यह ख़बर 23 फ़रवरी, 2011 को प्रकाशित हुई थी

'मंदी से पूर्व की विकास दर पर लौटा भारत'

खास बातें

  • विश्व बैंक ने कहा कि चालू वित्तवर्ष की पहली छमाही की मजबूत विकास दर के बल पर भारत ने मंदी के पूर्व की विकास दर को हासिल कर लिया है।
वाशिंगटन:

विश्व बैंक ने कहा है कि चालू वित्तवर्ष की पहली छमाही की मजबूत विकास दर के बल पर भारतीय अर्थव्यवस्था ने वैश्विक मंदी के पूर्व की विकास दर को हासिल कर लिया है, लेकिन उच्च महंगाई दर चिंता का विषय बनी हुई है। भारत के संबंध में मंगलवार को जारी दूसरी छमाही रिपोर्ट में विश्व बैंक ने कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक ब्याज दरों में वृद्धि की अपनी नीति को बनाए रख सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं है कि प्रमुख मुद्रास्फीति की दर मांग बढ़ने के कारण बढ़ी या फिर खाद्यान्नों की कीमतों में वृद्धि के कारण बढ़ी है। अगर खाद्यान्नों की कीमतों में वृद्धि के कारण मुद्रास्फीति की दर बढ़ी है, तो वर्तमान मौद्रिक नीति में उठाए गए कदम पर्याप्त नहीं है। दिसंबर तक की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के कृषि क्षेत्र में शानदार विकास दर्ज किया गया है, जबकि औद्योगिक क्षेत्र में विकास की दर लगातार तीन तिमाहियों तक दोहरे अंक में रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्तवर्ष और अगले वित्तवर्ष में विकास की दर 8.5 से 9 फीसदी के बीच रहने की उम्मीद है, जो मंदी के पूर्व की स्थिति के समान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर में खाद्यान्नों की कीमतों में हुई वृद्धि अस्थाई थी और मार्च, 2011 तक थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की दर घटकर 7.5 फीसदी होने की संभावना थी। भारी व्यापार घाटे के कारण चालू वित्तवर्ष में चालू खाता घाटा जीडीपी के करीब 3.5 फीसदी तक पहुंचने की उम्मीद है।


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