IPL 2026: पिछले साल आया था 'नई गेंद' का नियम, दिखा यह असर, इस साल प्रभाव और बड़ा होगा

Indian Premier League: मंगलवार को कई बड़ी बातें खटित हुईं. और इसी बीच एक 'नई गेंद' का नियम भी चर्चा का विषय बन गया

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India Premier League:

इसी महीने की 28 तारीख से शुरू होने जा रहे इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2026) से कुछ दिन पहले ही मंगलवार को कई बड़ी घटनाएं हुईं. मेगा टूर्नामेंट के इतिहास की दो बड़ी टीम हजारों करोड़ों रुपयों में बिक गईं, तो वहीं BCCI ने शुरू होने वाले सीजन के लिए खिलाड़ियों के लिए नया एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर) जारी कर दिया. इसी बीच, बहुत देर तक सोशल मीडिया पर पिछले साल  टूर्नामेंट में लागू किया गया नियम ही ट्रेंड करता रहा. इस नियम के तहत दूसरी पारी में फील्डिंग करने वाला कप्तान 'नई गेंद' (जो पुरानी ही होती है)  दस ओवर बाद ले सकता है. मतलब यह वैकल्पिक है. कप्तान चाहे तो गेंद ले या न ले, यह पूरी तरह उस पर निर्भर करता है. इसको लेकर भी फैंस चर्चा करते रहे. . चलिए आप डिटेल से इस नियम के बारे में जानें कि यह नियम क्यों बनाया गया. पिछले यानी साल 2025 के संस्करण में इस नियम का क्या असर देखने को मिला. और इस साल इस नियम के क्या-क्या संभावित असर देखने को मिल सकते हैं. 

इन 4 बड़ी वजहों से लाया गया यह नियम 

ओस का प्रभाव कम करना: रात के मैचों में भारी ओस के कारण गेंद गीली और फिसलन भरी हो जाती है. इसके कारण गेंदबाजों के लिए गेंद पर पकड़ बनाना बहुत ही मुश्किल हो जाता है. ऐसे में दूसरी पाली में फील्डिंग करने वाली टीम को कहीं ज्यादा मुश्किलें आती हैं. ऐसे में सभी टीमों के प्रबंधन के अनुरोध के बाद  फील्डिंग करने वाले कप्तान को यह विकल्प प्रदान किया गया. साथ ही, यह कप्तान की इच्छा पर है कि वह दस ओवर बाद नई गेंद ले या न ले. 

खेल में संतुलन स्थापित करना: अब जब दूसरी पाली में ओस पड़ती है, तो इसका पूरा-पूरा फायदा बल्लेबाजी करने वाली टीम को मिलता है. ओस पड़ने की सूरत में न तो गेंद स्पिन ही होती है और जब पेसर यॉर्कर फेंकने जाते हैं, तो गेंद फुलटॉस या वाइड में तब्दील हो जाती है. फिर स्विंग की तो आप बात ही छोड़ दीजिए. ऐसे में खेल में संतुलन स्थापित करने के तहत इस नियम को बनाने के पीछे यह एक और बड़ी वजह रही. 

स्पिनरों की मदद: यह नियम स्पिनरों के लिए गेम-चेंजर है. पारी के 11वें ओवर से सूखी गेंद मिलने पर वे गेंद को बेहतर तरीके से टर्न करा सकते हैं और अपनी विविधताओं का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसकी वजह यह है कि यह गेंद पूरी तरह से नई नहीं होती. यह पहली गेंद के समान होती है, लेकिन सूखी हुई होती है. ऐसे में यह बदलाव के रूप में आई गेंद स्पिनर के लिए बहुत ही कारगर होती है. ऐस में स्पिनरों पर निर्भर रहने वाला कप्तान इसका अच्छा इस्तेमाल कर सकता है. 

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टॉस की अहमियत घटाना: इस नियम से पहले कप्तान टॉस जीतने के बाद क्या करना है,  पहले से ही मन बना लेते थे. मतलब टॉस जीतो और पहले बॉलिंग करो. वे बाद में गीली गेंद के साथ बॉलिंग नहीं ही करना चाहते थे, लेकिन इस नियम के अस्तित्व में आने के बाद टॉस का दबदबा या उसकी अहमियत न के बराबर हो गई. 

नियम की खास बातें

अनिवार्य बदलाव: नियम के तहत पारी के 11वें से 20वें ओवर के बीच गेंद बदलने की पहली रिक्वेस्ट अंपायर को माननी ही होगी. फिर भले ही मैदान पर ओस दिख रही हो या नहीं. वैसे फील्डिंग करने वाला कप्तान मांग ओवर खत्म होने पर ही कर सकता है, ओवर के बीच में नहीं.

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समान स्थिति वाली गेंद: बदली गई गेंद बिल्कुल नई नहीं होती, बल्कि वह उतनी ही पुरानी और घिसी हुई, लेकिन सूखी होती है जितनी कि मूल गेंद थी. और यह नियम केवल शाम के मैचों में लागू होता है, दोपहर के मैचों में नहीं.

पिछले साल (IPL 2025) में नियम का असर

पिछले साल आए इस नियम का असर यह हुआ कि तुलनात्मक रूप से गेंदबाजों को कम नुकसान हुआ. स्पिनरों को 11वें ओवर के बाद सूखी गेंद मिलने पर बेहतर ग्रिप मिली, तो घुमाव भी बढ़िया हो गया. वहीं, इस  नियम ने टॉस की अहमियत भी घटा दी. और सबसे अच्छा असर यह देखने को मिला कि आखिरी ओवरों में गेंदबाजों को बेहतर पकड़ मिली, तो उन्होंने उम्दा बॉलिंग की. 

साल 2026  में दिखेगा यह असर

रणनीतिक उपयोग: इस बार कप्तान अब यह तय करेंगे कि वे 11वें ओवर में ही गेंद बदलवाना चाहते हैं या ओस के बढ़ने का इंतजार कर 15वें-16वें ओवर में इसका उपयोग करेंगे. मतलब अब फील्डिंग करने वाले कप्तान के पास एक तरह से दो विकल्प रहेंगे. और अब यह कप्तान के ऊपर निर्भर करेगा कि वह इस गेंद का इस्तेमाल कितनी चालाकी से करता है. 

बदली गई गेंद की स्थिति: इस साल अंपायर यह सुनिश्चित करेंगे कि बदली गई गेंद बिल्कुल नई न होकर 'समान घिसावट वाली लेकिन सूखी हो, ताकि बल्लेबाजों को अचानक बहुत तेज या सख्त गेंद का सामना न करना पड़े और खेल निष्पक्ष बना रहे.

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स्पिन-फ्रेंडली वेन्यू पर फायदा: भारत के कई मैदान स्पिन फ्रेंडली हैं. इसमें चेन्नई का चेपक और लखनऊ का इकाना स्टेडियम है. यहां स्पिन खासी भूमिका निभाते हैं. ऐसे में दस  ओवर के बाद 'नई गेंद' का आना  परिणाम के लिहाज से बड़ा समीकरण बदलने में अहम रोल निभाएगा. 

 

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