आखिर दो हफ्ते के इंतजार के बाद वैभव सूर्यवंशी को टीम इंडिया के प्लेइंग XI में जगह मिल ही गई. इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में उन्हें टीम इंडिया के लिए डेब्यू कैप दे दिया गया. और आते ही उन्होंने सबसे पहले सचिन तेंदुलकर के भारत के सबसे युवा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर होने का रिकॉर्ड तोड़ दिया. सचिन ने 16 साल और 205 दिन की उम्र में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पाकिस्तान के खिलाफ खेला था. वैभव सूर्यवंशी ने 15 साल और 99 दिन की उम्र में यह रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है. लेकिन इस मैच में उतरते के साथ ही वैभव एक ऐसे अद्भुत रिकॉर्ड बुक से भी जुड़ गए जिससे वो ताउम्र जुड़े रहेंगे.
हालांकि वैभव ने अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय पारी में महज 14 रन बनाए लेकिन उन्होंने इस छोटी सी पारी के दौरान अपने चिर परिचित अंदाज में इंग्लैंड के दोनों गेंदबाजों की गेंदों पर छक्का जमाया.
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क्या वैभव दुनिया के सबसे युवा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर नहीं हैं?
चलिए ये बता दूं कि वैभव उस रिकॉर्ड बुक से भी जुड़े हैं जो सबसे युवा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों की है. बेशक वैभव सबसे युवा अंतरराष्ट्रीय भारतीय क्रिकेटर बनने का रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं पर वो दुनिया के सबसे युवा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बने हैं या नहीं इस पर संदेह है. यह रिकॉर्ड पाकिस्तान के हसन रजा के नाम पर है. महज 14 साल 227 दिन की उम्र हसन रजा ने 1996 में जिम्बाब्वे के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया था.
हालांकि बाद में उनके उम्र पर संदेह होने के कारण पाकिस्तान ने यह दावा वापस ले लिया. उनकी वास्तविक उम्र तो तब सामने नहीं आई पर उन्हें 15 साल के आसपास बताया गया.
फिर 2001 में बांग्लादेश की टीम में जब मोहम्मद शरीफ ने डेब्यू किया तो उनकी उम्र 15 साल 116 दिन थी. नैशनल लीग में शानदार प्रदर्शन करके वो टीम में पहुंचे पर छोटे से करियर में कुछ खास नहीं कर सके. बाद में इंजरी ने उन्हें टीम से बाहर रखा, तो फिर उनके प्रदर्शन में भी गिरावट आ गई.
इस लिहाज से मैनेचेस्टर के क्रिकेट ग्राउंड पर 15 साल और 99 दिन में डेब्यू करने वाले वैभव टी20 में सबसे युवा, इंग्लैंड की धरती पर सबसे युवा और सबसे युवा भारतीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर तो बन ही गए हैं.
सचिन तेंदुलकर
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सचिन और वॉर्न का वो अद्भुत रिकॉर्ड बुक
अब बात उस अद्भुत रिकॉर्ड बुक की जिसमें सचिन तेंदुलकर और शेन वॉर्न जैसे दिग्गज क्रिकेटरों के साथ वैभव का नाम जुड़ा है. यह रिकॉर्ड है मैनेचेस्टर के इस ओल्ड ट्रैफर्ड के मैदान पर अद्भुत रिकॉर्ड बनाने का.
इस मामले में सबसे पहला नाम आता है सचिन तेंदुलकर का. सबसे अधिक शतक जमाने वाले इस सर्वकालिक महान बल्लेबाज के बल्ले से उनके करियर का पहला शतक इसी मैदान पर आया था. 9 अगस्त 1990 को सचिन यहां टेस्ट की दूसरी पारी में नाबाद 119 रन बनाए थे, उन्होंने पहली पारी में भी 68 रन जमाए थे. ड्रॉ रहे उस टेस्ट में सचिन पहली बार 'प्लेयर ऑफ द मैच' भी चुने गए थे. तो यह कारनामा तो अद्भुत नहीं था पर हां यह उस अद्भुत क्रिकेटर के बल्ले की नुमाइश का वो गवाह था जिसने उसे बाद में क्रिकेट के भगवान का दर्जा दिया.
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बॉल ऑफ द सेंचुरी
इसी मैदान पर 04 जून 1993 को खेले गए टेस्ट मैच में महान लेग स्पिनर शेन वॉर्न ने इंग्लिश बल्लेबाज माइक गेटिंग को एक ऐसी अद्भुत गेंद डाली थी जिसे बॉल ऑफ द सेंचुरी का नाम दिया गया. क्रिकेट के इतिहास में ऐसी गेंद नहीं देखी गई थी.
तब वॉर्न ने एक अपनी उंगलियों और कलाई का लाजवाब इस्तेमाल करते हुए एक ऐसी जबरदस्त लेग-ब्रेक डिलीवरी डाली थी कि गेंद हवा में थोड़ा ड्रिफ्ट होते हए लेग स्टंप के बाहर टप्पा खाई. बेहद अनुभवी गेटिंग को लगा कि गेंद इतनी बाहर है तो वो उनके पैरों के बगल से विकेट के पीछे की ओर विकेटकीपर के हाथों में जाएगी. लिहाजा गेटिंग ने उसे अपने पैड के पास से पीछे जाने दिया. लेकिन अगले ही पर गेटिंग, वॉर्न और पूरी ऑस्ट्रेलियाई टीम के साथ-साथ अंपायर डिकी बर्ड का चेहरा देखने लायक था. सभी आश्चर्य और पशोपेश में थे.
दरअसल, लेग स्टंप के काफी बाहर जाकर टप्पा खाने के बाद भी वो गेंद गेटिंग के पैरों के पीछे से होती हुई उनके ऑफ स्टंप से जा लगी. इस जादुई गेंद को बॉल ऑफ सेंचुरी का नाम दिया गया और इस एक गेंद ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लेग स्पिन गेंदबाजी को पुनर्जीवित कर दिया.
अब इस मैदान पर वैभव सूर्यवंशी ने डेब्यू किया है, जो अब तक के अपने प्रदर्शन से पूरे क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बने हुए हैं जिस तरह सचिन तेंदुलकर और शेन वॉर्न जैसे दिग्गज रहे हैं. और इस उम्मीद के साथ कि वैभव इन दो महान क्रिकेटरों की तरह ही बड़ी-बड़ी पारियां खेलेंगे और बड़े-बड़े रिकॉर्ड अपने नाम करेंगे... उन्हें दूसरे टी20 मैच में कमेंट्री कर रहे पूर्व क्रिकेटर रवि शास्त्री इस अद्भुत रिकॉर्ड बुक से जोड़ रहे हैं.