यह ख़बर 05 अगस्त, 2011 को प्रकाशित हुई थी

बैंक निजीकरण की आशंकाओं पर राज्यसभा ने जताई चिंता

खास बातें

  • मार्क्‍सवादी तपन कुमार सेन ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार सुधारों के नाम पर राष्ट्रीयकृत बैंकों में तबाही मचा रही है।
New Delhi:

राज्यसभा में वाम सहित विभिन्न दलों के सदस्यों ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के करीब 10 लाख कर्मचारियों और अधिकारियों द्वारा की जा रही हड़ताल का मुद्दा उठाते हुए सरकार से राष्ट्रीयकृत बैंकों का निजीकरण नहीं करने और इस संबंध में बयान देने की मांग की। मार्क्‍सवादी तपन कुमार सेन ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार सुधारों के नाम पर राष्ट्रीयकृत बैंकों में तबाही मचा रही है। उन्होंने कहा कि आम आदमी को धीरे-धीरे संस्थागत ऋण प्रणाली से बाहर किया जा रहा है और उसे सूदखोरों एवं महाजनों की शरण में जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सुधार के नाम पर जो प्रत्यक्ष एवं परोक्ष उपाय किए जा रहे हैं, उनसे बैंकों को निजीकरण के रास्ते पर ले जाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को फौरन निजीकरण के प्रयास बंद करने होंगे। भाकपा के डी राजा ने कहा कि एक समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बैंकों का राष्ट्रीयकृत किया था और आज कांग्रेस नीत संप्रग सरकार बैंकों के निजीकरण के प्रयास में है।


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