यह ख़बर 20 फ़रवरी, 2013 को प्रकाशित हुई थी

ट्रेड यूनियनों की हड़ताल से 20,000 करोड़ के नुकसान की आशंका

खास बातें

  • वाणिज्य एवं उद्योग मंडल एसोचैम ने कहा है कि ट्रेड यूनियनों की दो दिन की आम हड़ताल से आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ेगा और 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का नुकसान होगा।
नई दिल्ली:

वाणिज्य एवं उद्योग मंडल एसोचैम ने कहा है कि ट्रेड यूनियनों की दो दिन की आम हड़ताल से आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ेगा और 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का नुकसान होगा।

एसोचैम का कहना है कि पहले से ही नरमी से जूझ रही देश की अर्थव्यवस्था हड़ताल से और कमजोर होगी। चालू वित्तवर्ष के दौरान आर्थिक वृद्धि की दर पिछले एक दशक में सबसे कम (5 प्रतिशत) रह जाने का अनुमान है। पिछले वर्ष आर्थिक वृद्धि 6.2 प्रतिशत रही थी।

एसोचैम अध्यक्ष राजकुमार धूत ने कहा है कि महंगाई की चिंता सभी को है और श्रमिक संगठनों की हड़ताल से वस्तुओं की आपूर्ति गड़बड़ाने से महंगाई और बढ़ सकती है। धूत ने कहा कि देशव्यापी इस हड़ताल से बैंकिंग, बीमा और ट्रांसपोर्ट जैसे सेवा क्षेत्र पर ज्यादा असर पड़ेगा, साथ ही औद्योगिक उत्पादन भी प्रभावित होगा। यहां तक कि सब्जियों की आवाजाही प्रभावित होने से कृषि क्षेत्र पर भी असर होगा। फल एवं सब्जियां यदि तुरंत गंतव्य तक नहीं पहुंचती हैं, तो इनके खराब होने का जोखिम रहता है।

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com

हड़ताल से जीडीपी में होने वाले नुकसान का अनुमान दैनिक जीडीपी में 30 से 40 प्रतिशत नुकसान के आधार पर लगाया गया है। केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) के अग्रिम अनुमान के अनुसार चालू वित्तवर्ष के दौरान देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 95 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। इस हिसाब से दैनिक जीडीपी 26,000 करोड़ रुपये और दो दिन में 52,000 करोड़ रुपये बैठती है। ऐसे में हड़ताल से यदि 30 से 40 प्रतिशत दैनिक कारोबार का नुकसान होता है, तो दो दिन की हड़ताल से कुल मिलाकर 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये जीडीपी का नुकसान होगा।