खास बातें
- टाटा ने कहा कि प. बंगाल में और निवेश तभी होगा जबकि हमें महसूस होगा कि यहां हमारे प्रति कोई विरोध नहीं है।
कोलकाता: टाटा सन्स के अध्यक्ष रतन टाटा ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में और निवेश तभी होगा जबकि हमें महसूस होगा कि यहां हमारे प्रति कोई विरोध नहीं है। टाटा ग्लोबल बेवरेजेज (जो पहले टाटा टी थी) की सालाना आम बैठक में टाटा ने कहा जब हम इस बात से संतुष्ट हो जाएंगे कि हमारे खिलाफ यहां कोई द्वेष भाव नहीं है तो हम राज्य में निवेश करेंगे। उन्होंने कहा पश्चिम बंगाल में हमने बहुत निवेश किया है। टीसीएस और इंडिया होटेल्स समेत टाटा स्टील के कुछ निवेश हैं। मौका मिलेगा तो नया निवेश करेंगे। शेयरधारकों द्वारा सिंगूर मसले पर उठाए गए सवाल के जवाब में टाटा ने कहा कि नैनो संयंत्र की स्थापना के पीछे कोई गुप्त मंशा नहीं थी बल्कि उद्योग द्वारा लंबे समय से उपेक्षित क्षेत्र में आने और पश्चिम बंगाल की जनता से प्यार होने के कारण की गई थी। मई में सत्ता में आने के बाद ममता बनर्जी की सरकार ने सिंगूर भूमि विकास और पुनर्वास अधिनियम पारित किया ताकि टाटा मोटर्स से जमीन वापस ली जा सके जिसे बाद में कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। यह पूछने पर कि क्या सिंगूर मामले में न्यायालय से बाहर निपटारे की संभावना है, टाटा ने कहा यह फिलहाल अदालत में है। मैं इसके बारे में कोई टिप्पणी नहीं कर सकता और न्यायालय के फैसले पहले भूमि का आवंटन नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कानूनी तौर पर वैध सरकार ने हमें जमीन दी थी। यदि संयंत्र चालू होता तो हम वहां 8,000 लोगों को रोजगार दे सकते थे। हम जमीन के मालिक नहीं हैं। हम तो पट्टेदार हैं।