- T20 वर्ल्ड कप में पाक और भारत के बीच मैच को लेकर आईसीसी, पीसीबी और बांग्लादेश बोर्ड की लाहौर में बैठक हुई
- जमव ने फोर्स मेज्योर लागू करने के लिए आईसीसी को पत्र भेजा, जिसमें सरकार के सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला दिया गया
- आईसीसी का मानना है कि खेल के हित को एकतरफा कार्रवाई से ऊपर रखना चाहिए और बातचीत जारी है
T20 वर्ल्ड कप 2026 में पाकिस्तान, भारत के खिलाफ मैच खेलेगा या नहीं? इसको लेकर आईसीसी, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के बीच लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में मीटिंग शुरू हो गई है. भारतीय समय के मुताबिक करीब 8:00 बजे मीटिंग शुरू हुई है. आईसीसी की ओर से इमरान ख्वाजा मीटिंग की नुमाइंदगी कर रहे हैं, जबकि पाकिस्तान की तरफ से मोहसिन नकवी और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड की तरफ से अमीनुल इस्लाम बुलबुल इस मीटिंग का हिस्सा हैं.
इससे पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने पाकिस्तान से यह स्पष्ट करने को कहा था कि भारत के खिलाफ टी20 विश्व कप मैच खेलने से इनकार को सही ठहराने के लिए ‘फोर्स मेज्योर (अप्रत्याशित या नियंत्रण से बाहर की स्थिति)' प्रावधान कैसे लागू किया जा सकता है. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने इस मामले में सरकार पर जिम्मेदारी डालते हुए खुद को स्थिति से अलग करने की कोशिश की थी.
इस बेहद अहम बैठक से अब उम्मीद की एक किरण नजर आ रही है. आईसीसी के एक निदेशक ने उम्मीद जताई कि 15 फरवरी को होने वाला यह महत्वपूर्ण मुकाबला होगा. उन्होंने कहा, 'बातचीत शुरू हो गई है.'
पहले आईसीसी ने पीसीबी से पूछा है कि जब टीम सरकार के निर्देशों के तहत पूरे टूर्नामेंट में बाकी मैच खेलने को तैयार है, तो सिर्फ एक मुकाबले से हटने का फैसला कैसे जायज ठहराया जा सकता है.
पीसीबी ने कुछ दिन पहले आधिकारिक तौर पर आईसीसी को पत्र लिखकर ‘फोर्स मेज्योर' प्रावधान लागू करने की मांग की थी. इसमें सरकार के उस सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला दिया गया था, जिसमें 15 फरवरी को कोलंबो में होने वाले भारत के खिलाफ मुकाबले से टीम को दूर रहने का निर्देश दिया गया था.
पीसीबी ने इस मुद्दे पर विचार-विमर्श के लिए आईसीसी से संपर्क किया और विश्व संस्था की औपचारिक चिट्ठी मिलने के बाद पीसीबी ने आगे की बातचीत शुरू कर दी है.
आईसीसी पीसीबी के साथ बातचीत कर रहा है ताकि इस मामले का समाधान निकाला जा सके. आईसीसी का मानना है कि खेल के हित को किसी एकतरफा कार्रवाई से ऊपर रखा जाना चाहिए.
‘फोर्स मेज्योर' एक कानूनी प्रावधान है, जो किसी पक्ष को असाधारण परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारियों से हटने की छूट देता है. इसमें युद्ध, प्राकृतिक आपदा, सरकारी आदेश या सार्वजनिक आपातकाल जैसी स्थितियां शामिल होती हैं.
इसका इस्तेमाल तभी मान्य होता है जब प्रभावित पक्ष साबित करे कि घटना अनपेक्षित, अपरिहार्य थी और उसने सभी संभव प्रयास किए ताकि नुकसान को कम किया जा सके. इसके लिए सिर्फ असुविधा या राजनीतिक पसंद पर्याप्त नहीं होती.
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