कर्नाटक के हुब्ली में डीआर बेन्ड्रे क्रिकेट स्टेडियम में जब 8 बार की चैंपियन मेज़बान और पहली बार फ़ाइनल खेलने जम्मू कश्मीर की टीमें मैदान पर आईं तो ज़ाहिर तौर पर कर्नाटक मज़बूत दावेदार मानी जा रही थी. कर्नाटक की टीम टीम इंडिया में खेलने वाले कई दिग्गज- केएल राहुल, प्रसिद्ध कृष्णा, मयंक अग्रवाल, करुण नायर और देवदत्त पडिक्कल (कप्तान)- जैसे खिलाड़ियों से लैस दिखी. मगर जम्मू कश्मीर की टीम ने अपना फॉर्मूला सिंपल रखा. पूरे टूर्नामेंट में इस टीम ने ना तो स्टार कल्चर पर भरोसा किया ना ही उसके दवाब में आए.
स्टार खिलाड़ी पर ज़ोर नहीं
जम्मू कश्मीर ने इस साल 2026 में अपने रणजी सफर की शुरुआती मैच में कप्तान पारस डोगरा ने शानदार शतकीय पारी (144 रन) खेलकर मुंबई को कड़ी टक्कर दी थी. मुंबई के ख़िलाफ़ दूसरी पारी में कामरान इक़बाल लोन ने अर्द्धशतकीय पारी खेली थी जिन्होंने फ़ाइनल की आख़िरी पारी में शतक लगाकर मुंबई के हार की भरपाई कर दी.
जम्मू कश्मीर के कोच पूर्व भारतीय क्रिकेटर अजय शर्मा ने दिल्ली के ख़िलाफ़ जीत के बाद कहा था,"हमारे यहां 25-30 बेहद कमिटेड खिलाड़ियों का कोर ग्रुप है. कोई स्टार कल्चर नहीं है. सभी जीतोड़ मेहनतक करते हैं. जो खिलाड़ी मैच के लिए सबसे फिट होता है हम उन्हें ही मौक़ा देते हैं."
कोच अजय शर्मा- कृष्ण कुमार का जलवा
जम्मू कश्मीर टीम के कोच अजय शर्मा और गेंदबाज़ी कोच कृष्ण कुमार का इस जीत में बेहद अहम रोल रहा. रणजी मैचों में 68 के औसत से 38 शतक और 36 अर्द्धशतक लगानेवाले अजय शर्मा को शुरुआत में जम्मू कश्मीर में टीम में सेटल होने के लिए अच्छी-खासी मशक्तत करनी पड़ी. मौजूदा बीसीसीआई के अध्यक्ष मिथुन मिन्हास के साथ अजय टीम के साथ तालमेल बनाने में कामयाब रहे और पूरे टूर्नामेंट में इसका असर भी दिखा.
राजस्थान के रहने वाले कृष्ण कुमार ने टीम की पेस यूनिट को बखूबी तैयार किया. उनके इंजरी मैनेजमेंट से लेकर मैचों में हर विकेट पर अप्रोच तैयार करने में अहम भूमिका निभाई. करीब 20 साल की कोचिंग का अनुभव उनकी टीम के बेहद काम आया और जम्मू कश्मीर टीम के 29 साल के पेसर आकिब नबी रणजी सीज़न में सबसे ज़्यादा 60+ विकेट लेनेवाले गेंदबाज़ बने हैं.
बड़ी टीमों को हराने का हौसला
कर्नाटक के ख़िलाफ़ फ़ाइनल खेलते वक्त जम्मू कश्मीर की टीम में कोई टीम इंडिया का ख़िलाड़ी नहीं था. जबकि, कर्नाटक की टीम में केएल राहुल और प्रसिद्ध कृष्णा से लेकर मयंक अग्रवाल, देवदत्त पडिक्कल और करुण नायर जैसे बड़े नाम थे.
सेमीफ़ाइनल में बंगाल और उससे पहले दिल्ली, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसी टीमों को हराने वाली ये टीम कभी बड़े नामों के दबाव में नहीं आई. मुंबई जैसी टीम को भी इसने कड़ी टक्कर देकर डरा दिया था.
बैटर ने मैच जिताया, बॉलर्स ने टूर्नामेंट
पूरे टूर्नामेंट में जम्मू कश्मीर के बल्लेबाज़ और गेंदबाज़ों ने एक सॉलिड यूनिट की तरह प्रदर्शन किया. फ़ाइनल तक जम्मू कश्मीर की टीम की ओर से बैटर्स ने 9 मैचों में 10 शतक और 22 अर्द्धशतकीय पारियां खेलीं. बड़ी बात ये है कि इनमें 11 खिलाड़ियों का योगदान रहा. कप्तान पारस डोगरा, शुभम पुंडीर, कामरान इक़बाल ने टूर्नामेंट में 2-2 शतक लगाए.
बॉलिंग कोच कोच कृष्ण कुमार की अगुआई में जम्मू कश्मीर के पेसर्स खूब चमके. आकिब नबी ने 10 मैचों में टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा 60 प्लस विकेट झटके. एक्सपर्ट्स के मुताबिक वो जल्दी ही टीम इंडिया की ब्लू जर्सी में दिखेंगे. इस 10 मैचों में उन्होंने मैच में 7 बार पांच विकेट और 2 बार 10 विकेट लेने का भी कारनामा किया.
टीम के 28 साल के बांये हाथ के पेसर सुनील कुमार टूर्नामेंट की फ़ाइनल पारी से पहले 9 मैचों में 31 विकेट अपने नाम किये. दांये हाथ के 28 साल के पेसर युद्धवीर सिंह ने 21 और 29 साल के बांये हाथ के स्पिनर आबिद मुश्ताक ने 20 विकेट झटके.
बड़े मैचों में खिलाड़ियों ने ली ज़िम्मेदारी
टॉप ऑर्डर बैटर शुभम सिंह पुंडीर और ओपनर कामरान इक़बाल में फ़ाइनल में शतक लगाकर कर्नाटक जैसी 8 बार की चैंपियन के लिए जीत की राह तलाशने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ा. टीम के टॉप ऑर्डर से लेकर लोअर ऑर्डर तक बैटिंग-बॉलिंग की ज़िम्मेदारी लेते रहे. यहां तक कि कामरान इक़बाल ने भी विकेट हासिल किया, लोअर ऑर्डर के बॉलर्स ने भी अर्द्धशतकीय पारियां खेलीं और चैंपियन टीम को ख़िताबी सफ़र करवाकर इतिहास बना दिया.
जम्मू कश्मीर का ख़िताबी सफ़र
- फ़ाइनल- कर्नाटक को हराकर जम्मू कश्मीर ने रचा इतिहास
- सेमीफ़ाइनल- प.बंगाल को 6 विकेट से हराया
- सातवां मैच- मध्य प्रदेश को 56 रनों से हराया
- छठा मैच- पुडुच्चेरी के साथ मैच ड्रॉ
- पांचवां मैच- हैदराबाद को 281 रनों से हराया
- चौथा मैच- दिल्ली को 7 विकेट से हराया
- तीसरा मैच- छत्तीसगढ़ के साथ मैच ड्रॉ रहा
- दूसरा मैच- राजस्थान को पारी और 41 रनों से हराया
- पहला मैच- मुंबई ने जम्मू कश्मीर को 45 रनों से हराया
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