PSL 2026: टी20 वर्ल्ड कप 2026 के चलते इस साल पाकिस्तान सुपर लीग का आयोजन मार्च और अप्रैल के महीने में हो रहा है. लेकिन लीग की शुरुआत से पहले ही उस पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. एक चरमपंथी संगठन ने विदेशी खिलाड़ियों को लीग में हिस्सा नहीं लेने की चेतावनी की है. दूसरी तरफ पीसीबी चेयरमैन मोहसिन नकवी पहले ही साफ कर चुके हैं कि लीग इस बार बंद दरवाजों के पीछे होगी और सिर्फ दो शहरों में इसका आयोजन किया जाएगा. मिडिल ईस्ट में जारी जंग के चलते एशियाई देश तेल के संकट से जूझ रहे हैं, ऐसे में पाकिस्तानी सरकार ने इससे बचने के लिए लोगों से कम से कम निकलने को कहा है. नकवी ने तर्क दिया कि बंद दरवाजों के पीछे पीएसएल मैचों के करवाने का फैसला, इसी के चलते लिया गया है, लेकिन इस बात को नजरअंदाज करना मुश्किल है कि कुछ दिनों पहले ही अफगानिस्तान-पाकिस्तान जंग के बीच ऑस्ट्रेलियाई बोर्ड ने खिलाड़ियों को कथित तौर पर पेशावर ना जाने की सलाह दी थी.
PSL को लेकर हंगामा क्यों है बरपा?
फैंस को नो एंट्री, सिर्फ कराची-लाहौर में होंगे मैच
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने रविवार को कहा कि पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) का 11वां संस्करण लाहौर और कराची में बिना दर्शकों के आयोजित किया जाएगा और कोई ओपनिंग सेरेमनी भी नहीं होगी. 26 मार्च से शुरू होने वाले इस टूर्नामेंट में आठ टीमें हिस्सा ले रही हैं. शुरुआत में इसे छह शहरों - लाहौर, कराची, रावलपिंडी, मुल्तान, पेशावर और फैसलाबाद में मुकाबले खेले जाने थे. हालांकि, रविवार को लाहौर में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, पीसीबी अध्यक्ष ने कहा कि बोर्ड ने सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के साथ सलाह लेने के बाद फैसला किया है कि टूर्नामेंट "निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ेगा, लेकिन कुछ कठिन निर्णय लेने होंगे."
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच युद्ध के चलते वैश्विक तेल संकट के मद्देनजर पाकिस्तान ने कई फैसले लिए हैं. जिसमें वर्क फ्रोम होम लागू करना और सप्ताह में चार दिन काम करना शामिल है. सरकार ने लोगों से कम से कम निकलने की अपील की है. पीसीबी अध्यक्ष ने रविवार को कहा,"एक तरफ, 25,000 से 30,000 लोग स्टेडियमों में इकट्ठा होंगे और दूसरी तरफ, हम लोगों को अपने आंदोलन को प्रतिबंधित करने के लिए कह रहे हैं, इसलिए जब तक यह संकट समाप्त नहीं हो जाता, हम स्टेडियमों में फैंस की अनुमति नहीं देंगे."
तेल संकट बहाना, तालिबान का डर?
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसे हालात है. बीते दिनों पाकिस्तान ने काबूल के एक अस्पताल पर एयरस्ट्राइक की थी, जिसमें 400 से अधिक लोगों की जान गई थी. इस हमले के बाद ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने दावा किया था कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने अपने देश के खिलाड़ियों को पेशावर नहीं जाने के लिए कहा था. ईद के चलते पाकिस्तान और अफगानिस्तान में अभी सीजफायर है. आशंका जताई जा रही है अफगानिस्तान, पाकिस्तान पर स्ट्राइक कर सकता है. ऐसे में सवाल होता है कि क्या तेल का बहाना देकर अफगानिस्तान के हमले के डर के चलते, खिलाड़ियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, पीएसएल को बंद दरवाजों के पीछे करवाया जा रहा है?
खिलाड़ियों ने उठाई सैलरी बढ़ाने की मांग
ब्लेसिंग मुजरबानी और दासुन शनाका ने पीएसएल का साथ छोड़ आईपीएल को चुना है. न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सोमवार को दावा किया कि पीसीबी न केवल खिलाड़ियों द्वारा अनुबंधों के उल्लंघन से जूझ रहा है, बल्कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से उत्पन्न परिस्थितियों के कारण कुछ खिलाड़ियों द्वारा अंतिम समय में फीस बढ़ाने की मांग से भी परेशान है. सूत्र ने स्वीकार किया कि दोनों लीगों के बीच वित्तीय असमानता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. कई खिलाड़ी चोट से जूझ रहे आईपीएल में काफी अधिक वेतन पैकेज दिए जा रहे हैं, जबकि पीएसएल फ्रेंचाइजी उन वेतन पैकेजों का मुकाबला करने के लिए संघर्ष कर रही हैं.
चरमपंथी संगठन ने दी विदेशी खिलाड़ियों को धमकी
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़े जमात-उल-अहरार ने अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों को सीधे धमकी दी है जिसके बाद टूर्नामेंट पर सवाल खड़े हो गए हैं. जमात-उल-अहरार ने डेविड वॉर्नर, स्टीव स्मिथ और डैरिल मिचेल जैसे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को चेतावनी दी है कि वे PSL खेलने के लिए पाकिस्तान न आएं.
आतंकी संगठन ने कहा कि खिलाड़ी 'तुरंत टूर्नामेंट से हट जाएं' क्योंकि उनकी सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जा सकती. जमात-उल-अहरार के एक कमांडर ने 'द संडे गार्डियन' से कहा,"हम इससे जुड़े सभी क्रिकेट बोर्डों को सलाह देना चाहते हैं कि वे अपने खिलाड़ियों को पाकिस्तान न भेजें. अगर उनके साथ कुछ होता है, तो इसकी जिम्मेदारी हमारी नहीं होगी. हमने पहले ही चेतावनी दे दी है." कमांडर ने कहा,"हम अपनी पूरी ताकत लगाएँगे लेकिन मैच नहीं होने देंगे. हम हर संभव कोशिश करेंगे कि टूर्नामेंट बाधित हो और खिलाड़ी मैदान पर उतर ही न सकें."
तहरीक-ए तालिबान पाकिस्तान, एक आतंकवादी संगठन है. टीटीपी का लक्ष्य खैबर पख्तूनवा प्रांत में पाकिस्तानी सरकार का नियंत्रण खत्म करना और शरिया कानून लागू करना है. टीटीपी और अल-कायदा वैचारिक तौर पर एक माने जाते हैं. टीटीपी ने पाकिस्तानी में कई आतंकी हमले किए हैं, जिसमें निर्दोष लोगों की जान गई है.
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