Harmeet Singh Story: शनिवार को टीम इंडिया का शुरू हुए टी20 विश्व कप (T20 World Cup 2026) में आगाज उसके चाहने वालों के लिए आंख खोल देने वाला रहा. यह सही है कि कप्तान सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) ने कोटा खत्म होने पर भारत को 161 का स्कोर दिला दिया. लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि हाल ही में न्यूजीलैंड के खिलाफ रिकॉर्डों की बरसात करने वाली टीम इंडिया 77 रन पर 6 विकेट गंवा देगी. और वह भी एसोसिएट्स यूएसए (India vs USA) के खिलाफ. और अगर ऐसा हुआ, तो इसके पीछे यूएसए टीम का जबर्दस्त होमवर्क दिखाई पड़ा. निश्चित रूप से इसके पीछे एक ओवर में तीन सहित कुल चार विकेट लेने वाले शैडले वॉन शाल्कविक तो जिम्मेदार रहे ही, तो वहीं भारतीय मूल के और 34वें साल में चल रहे वह लेफ्ट-आर्म स्पिनर हरमीत सिंह भी जिम्मेदार रहे, जिन्हें कभी अगला बिशन सिंह बेदी करार दिया गया था. उस हरमीत ने शिवम दुबे और अक्षर पटेल के अहम विकेट चटकाए, जिनकी कहानी एकदम फिल्मी है.
जब दिलीप सरदेसाई ने की बिशन सिंह बेदी से तुलना
स्थिर सिर के साथ गेंदबाज़ी करते हुए, लूप (ऊँची और घूमती हुई) एक्शन से लैस और गेंद को फ्लाइट कराने का बड़ा जज़्बा रखने वाले हरमीत सिंह ने शुरुआत से ही मुंबई में बहुत ही कम उम्र में कोचों और दिग्गजों खिलाड़ियों का ध्यान आकर्षित किया. पूर्व भारतीय दिग्गज दिलीप सरदेसाई ने मुंबई के इस युवा खिलाड़ी को पहली बार खेलते हुए देखने पर उनकी तुलना अपने समकालीन और स्पिन के महान खिलाड़ी बिशन सिंह बेदी से की थी.
भारत के लिए दो अंडर-19 विश्व कप
यह सरदार सिर्फ 19 वर्ष की उम्र में ही दो अंडर-19 विश्व कप खेल चुका था. साल 2010 में अपने पहले प्रयास में वे इतने महंगे साबित हुए कि टीम प्रबंधन उन्हें नियमित रूप से टीम में नहीं रख सका. हालांकि, दो साल बाद काबिलियत साबित करने के लिए भूखे और दृढ़ संकल्पित हरमीत ने शानदार वापसी की. बीमारी के कारण कुछ मैच मिस करने के बावजूद उनका इकॉनमी रेट 3.02 रहा, जो टूर्नामेंट में सर्वश्रेष्ठ में से एक था. सबसे अहम बात यह रही कि भारत के खिताब जीतने में वे टीम के प्रमुख स्तंभों में से एक थे.
मुंबई अंडर-16, 19 की कप्तानी
नौ साल की उम्र में शिवाजी पार्क जिमखाना द्वारा खोजे गए हरमीत को पूर्व मुंबई के बाएं हाथ के स्पिनर पद्माकर शिवालकर और पूर्व भारतीय बल्लेबाज़ एवं मुंबई के पूर्व कोच प्रवीण आमरे जैसे दिग्गजों ने प्रशिक्षण दिया. 16 साल की उम्र में वे रामाकांत आचरेकर स्कॉलरशिप के पहले प्राप्तकर्ता भी बने. हरमीत ने अंडर-16 और अंडर-19 स्तर पर मुंबई की कप्तानी की.
शानदार रणजी ट्रॉफी आगाज
इसके बाद उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में शानदार पदार्पण किया, जब उन्होंने हिमाचल प्रदेश के खिलाफ मुंबई की आसान जीत में सात विकेटों का मैच हॉल लिया. उनका पहला पाँच विकेट हॉल 2010-11 सत्र में अपने तीसरे मैच में तमिलनाडु के खिलाफ आया. हैरानी की बात यह रही कि अगले सत्र में उन्हें नज़रअंदाज़ कर दिया गया.
..जब लगे फिक्सिंग के आरोप
हरमीत के करियर में साल 2013 में ऐसा समय आया, जब आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग विवाद सामने आने के बाद एक सट्टेबाज़ ने आरोप लगाया था कि उसने हरमीत को इसमें शामिल करने की कोशिश की थी. लेकिन खिलाड़ी के बहुत कम उम्र के होने के कारण कोई सौदा नहीं हो सका. इसके बाद बीसीसीआई ने हरमीत की जांच की, लेकिन उन्हें किसी भी तरह के गलत काम से पूरी तरह निर्दोष पाया गया. हरमीत बेगुनाह तो पाए गए, लेकिन यहां से वह मंबई के सेलेक्टरों की नजरों से दूर होते हुए एकदम गुमनामी में चले गए.
...और भारत में खत्म हुआ करियर
कभी बेदी करार दिए गए एक बच्चे का क्रिकेटर करियर रहस्यमी अंदाज में आगे बढ़ने से पहले ही खत्म हो गया. फिर हरमीत अमेरिका चले गए. वहां इस लेफ्टी स्पिनर ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए देश की टीम में जगह बनाई. साल 2024 टी20 विश्व कप खेला. अब एक बार फिर से वह मेगा इवेंट का हिस्सा हैं. और दुनिया भर के युवाओं को संदेश दे रहे हैं कि जिंदगी में कितने भी उतार-चढ़ाव आएं, लेकिन कभी अपना हौसला मत मरने दीजिए.
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