे वक्त से तलाश जारी थी.
1995 में दर्ज हुआ था टेलीकॉम फ्रॉड का मामला
CBI के मुताबिक, यह मामला 16 अक्टूबर 1995 में दर्ज किया गया था. आरोप है कि उस समय दूरसंचार विभाग, भारत सरकार में तैनात डिविजनल मैनेजर मुकेश गुप्ता ने अब्दुल रज्जाक और अन्य लोगों के साथ मिलकर साजिश रची थी, जिससे विभाग को भारी आर्थिक नुकसान हुआ. 29 जून 1999 को अब्दुल रज्जाक समेत पांच आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी.
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2001 से फरार, कोर्ट ने घोषित किया था प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर
साल 2001 से ही अब्दुल रज्जाक ट्रायल से फरार हो गया था. इसके बाद अदालत ने उसे ‘प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर' घोषित कर दिया और 13 मार्च 2001 को भोपाल की विशेष अदालत ने उसके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया था.
CBI की विशेष टीम ने एक महीने की निगरानी में पकड़ा
CBI ने हाल ही में फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए एक विशेष टीम बनाई. करीब एक महीने तक तकनीकी निगरानी, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड की जांच और खुफिया जानकारी जुटाने के बाद टीम को पता चला कि आरोपी तमिलनाडु के सेलम में छिपकर रह रहा है. जांच में यह भी सामने आया कि वो जमानत मिलते ही गायब हो गया था और मध्य प्रदेश से अपने परिवार के साथ भागकर तमिलनाडु में बस गया था.
नाम बदलकर रह रहा था आरोपी
गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने अपना नाम बदलकर अब्दुरसाक रख लिया था. CBI ने आरोपी को गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर 14 फरवरी 2026 को भोपाल लाया, जहां उसे अदालत के सामने पेश किया गया.
ढाई दशक बाद गिरफ्तारी, CBI की बड़ी सफलता
करीब ढाई दशक बाद हुई इस गिरफ्तारी को CBI की बड़ी सफलता माना जा रहा है. अब मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी और आरोपी को कोर्ट में ट्रायल का सामना करना होगा.














