- मध्य क्षेत्र के लिए खेल रहे विदर्भ के दानिश मालेवर ने बेंगलुरु में दलीप ट्रॉफी के दूसरे दिन 203 रन बनाए
- दानिश ने 222 गेंदों में 36 चौके और एक छक्का लगाकर अपने करियर का पहला दोहरा शतक पूरा किया
- दोहरा शतक पूरा कर दानिश ने रिटायर आउट होने का फैसला लिया, जो फर्स्ट क्लास क्रिकेट में असामान्य है
Danish Malewar creates history: बेंगलुरु में खेले जा रहे दलीप ट्रॉफी के पहले राउंड के दूसरे दिन मध्य क्षेत्र के लिए खेल रहे विदर्भ के बल्लेबाज दानिश मालेवर (Danish Malewar) ने इतिहास रच दिया. पहले दिन नॉर्थ-ईस्ट के खिलाफ 198 रनों पर नाबाद रहे दानिश दूसरे दिन 203 रन बनाकर आउट हुए. उन्होंने इतने रनों के लिए 222 गेंद खेलीं और 36 चौके और 1 छक्का लगाया. बहरहाल, इस पारी से दानिश मालेवर इतिहास रचते हुए विजय मर्चेंच और श्रीलंका के महान अरविंद डि-सिल्वा के क्लब में शामिल हो गए.
दानिश मालेवर का बड़ा फैसला
इससे पहले 21 साल के मालेवर का सर्वश्रेष्ठ स्कोर 153 रन था, जो उन्होंने पिछले सीजन के रणजी ट्रॉफी के फाइनल में बनाया था. शुक्रवार को खेलने उतरे मालेवर ने दिन के पहले ही ओवर में चौका जड़कर स्कोर को दो सौ के पार पहुंचा दिया. यह उनके पेशेवर करियर का पहला दोहरा शतक रहा. इसके बाद दानिश ने रिटायर आउट होने का फैसला किया. यह थोड़ा चौंकाने वाला रहा क्योंकि फर्स्ट क्लास क्रिकेट में बमुश्किल ही रिटायर होते हैं. लेकिन दानिश ने यह फैसला लेकर खुद को स्पेशल क्लब में शामिल करा लिया.
क्रेग स्पेरमैन थे आखिरी बल्लेबाज
फर्स्ट क्लास क्रिकेट में दो सौ का स्कोर बनाकर रिटायर आउट का फैसला लेने वाले आखिरी बल्लेबाज क्रेग स्पेरमैन (216 रन) थे. उन्होंने ग्लोसेस्टशायर के लिए साल 2005 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के खिलाफ खेलते हुए फैसला लिया था. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में दोहरा शतक बनाकर रिटायर आउट होकर लौटने के मामले में स्पेरमैन का स्कोर सर्वश्रेष्ठ स्कोर बना हुआ है. वहीं, भारतीयों की बात करें, तो दानिश से पहले दोहरा शतक बनाकर रिटायर आउट होने का फैसला 81 साल पहले विजय मर्चेंट ने लिया था. तब साल 1944 में क्रिकेट क्लब ऑफ इ़ंडिया के लिए खेलते हुए सेनना के खिलाफ मर्चेंट ने तब आउट होने का फैसला किया, जब वह 201 रन पर खेल रहे थे.
अटापट्टू इकलौते टेस्ट खिलाड़ी
वहीं, जब बात टेस्ट क्रिकेट क आती है, तो दोहरा शतक बनाकर रिटायर आउट होने का फैसला लेने वाले इतिहास में श्रीलंका के मर्वन अटापट्टू इकलौते बल्लेबाज हैं. वहीं, श्रीलंका के महान अरविंद-डि-सिल्वा एक और बल्लेबाज हैं, जिन्होंने साल 1994-95 में मैशोनालैंड कंट्री डिस्ड्रिक्ट के खिलाफ हरारे में 202 रन बनाने के बाद रिटायर आउट होने का फैसला लिया. उन्हें छोड़कर टेस्ट इतिहास में और किसी दूसरे बल्लेबाज ने ऐसा त्याग करने की हिम्मत नहीं दिखाई.