
पंजाब के शिक्षा विभाग ने राज्य के 2,800 सरकारी स्कूलों में जल्द स्मार्ट क्लास शुरू करने का फैसला किया है. स्कूल शिक्षा महानिदेशक प्रशांत गोयल ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य शिक्षा गुणवत्ता प्रदान कर शिक्षा प्रणाली में सुधार लाना है. उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत एक हजार प्राथमिक और 1,800 सेकंडरी स्कूलों में 64 करोड़ रुपये की लागत से लैपटॉप, मल्टी मीडिया प्रोजेक्टर और हाई स्पीड इंटरनेट सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी.
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उन्होंने बताया कि स्मार्ट क्लास रूमों के अलावा 880 सीनियर सेकंडरी स्कूलों में 30 करोड़ रुपये की लागत से 5 -5 किलोवाट के कुशल ऊर्जा प्लांट लगाने का भी प्रस्ताव है. सरकार के इस कदम से बच्चे सरकारी स्कूलों की ओर आकर्षित होंगे. इस कदम से सरकारी स्कूलों के बच्चे भी प्रतियोगिता की परीक्षाओं में भाग लेने के योग्य हो सकेंगे.
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आपको बता दें कि 'स्मार्ट क्लास' में पढ़ाई ब्लैक बोर्ड पर नहीं बल्कि प्रोजेक्टर पर होती है. स्मार्ट क्लास में डिजीटल तकनीक से बच्चों को पढ़ाया जाता है. देश के कई स्कूलों में अब स्मार्ट क्लास में पढ़ाया जा रहा है. बच्चे स्मार्ट क्लास में पढ़ने में दिलचस्पी दिखाते हैं. ऐसे में इसे विकासशील देश में शिक्षा की नई तस्वीर कहा जा सकता है. पढ़ाई का ये नया तरीका दिलचस्प और आसान है, लेकिन थोड़ा महंगा भी है.
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