यह ख़बर 25 जून, 2012 को प्रकाशित हुई थी

RBI से भी ज्यादा शक्तिशाली हैं कुछ बैंक : पूर्व RBI गवर्नर

खास बातें

  • रेड्डी ने इस मौके पर प्रमुख रेटिंग एजेंसियों के मुद्दे को भी उठाया जो कि बाजार पर गहरा प्रभाव रखती हैं, उन्होंने कहा कि कुछ बड़े अंतरराष्ट्रीय बैंकों का कई देशों की राजनीतिक अर्थव्यवस्था बड़ा दबदबा है।
नई दिल्ली:

ऐसे समय जब वैश्विक आर्थिक संकट के लिये वित्तीय क्षेत्र पर दोष मढ़ा जा रहा है, रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर वाईवी रेड्डी ने कहा है कि कुछ वित्तीय संस्थान और बैंक तो रिजर्व बैंक से भी ज्यादा शक्तिशाली हैं।

रेड्डी ने इस मौके पर प्रमुख रेटिंग एजेंसियों के मुद्दे को भी उठाया जो कि बाजार पर गहरा प्रभाव रखती हैं, उन्होंने कहा कि कुछ बड़े अंतरराष्ट्रीय बैंकों का कई देशों की राजनीतिक अर्थव्यवस्था बड़ा दबदबा है।

रेड्डी ने कहा ‘‘कई बार देखा गया है कि वे (अंतरराष्ट्रीय बैंक) किसी एक देश में ऐसे अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय लेनदेन के सौदों में शामिल होते हैं जिनकी वैधता पर संदेह होता है, पर वे ऐसा संबंधित दोनों देशों हमेशा एक जैसा व्यवहार नहीं करते हैं।’’ रेड्डी रविवार को स्विटजरलैंड के बेसल में पेर जैकॉब्सन फाउंडेशन व्यखान-2012 दे रहे थे।

उन्होंने कहा ‘‘अंतरराष्ट्रीय बैंकों के पास कर अपवंचना से जुड़े कारोबार को करने के लिये मौके और प्रोत्साहन दोनों ही होते हैं। ऐसे संचालनों के जरिये अंतरराष्ट्रीय बैंकों को कई देशों में आर्थिक राजनीति में उल्लेखनीय प्रभाव हासिल होता है।’’

रिजर्व बैंक के पूर्व प्रमुख ने कहा ‘‘मौजूदा वैश्विक वित्तीय बाजार परिवेश में कुछ बड़े वैश्विक वित्तीय समूह काफी व्यापक और शायद कुछ केन्द्रीय बैंकों से भी ज्यादा शक्तिशाली हो गये हैं।’’

नीति के मोर्चे पर रेड्डी ने कहा ‘‘उपलब्ध सबूतों से यह पता चलता है कि कई प्रभावित देशों में वित्तीय क्षेत्र से राजनीतिक गतिविधियों के लिये योगदान हाल के वषोर्ं में काफी तेजी से बढ़ा है।’’ इस लिहाज से यह देखा गया है कि कई बड़े व्यापक आधार वाले वित्तीय संस्थान ऐसी स्थिति में हैं कि वह न केवल राजनीतिक स्तर पर संचालन व्यवस्था में अपना प्रभाव रखते हैं बल्कि कापरेरेट संचालन व्यवस्था में भी प्रभाव रखते हैं।

रेड्डी ने अपने संबोध में किसी देश का नाम तो नहीं लिया लेकिन उनका निशाना ज्यादातर पश्चिम देशों के बैंकों पर था। आमतौर पर रेटिंग एजेंसियों और लेखा कंपनियों की भूमिका को लेकर भारत में कई मंचों पर अलोचना होती रही है।

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रेड्डी ने किसी भी बैंक अथवा वित्तीय संस्थान का नाम लिये बिना कहा ‘‘कुछ जानी मानी रेटिंग एजेंसियों और लेखा कंपनियों और कुछ प्रमुख व्यावसायिक समाचार एजेंसियों के बीच जानकारी का आदान प्रदान होता रहता है। इससे उनका बाजार पर एक तरह से प्रभाव बना रहता है। सीधी बात करने की ख्याति रखने वाले रेड्डी ने कहा कि ‘‘मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में केन्द्रीय बैंकों का हित जुड़ा है बल्कि बल्कि इसमें उसकी एक विधिसम्मत भूमिका भी है जो उसे निभानी है।’’ उन्होंने कहा ‘‘इससे लगता है कि दुनिया की विकसित अर्थव्यवस्थाओं में वित्तीय क्षेत्र और विशेषकर बैंकिंग क्षेत्र के प्रति विश्वास घटा है।’’