खास बातें
- वैश्विक मंदी के दौर में भारत की औद्योगिक इकाइयों में सामान्य कर्मचारियों की तुलना में अधिक पैसा पाने वाले अफसरों के वेतन में ऊंची दर से वृद्धि हुई।
New Delhi: वैश्विक आर्थिक संकट के दौर में भारत की औद्योगिक इकाइयों में सामान्य कर्मचारियों की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक पैसा पाने वाले अधिकारियों के वेतन-भत्तों में कहीं ऊंची दर से वृद्धि हुई। वर्ष 2008-09 में जब पूरी दुनिया वैश्विक वित्तीय संकट के झटके से हिल रही थी, तब भारतीय उद्योगों में कर्मचारियों की नियुक्ति और उनके वेतन बढ़ने की रफ्तार धीमी पड़ी, लेकिन इसमें भी अधिकारी वर्ग के भत्तों और सुविधाओं में वृद्धि की रफ्तार और तेज हो गई। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की शनिवार को जारी 2008-09 की उद्योगों की वार्षिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के आंकड़े तो कुछ यही कहानी बयां करते हैं। इस सर्वेक्षण के अनुसार 2008-09 में एक साल पहले के मुकाबले कारखानों में काम करने वाले कर्मचारियों के वेतन में 17.13 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि इस दौरान दिया गया कुल मेहनताना एक साल पहले के मुकाबले 22.76 प्रतिशत बढ़ गया। मंत्रालय में सचिव डॉ टीसीए अनंत ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा, ऐसा नहीं है कि देश के कल-कारखानों में मंदी का असर नहीं पड़ा। कारखानों में कामगारों और अन्य कर्मचारियों की संख्या में वृद्धि के आंकड़े साफ बताते हैं कि मंदी का असर हुआ है। उन्होंने कहा कि 2007-08 में भी वैश्विक मंदी का असर भारतीय कारखानों पर दिखाई दिया। 2006-07 में कारखानों में कर्मचारियों की संख्या में एक साल पहले के मुकाबले जहां 10.43 प्रतिशत वृद्धि हुई, वहीं 2007-08 में यह 4.03 प्रतिशत ही बढ़ी और 2008-09 में 7.06 प्रतिशत ही बढ़ी। सर्वेक्षण के अनुसार 2008-09 में देश के कुल 1 लाख 55 हजार 321 कारखानों में 87 लाख, 76 हजार, 745 श्रमिक काम कर रहे थे, जबकि सुपरवाइजर, अधिकारी तथा अन्य कर्मचारियों सहित कुल एक करोड़, 13 लाख, 27 हजार, 485 कर्मचारी इन उद्योगों से जुड़े थे। सर्वेक्षण के तहत विनिर्माण, बिजली कारखाने, गैस और जलापूर्ति संयंत्र के साथ-साथ कपास छंटाई, सफाई और गांठें बनाना, नमक बनाना तथा कुछ मरम्मत सेवाओं को शामिल किया जाता है। अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और सिक्किम को छोड़कर देशभर में सर्वेक्षण का काम इसी साल किया गया। सर्वेक्षण में यह मुद्दा भी सामने आया है कि कर्मचारियों का औसत वेतन 2008-09 में नौ प्रतिशत बढ़कर सालाना 68,103 रुपये हो गया, लेकिन पूंजीगत आउटपुट औसत को देखते हुए कर्मचारियों की कार्यक्षमता में हल्की गिरावट आई है। सर्वेक्षण के अनुसार ज्यादातर कारखानों में 49 तक कर्मचारी ही कार्यरत हैं। कुल कारखानों में 72 प्रतिशत कारखाने ऐसे हैं, जिनमें 49 तक कर्मचारी हैं, जबकि कुल मूल्य वर्धन में उनका हिस्सा मात्र आठ प्रतिशत ही है। देश में 274 कारखाने ऐसे हैं, जिनमें 5,000 अथवा इससे अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं और इनका सकल मूल्यवर्धन में 14 प्रतिशत तक योगदान है। सर्वेक्षण के अनुसार सबसे ज्यादा 26 हजार 122 कारखाने तमिलनाडु में और उसके बाद 20 हजार 450 कारखाने महाराष्ट्र में हैं। आंध्र प्रदेश में 16,903, गुजरात में 14,863 और उत्तर प्रदेश में 10,935 उद्योग कार्यरत हैं। कुल मिलाकर देश के संघ शासित प्रदेशों और राज्यों में वर्ष 2008-09 में एक करोड़ 55 लाख 321 कारखाने कार्यरत थे, जिनमें 15 लाख 35 हजार 177 करोड़ रुपये की पूंजी निवेश है और कुल 1 करोड़ 13 लाख 27 हजार 485 लोग इनमें काम कर रहे हैं।