खास बातें
- बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जीडीपी के आंकड़े उम्मीद से काफी कम रहे, जिससे कारोबारियों की धारणा विचलित हुई तथा सभी की निगाह आगामी 18 जून को आने वाली मौद्रिक नीति पर होगी।
नई दिल्ली: शेयर बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि काफी उतार-चढ़ाव भरे कारोबारी सत्रों के बीच निकट भविष्य में शेयर बाजारों में गिरावट का रुख कायम रहेगा तथा और यूरो क्षेत्र से जुड़ी खबरें घरेलू शेयर बाजारों में अल्पावधिक रुख तय करती रहेंगी।
पिछले महीने शेयर बाजारों में लगभग छह प्रतिशत की गिरावट आई थी। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े उम्मीद से काफी कम रहे, जिससे कारोबारियों की धारणा विचलित हुई है तथा सभी की निगाह आगामी 18 जून को आने वाली मौद्रिक नीति पर होगी।
बोनान्जा पोर्टफोलियो की शोध विश्लेषक शानू गोयल ने कहा, बाजार में आगे और गिरावट आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। सभी की निगाहें 18 जून को आने वाली भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति पर होगी। वैश्विक घटनाक्रम बाजार को प्रभावित करना जारी रखेंगे। जून के महीने में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) आंकड़ों के आने, मई महीने का मुद्रास्फीति आंकड़ा आने तथा रिजर्व बैंक की नीति जैसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम को देखते हुए कारोबारियों को जून में अधिक उतार-चढ़ाव रहने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों ने कहा कि घरेलू स्थितियों के अलावा 17 जून को यूनान के चुनाव पर बारीकी निगाह होगी। कोटक सिक्योरिटीज के तकनीकी शोध विभाग के प्रमुख श्रीकांत चौहान ने कहा, यूनान के चुनाव और भारतीय रिजर्व बैंक की बैठक जैसे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों से पहले चालू महीने के लिए हमें बाजार में उतार-चढ़ाव कायम रहने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों ने कहा कि निवेशकों की निगाह मानसून की प्रगति पर भी होगी। जियोजित बीएनपी पारिबास के शोध प्रमुख एलेक्स मैथ्यू ने कहा, फिलहाल अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों ही स्तरों पर शेयर बाजार के संकेत नकारात्मक हैं। काफी महत्वपूर्ण घटनाक्रमों को देखते हुए जून के महीने में काफी उतार-चढ़ाव भरा कारोबारी सत्र देखने को मिल सकता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर धीमी पड़ने तथा यूरो क्षेत्र को लेकर ताजा चिंताओं के कारण बंबई शेयर बाजार का सूचकांक 253 अंकों की गिरावट के साथ 16,000 अंक के स्तर से नीचे 15,965.16 अंक तक नीचे जा चुका है। भारत की आर्थिक वृद्धि दर 31 मार्च को समाप्त हुई तिमाही के 5.3 प्रतिशत के साथ साथ वर्ष 2011.12 के 6.5 प्रतिशत के नौ वर्ष के निम्नतम स्तर पर आ गया।