खास बातें
- मंत्री समूह ने यूरिया कीमतों को नियंत्रणमुक्त करने को मंजूरी देते हुए उर्वरक कंपनियों को पहले वर्ष में इसके दामों में 10% तक वृद्धि की अनुमति दी है।
New Delhi: उर्वरक पर गठित मंत्री समूह (जीओएम) ने यूरिया कीमतों को नियंत्रणमुक्त करने को मंजूरी देते हुए उर्वरक कंपनियों को नीति लागू होने के पहले वर्ष में इस महत्वपूर्ण कृषि खाद के दामों में 10 प्रतिशत तक वृद्धि की अनुमति दी है। फिलहाल यूरिया का न्यूनतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) 5,310 रुपये प्रति टन है। यदि मंत्रिमंडल नीति के मसौदे को मंजूरी दे देता है, तो इसकी कीमतों में 500 रुपये प्रति टन से अधिक का इजाफा होगा। घरेलू स्तर पर यूरिया का उत्पादन पिछले कुछ साल से 2.1 करोड़ टन पर ही टिका हुआ है। शेष 60 से 70 लाख टन यूरिया की जरूरत को आयात से पूरा किया जाता है। उद्योग संगठन भारतीय उर्वरक संघ ने कहा है कि यूरिया कीमतों को नियंत्रणमुक्त किए जाने से घरेलू स्तर पर इसके उत्पादन को बढ़ाया जा सकेगा। इससे आयात पर निर्भरता भी कम होगी। वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी की अगुवाई वाले मंत्री समूह ने नीति के मसौदे के मंजूरी दे दी है। सूत्रों ने बताया कि इसमें नीति के दूसरे साल से उर्वरक कंपनियों को बाजार के हिसाब से यूरिया का अधिकतम खुदरा मूल्य तय करने की आजादी होगी। सरकार ने पिछले साल अप्रैल में उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल के लिए पोटाश वाले उर्वरकों मसलन डाई अमोनियम फास्फेट (डीएपी) और म्यूरिएट ऑफ पोटाश (एमओपी) के लिए न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी योजना (एनबीएस) शुरू की थी। सूत्रों ने बताया कि मंत्री समूह ने अब यूरिया को एनबीएस के तहत लाने का फैसला किया है। योजना आयोग के सदस्य सौमित्रा चौधरी की अगुवाई वाली सचिवों की समिति ने मसौदा तैयार किया है। सूत्रों ने बताया कि इस मसौदे को पूरी तरह मंजूरी दे दी गई है। प्रस्तावित यूरिया नीति के तहत सरकार गैस आधारित यूरिया संयंत्रों को 4,000 रुपये प्रति टन की सब्सिडी देगी। हालांकि, नाफ्था आधारित संयंत्रों को नीति के तहत और ऊंची सब्सिडी मिलेगी। इन इकाइयों को खुद को गैस आधारित संयंत्रों में तब्दील करने के लिए तीन साल का समय दिया जाएगा। नीति के मसौदे में उर्वरक क्षेत्र के लिए प्राकृतिक गैस हेतु विभिन्न समूहों के लिए एक अनुमानित मूल्य की सिफारिश की गई है।