बुधवार को शुरू हुए टीम इंडिया के ड्रेस रिहर्सल रूपी पांच टी20 मैचो की सीरीज के पहले मुकाबले में भारत ने न्यूजीलैंड को अगर 48 रन से रौंद कर सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल की, तो उसके पीछे सबसे बड़ी वजह आतिशी अभिषेक शर्मा की 84 रन की पारी पारी रही, जिसे उन्होंने कुल मिलाकर 5 चौकों और 8 छक्कों से सजाया. पूरे मैच के दौरान अभिषेक के एक से बढ़कर एक छक्के चर्चा का विषय बन और मैच के बाद जब प्रेजेंटर ने एक के बाद एक छक्के से जुड़ी काबिलियत को डिकोड किया, तो उन्होंने अपने छक्कों की फिलॉस्फी को बयां कर दिया.
ज्यादा छक्के लगाने की वजह
ज्यादा छक्कों से बाते करके सवाल पर अभिषेक ने कहा, 'मुझे लगता है कि चीज़ जो मैंने समझी है कि अगर आपको हर गेंद को सही तरीके से हिट करना है. अगर आपको 200 के स्ट्राइक रेट से खेलना है या ऐसा कुछ, तो आपके अंदर वही इंटेंट होना चाहिए और उसके लिए आपको काफी प्रैक्टिस करनी पड़ती है क्योंकि अगर आप देखें, तो सारी टीमों के पास मेरे खिलाफ प्लान होता है. अभी तक, मुझे लगता है कि यह सिर्फ फील्डिंग की बात नहीं है, यह पिच और गेंदबाजी से भी जुड़ा है', उन्होंने कहा, 'यह सब उस हफ्ते की तैयारी से जुड़ा है, जो मैं मैच से पहले करता हूं, क्योंकि कभी मुझे दो‑तीन दिन मिलते हैं, कभी एक हफ्ता. तो मेरे दिमाग में पहले से होता है कि मुझे इन गेंदबाजों से चुनौती मिलने वाली है. लेकिन जाहिर है, मैं अपनी स्वाभाविक सोच पर बहुत ज्यादा भरोसा करता हूं. मैं काफी समय से इसकी प्रैक्टिस करता आ रहा हूं.'
क्यों छ्क्के जड़ना जोखिम भरा नहीं, अभिषेक फिलॉस्फी से समझें
क्या छक्के मारना बहुत ही ज्यादा जोखिम भरी रणनीति है? के सवाल पर अभिषेक बोले, 'मुझे नहीं लगता कि यह बहुत ज्यादा जोखिम भरा है. मैं इसे अपना कंफर्ट ज़ोन तो नहीं कहूंगा, लेकिन ऐसा है कि मैं हमेशा पहले आने की सोचता हूं, क्योंकि पहले छह ओवर आपको मिलते हैं. और यही चीज़ मैं नेट्स में भी प्रैक्टिस करता रहा हूं. मेरे दिमाग में हमेशा यही रहता है कि अगर मैं ऐसा कर पाया, तो फायदा होगा क्योंकि आप देखें कि सभी टीमों के मुख्य गेंदबाज पहले, दूसरे या तीसरे ओवर में ही गेंदबाजी करते हैं. और अगर मैं पहले तीन‑चार ओवर में रन बना लेता हूं, तो फिर हमारे पास हमेशा बढ़त रहती है.
जानें क्यों ताकत नहीं, टाइमिंग पर है भरोसा
क्या आप ताकत से बड़े शॉट मारते हैं? पर अभिषेक ने कहा, 'नहीं, अगर आप देखें, तो मैं कभी पावर हिटिंग नहीं करता, क्योंकि मैं इतना ताकतवर खिलाड़ी नहीं हूं कि गेंद को ज़ोर से मारकर बहुत दूर भेजूं. यहां मेरे लिए सारा महत्व टाइमिंग का है. मुझे बस गेंद को देखना होता है और कंडीशंस के मुताबिक खुद को ढालना होता है. अभी हम पूरे भारत में खेल रहे हैं, और हर जगह हालात अलग होते हैं, तो मुझे जल्दी एडजस्ट करना पड़ता है.'
प्लानिंग नेट पर कम, दिमाग में ज्यादा!
कौन‑सी गेंद पर शॉट खेलने का प्लान करते हैं?, पर लेफ्टी ओपनर ने कहा, 'इसके लिए मैं एक दिन पहले ही प्लान कर लेता हूं. फिर चाहे नेट सेशन मिले या नहीं. यह हमेशा मेरे दिमाग में रहता है, क्योंकि गेंदबाज यहां क्या प्लान लेकर आएंगे, और मुझे भी उसी हिसाब से तैयार रहना होता है. मुझे लगता है अगर आप वीडियो देखें या अपनी बल्लेबाज़ी के वीडियो देखें, तो आपको अंदाज़ा हो जाता है कि गेंदबाज कहां गेंद डालने वाला है या मैं कहां शॉट खेलने वाला हूं. लेकिन अंत में यह मेरे अपने शॉट्स पर भरोसा करने की बात होती है. मेरे पास बहुत ज्यादा शॉट्स नहीं हैं. बस कुछ ही शॉट्स हैं, जिनकी मैं खूब प्रैक्टिस करता हूं और फिर उन्हें ही मैच में एग्जीक्यूट करता हूं.














