अक्सर हालात किसी शख्स को ऐसी जगह लाकर खड़ा कर देते हैं, जहां कोई जवाब नहीं मिलता. पूर्व कप्तान विराट कोहली लगातार आज भी यह पूछते होंगे कि अगर हालात बाद में 'ऐसे' ही पैदा होने थे, तो उनकी रातों-रात कप्तानी क्यों ले ली गई? इसके पीछे का सच क्या है, यह कभी न कभी जरूर सामने आएगा. लेकिन तब तत्कालीन BCCI अध्यक्ष सौरव गांगली तब यही कहा था था कि बोर्ड रेड और व्हाइट बॉल फॉर्मेट में अलग-अलग कप्तान नहीं चाहता, लेकिन फिर ऐसे हालात पैदा हो गए कि इससे बोर्ड को गुजरना ही पड़ा. लेकिन फिर से हालात लगभग वहीं पहुंच गए हैं, जहां विराट को कप्तानी से हटाए जाने के बाद पहुंच गए थे. मतलब आज टेस्ट और टी20 में अलग-अलग कप्तान हैं. और कौन जानता है कि आगे वनडे में भी क्या हो? या 2027 विश्व कप में क्या हो? बीसीसीआई के पूर्व सचिव जय शाह तो अभी भी रोहित को ही कप्तान मानते हैं (हालिया बयान). बहरहाल, यह गिल का कर्म (प्रदर्शन) ही था, जिससे बोर्ड ने पुराने मॉडल पर लौटने की हिम्मत दिखाई.
गिल के 'कर्म' से पुराने मॉडल पर लौटने की कोशिश!
यह गिल का इंग्लैंड में असाधारण प्रदर्शन ही था, जिससे बीसीसीआई ने तमाम पंडितों, पूर्व क्रिकेटरों की सलाह, गिल के पिछले एक साल के प्रदर्शन, साल 2024 में टी20 विश्व कप टीम का हिस्सा रहे यशस्वी जायसवाल सहित की प्रचंड दावेदारी और न जाने किन-किन पहलुओं को बिसराते हुए 'पुराने मॉडल (तीनों फॉर्मेटों में एक कप्तान)' की ओर लौटने की हिम्मत दिखाई. पहले उन्हें रोहित की जगह अक्तूबर में ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए वनडे टीम की कमान सौंपी, जबकि इससे चंद रोज पहले ही अक्षर पटेल की जगह गिल की बतौर उप-कप्तान टी20 टीम में एंट्री कराकर यह मैसेज दिया गया कि वह इस फॉर्मेट में भी भविष्य के कप्तान हैं, लेकिन उनकी लगातार नाकामी ने इस मॉडल ही हवा निकल गई. और गिल बतौर उप-कप्तान रहते हए ही टी20 विश्व कप से विदा हो गए.
'नाकाम कर्म' ने ही कराई विश्व कप से छुट्टी!
किस्मत की बात एक बार को चंद मैचों में हो सकती है, लेकिन पिछले लगातार मैचों में यह उनका 'नाकाम कर्म' ही था, जिसने उनका टी20 विश्व कप टीम से पत्ता साफ करा दिया. पिछले साल सितंबर में एशिया कप से लेकर दिसंबर तक गिल ने भारत के लिए खेले 15 टी20 मैचों में सिर्फ 24.25 का औसत निकाला. वह एक भी अर्द्धशतक भी नहीं बना सके. वहीं, बाहर चल रहे यशस्वी जायसवाल की मनोदशा कैसी रही होगी, यह कोई भी समझ सकता है. जाहिर है कि यह इनफ इस इनफ वाली बात थी! अभिषेक को दूसरे छोर पर बढ़िया जुगलबंदी नहीं ही मिल रही थी. गिल को तर्कों की कसौटी पर जाना ही था! और वह विश्व कप से चले ही गए.
...अब जगह भी 'कर्म (प्रदशर्न)' से ही मिलेगी
अब वनडे और टेस्ट कप्तान गिल उस वनडे मोड़ पर खड़े हैं, जहां कोई गारंटी नहीं है कि 2027 विश्व कप में वह कप्तान रहेंगे ही रहेंगे. वहीं वह ऐसे टी20 मोड़ पर आ पहुंचे हैं, जहां रास्ता बहुत ही दुर्गम हो चला है. सवाल गिल के प्रदर्शन, इस फॉर्मेट में जरूरी मनोदशा का तो है ही, तो वहीं प्रबंधन अब दूसरे ओपनर में विकेटकीपर-ओपनर चाहता है. अब सैमसन के साथ इशान किशन हो चले हैं. इतना ही काफी नहीं, यहां अब यशस्वी जायसवाल रेस में उनसे आगे गए हैं, तो मौका मिलते ही इस पर झपटने का इंतजार कर रहे हैं. इससे अलग वैभव सूर्यवंशी ने एक अलग ही सवाल खड़ा कर दिया है. और इन तमाम पहलुओं के सामने गिल के सामने सिर्फ एक ही ही चीज खड़ी है-कर्म (प्रदर्शन). किस्मत की बातें छोड़िए, कर्म में जुट जाहिए. कुछ ही महीने बाद आईपीएल आ रहा है! फिर से साबित करने को बहुत कुछ है!














